Health Tips: घुटनों और जोड़ों को मजबूत बनाती हैं ये सब्जियां, जानिए कोलेजन बढ़ाने का प्राकृतिक तरीका


Healthy Tips in Hindi: जोड़ों में दर्द और घुटनों की अकड़न अब सिर्फ बुजुर्गों की प्रॉब्लम नहीं रही। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, हर उम्र के लोग इस परेशानी का सामना कर रहे हैं। मार्केट में तमाम सप्लीमेंट्स अवेलेबल हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स नेचुरल सॉल्यूशन पर जोर दे रहे हैं – रोजमर्रा की सब्जियों के जरिए बॉडी में कोलेजन प्रोडक्शन बढ़ाना।
क्या है कोलेजन और क्यों जरूरी | Healthy Tips in Hindi
कोलेजन एक इम्पॉर्टेंट प्रोटीन है जो कार्टिलेज, लिगामेंट्स और टेंडन्स में पाया जाता है। यह जोड़ों को स्मूदली चलने में मदद करता है। उम्र बढ़ने के साथ बॉडी में इसका प्रोडक्शन घट जाता है, जिससे जोड़ों में स्टिफनेस, मोबिलिटी में कमी और डिजनरेशन का खतरा बढ़ जाता है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल मेडिसिन में पब्लिश्ड रिसर्च के मुताबिक, 30 साल की उम्र के बाद हर साल 1-2% कोलेजन प्रोडक्शन नेचुरली डिक्रीज होता है।
ये वेजिटेबल्स हैं फायदेमंद | Healthy Tips in Hindi
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पालक और ग्रीन लीफी वेजिटेबल्स: पालक, मेथी और सरसों का साग विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं जो कोलेजन सिंथेसिस के लिए जरूरी हैं। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में पब्लिश्ड स्टडी बताती है कि विटामिन सी कोलेजन फॉर्मेशन में की एंजाइम कोफैक्टर के रूप में काम करता है और इसकी कमी से कोलेजन सिंथेसिस सीरियसली अफेक्ट होती है।
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लाल शिमला मिर्च: ऑरेंज से भी ज्यादा विटामिन सी की क्वांटिटी के कारण यह कोलेजन प्रोडक्शन को बूस्ट करती है और कनेक्टिव टिश्यूज को स्ट्रॉन्ग बनाती है। न्यूट्रिएंट्स जर्नल में 2017 की रिसर्च सजेस्ट करती है कि रेड बेल पेपर्स में 127 मिलीग्राम विटामिन सी पर 100 ग्राम होता है, जो सिट्रस फ्रूट्स से भी ज्यादा है।
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टमाटर: इसमें मौजूद लाइकोपीन नाम का एंटीऑक्सीडेंट इन्फ्लेमेशन कम करता है और कोलेजन को डैमेज से बचाता है। पके टमाटर में इसकी क्वांटिटी अधिक होती है। ब्रिटिश जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी में पब्लिश्ड 2011 की स्टडी ने कन्फर्म किया कि लाइकोपीन यूवी रेडिएशन से कोलेजन डिग्रेडेशन को प्रिवेंट करता है और स्किन मैट्रिक्स को प्रोटेक्ट करता है।
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गाजर: बीटा-कैरोटीन और विटामिन ए से भरपूर गाजर सेल रीजनरेशन में हेल्पफुल है और कार्टिलेज की हेल्थ को मेंटेन करता है। जर्नल ऑफ ऑर्थोपेडिक रिसर्च के अनुसार, विटामिन ए डेफिशिएंसी कार्टिलेज फॉर्मेशन और मेंटेनेंस को नेगेटिवली इम्पैक्ट करती है।
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चुकंदर: इसमें मौजूद बीटालेन्स एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज से भरपूर होते हैं और ब्लड सर्कुलेशन में इम्प्रूवमेंट करते हैं, जिससे जोड़ों को बेहतर न्यूट्रिशन मिलता है। फूड केमिस्ट्री जर्नल में 2015 की रिसर्च ने बीटरूट के एंटी-इन्फ्लेमेटरी इफेक्ट्स को वैलिडेट किया है, जो जॉइंट इन्फ्लेमेशन रिड्यूस करने में हेल्पफुल हैं।
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ब्रोकली और फूलगोभी: इनमें सल्फर कंपाउंड्स होते हैं जो कोलेजन फॉर्मेशन के लिए एसेंशियल हैं और इन्फ्लेमेशन कम करने में हेल्प करते हैं। आर्थराइटिस एंड रयूमेटोलॉजी जर्नल में पब्लिश्ड स्टडी बताती है कि क्रूसीफेरस वेजिटेबल्स में सल्फोराफेन कंपाउंड ऑस्टियोआर्थराइटिस प्रोग्रेशन को स्लो कर सकता है और कार्टिलेज डैमेज को प्रिवेंट करता है।
एडिशनल रिसर्च फाइंडिंग्स | Healthy Tips in Hindi
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मॉलिक्यूलर साइंसेज में 2020 की कॉम्प्रिहेंसिव रिव्यू के मुताबिक, प्लांट-बेस्ड एंटीऑक्सीडेंट्स ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को रिड्यूस करके कोलेजन ब्रेकडाउन को कम करते हैं। न्यूट्रिएंट्स जर्नल की 2019 की मेटा-एनालिसिस सजेस्ट करती है कि विटामिन सी सप्लीमेंटेशन (वेजिटेबल्स से नेचुरली मिलने वाला) कोलेजन सिंथेसिस को सिग्निफिकेंटली इम्प्रूव करता है। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ वेजिटेबल्स खाना ही काफी नहीं है। रेगुलर एक्सरसाइज, एडिक्वेट पानी पीना, प्रोटीन-रिच डाइट लेना और स्मोकिंग से बचना भी जरूरी है। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन की स्टडी के अनुसार, स्मोकिंग कोलेजन सिंथेसिस को 40% तक रिड्यूस कर सकती है।
जर्नल ऑफ एग्रीकल्चरल एंड फूड केमिस्ट्री में पब्लिश्ड रिसर्च हाइलाइट करती है कि दाल, बीन्स और ड्राई फ्रूट्स में मौजूद एमिनो एसिड्स – एस्पेशली प्रोलाइन, ग्लाइसीन और लाइसीन – कोलेजन फॉर्मेशन के लिए नेसेसरी बिल्डिंग ब्लॉक्स प्रोवाइड करते हैं। हेल्थ प्रोफेशनल्स का मानना है कि एक्सपेंसिव सप्लीमेंट्स की जगह नेचर-डिराइव्ड इन न्यूट्रिएंट-रिच वेजिटेबल्स को रेगुलरली डाइट में इंक्लूड करना अधिक इफेक्टिव और सेफ उपाय है। प्रिवेंशन हमेशा ट्रीटमेंट से बेहतर होती है, इसलिए आज से ही अपनी डाइट में ये चेंजेज करें और फ्यूचर में जॉइंट प्रॉब्लम्स से बचें।





