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सुबह का Breakfast गर्मियों में बच्चों को रखेगा Super fast- Dr. Tarun Anand

गर्मियों का मौसम आ गया है और गर्मी ने अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है बच्चोंं में बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है. गर्मी का कहर बढ़ता जा रहा है जिससे छोटे बच्चों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. माता-पिता बच्चों को ले जाकर के डॉक्टरों के पास दिखा रहे हैं. उसका सबसे बड़ा कारण है कि गर्मी की वजह से छोटे बच्चे बीमारी का शिकार हो रहे हैं. गर्मी के चलते लोग घरों से बाहर निकलने से भी घबरा रहे हैं. लगातार बढ़ रहे पारे के चलते लोग सर्दी, जुकाम, बुखार के साथ तेज धूप और लू में हीट स्ट्रोक, पेट दर्द जैसी बीमारियों से परेशान होने लगे हैं. अस्पतालों में मरीजों की लाइन लग रही है.

आपको बता दें की भारत एक ट्रॉपिकल देश है, इसलिए यहां कई मौसम आते हैं लेकिन अत्यधिक तापमान भी रहता है. फिर चाहे सर्दी हो, गर्मी हो या फिर मानसून. यही वजह है कि गर्मी में स्कूल/कॉलेज दो-तीन महीनों के लिए बंद रहते हैं. गर्मी एक ऐसा मौसम है जब बड़ों के साथ-साथ बच्चे भी बहुत बीमार पड़ते हैं. इसलिए मां-बाप को इस वक्त बच्चों को लेकर सतर्क रहने की ज़रूरत होती है.

आज हम बात करेंगे गर्मी के मौसम में बच्चों में होने वाली समस्याओं के बारे में. बाल रोग विशेषज्ञ से जानेंगे कि आखिर गर्मी के मौसम में बच्चों में होने वाली कौन सी बीमारियाँ हैं, जिनके बारे में जानना जरूरी है और बच्चों के माता-पिता को कितना सतर्क रहने की ज़रूरत है. विशेषज्ञ के रूप में आरोग्य इंडिया प्लेटफोर्म से जुड़े हैं डॉ तरुण आनंद.

डॉ तरुण आनंद बताते हैंकि आजकल जो गर्मियां आ गई हैं, तो इस मौसम में तापमान बहुत ज्यादा होता है. ऐसे में बच्चों को हाइड्रेट रखना बहुत जरूरी होता है. बच्चों मे हाइड्रेशन के लिए पानी ज्यादा से ज्यादा पिलायें. अगर बच्चा 1.5 से 2साल का है तो उसे 1.5 से 2 साल लीटर पानी रोज दें. साथ ही ऐसे फ्रूट्स दें, जिसमें पानी और इलेक्ट्रोलाइट की मात्रा ज्यादा है. नारियल पानी, तरबूज, शिकंजी और नींबू पानी देकर आप बच्चों का हाइड्रेशन मेंटेन कर सकते हैं.

साथ ही इस बात का भी ध्यान रखना है कि बच्चा सुबह ब्रेकफास्ट करके ही स्कूल जाये. अक्सर देखा जाता है कि बच्चे जब धूप में जाते हैं, खेलते हैं या स्कूल के ग्राउंड में खड़े होकर प्रेयर्स करते हैं तो हीट स्ट्रोक की संभावना अधिक रहती है. हीट स्ट्रोक में बच्चा एकदम डिहाइड्रेट हो जाता है, बच्चे को हाई ग्रेड फीवर आता है, बच्चे को नोजिया, उल्टी और पेट में दर्द भी हो सकता है. इस सभी चीजों को बचाने के लिए हमें डिहाइड्रेशन पर खास फोकस करना जरूरी है.

अगर इस मौसम में बीमारी की बात की जाये तो बच्चों में गैस्ट्रोएंट्राइटिस बहुत ज्यादा हो रहा है. इसके होने की वजह एक तो हाइड्रेशन कम है. दूसरा पानी और खाने से होने वाला इंफेक्शन हो गया है. वहीं अगर बात की जाये वायरल गैस्ट्रोएंट्राइटिस की, तो इस मौसम में वायरल डिजीज भी थोड़ी बहुत बढ़ी हुई हैं.

गर्मी के मौसम में और कौन-कौन सी बीमारियाँ जकड़ती हैं, इनके लक्षण क्या हैं?

गर्मियों में अस्वच्छ भोजन और पानी के सेवन से बच्चों में दस्त की समस्या आम हो जाती है. बार-बार दस्त से बच्चे के शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे उन्हें डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है. इसके लक्षण हैं- बार-बार ढीला मल, पेट में दर्द, बुखार, उल्टी. बचाव के लिए बच्चों को हमेशा साफ पानी पिलाएं. बाहर का बनाया हुआ भोजन देने से बचें. फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही दें.

डेंगू का बुखार मच्छरों के काटने से फैलता है क्योंकि गर्मियों में मच्छरों का प्रकोप ज्यादा होता है, इसलिए बच्चों को मच्छरों से बचाना बहुत जरूरी है. इसके लक्षण- तेज बुखार, शरीर में तेज दर्द, जोड़ों में दर्द, उल्टी, इससे बचाव के लिए बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं. मच्छरदानी का इस्तेमाल करें. घर के आसपास पानी जमा न होने दें.

चिकनगुनिया का बुखार भी मच्छरों के काटने से फैलता है. हर साल इसके कई हजार मामले सामने आते हैं, जिनमें बच्चों की मात्रा सबसे ज्यादा होती है. इसके लक्षण तेज बुखार, शरीर में तेज दर्द, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, थकान. इससे बचाव के लिए – डेंगू से बचाव के उपाय चिकनगुनिया से बचाव में भी कारगर हैं.

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