स्वास्थ्य और बीमारियां

18% Teenagers कर रहे ये गलती, पीते हैं ड्रग तो हो जायें Alert

एक नए अध्ययन में चौंकाने वाली बात सामने आई है. अध्ययन के अनुसार, 18% टीनएजर्स पूरे दिन जागने के लिए कैफीन का सेवन करते हैं. ये जानकारी उन माता-पिता के लिए चिंता का विषय है जो बताते हैं कि उनके बच्चे हफ्ते में ज़्यादातर या पूरे समय कैफीन पीते रहते हैं.

अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए इस अध्ययन में 1095 माता-पिता शामिल थे. इनमें से 25% ने बताया कि उनके बच्चे हर रोज़ या लगभग हर रोज़ कैफीन का सेवन करते हैं.

कम करें कैफीन का सेवन

अध्ययन की सह-निदेशक और बाल रोग विशेषज्ञ सुज़ैन वूलफोर्ड का कहना है कि “इस अध्ययन से पता चलता है कि शायद माता-पिता को ये न पता हो कि टीनएजर्स के लिए कैफीन का सेवन कितना कम करना चाहिए.”

अध्ययन के मुताबिक, टीनएजर्स के लिए सबसे आम कैफीन सोर्स कोल्ड ड्रिंक्स (73%), चाय (32%), कॉफी (31%) और एनर्जी ड्रिंक्स (22%) हैं. माता-पिता बताते हैं कि ज़्यादातर बच्चे घर पर (81%) कैफीन का सेवन करते हैं. इसके अलावा रेस्टोरेंट में (43%), दोस्तों के साथ (3%) और स्कूल में (25%) भी कैफीन का सेवन होता है.

कैफीन एक ड्रग है जो दिमाग और तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है.

डॉक्टर वूलफोर्ड ने चेतावनी दी है कि “कैफीन एक ड्रग है जो दिमाग और तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है. इसकी बहुत अधिक मात्रा युवाओं के लिए कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है.”

अध्ययन में बताया गया है कि अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स बच्चों और किशोरों द्वारा कैफीन के सेवन को हतोत्साहित करती है. वहीं, अन्य विशेषज्ञ टीनएजर्स के लिए प्रतिदिन 100 मिलीग्राम से ज़्यादा कैफीन ना लेने की सलाह देते हैं.

ज्यादा कैफीन पीने के नुकसान

लगभग 60% माता-पिता का कहना है कि उन्होंने हाई कैफीन वाले उत्पादों के जोखिमों के बारे में सुना है. लेकिन आधे से अधिक माता-पिता ये भी बताते हैं कि वो अपने बच्चों के लिए पेय पदार्थ खरीदते समय कैफीन की मात्रा को कम ही देखते हैं.

अध्ययन के अंत में डॉक्टर वूलफोर्ड का सुझाव है कि “माता-पिता को अपने बच्चों से ज़्यादा कैफीन पीने के नुकसान के बारे में बात करनी चाहिए. साथ ही घर पर, स्कूल में या दोस्तों के साथ मिलकर कैफीन रहित विकल्पों को अपनाने पर भी विचार करना चाहिए. माता-पिता बच्चों के डॉक्टर की मदद भी ले सकते हैं. डॉक्टर कैफीन के जोखिमों को समझाने और इसे कम करने की रणनीति बनाने में मदद कर सकते हैं.”

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