Personal Hygiene Tips: प्राइवेट पार्ट और पर्सनल हाइजीन का रखें खास ख्याल, इसे न करें नजरअंदाज


Personal Hygiene Tips: जब ग्रूमिंग या स्किन केयर की बात आती है तो हम सभी ही अपनी ग्रूमिंग और चेहरे के लिए काफी पैसा खर्च करते हैं और कई प्रकार के प्रोडक्ट्स का भी उपयोग करते हैं पर जितना जरूरी मानते हैं और अपनी स्किन के बाकी हिस्सों का ध्यान रखते हैं उतना ही जरूरी है कि प्राइवेट पार्ट/ पर्सनल हाइजीन का भी ख्याल रखा जाए क्योंकि इससे पसीना, गंदगी और बैक्टीरिया जमा होने से रोक सकते हैं।
पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखना क्यों है जरूरी? | Personal Hygiene Tips
पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखना सेहत के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि सही देखभाल न करने से इन्फेक्शन, जलन, बदबू और कई तरह की परेशानियां का सामना करना पड़ सकता है। खासकर महिलाओं में गलत सफाई के तरीकों, जैसे वजाइनल डूशिंग या केमिकल वाले साबुन के इस्तेमाल करने से प्राकृतिक पीएच संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे बार-बार इन्फेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।
वहीं, पुरुषों में अगर फोरस्किन के नीचे सफाई न हो तो वहां गंदगी जमा होकर संक्रमण की वजह बन जाती है। इसके अलावा सही हाइजीन न रखने से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, जो दर्दनाक होने के साथ-साथ बार-बार हो सकती हैं यह शुरुआत में तो छोटी पर बार बार होने पर बड़ी समस्या का कारण बन जाती है।
प्राइवेट पार्ट और पर्सनल हाइजीन कैसे रखें ध्यान? | Personal Hygiene Tips
महिलाओं को केवल बाहरी सफाई की जरूरत है। हाइजीन का ध्यान रखने के लिए उन्हें सिर्फ वल्वा यानी बाहरी हिस्से को गुनगुने पानी या हल्के बिना खुशबू वाले साबुन से साफ करना चाहिए और अगर आप टिशू पप्पर का उपयोग करती है तो टॉयलेट के बाद हमेशा आगे से पीछे की ओर पोंछना चाहिए। वहीं, पीरियड्स में पैड हर 4-6 घंटे में और टैम्पोन या मेंस्ट्रुअल कप निर्देशों के अनुसार बदलें, जिससे आपको किसी प्रकार के इन्फेक्शन का खतरा न हो।
वहीं, पुरुषों को भी रोजाना प्राइवेट पार्ट धोना चाहिए और फोरस्किन को धीरे से पीछे करके अंदर का हिस्सा साफ करने के बाद अच्छी तरह सुखाना चाहिए। दोनों को ही सूती अंडरवियर पहनना और रोजाना बदलना चाहिए, वर्कआउट या तैराकी के बाद गीले कपड़ों में ज्यादा देर तक नहीं रहना चाहिए, उससे रेसेज व अन्य बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है और शारीरिक संबंध के बाद पेशाब करना भी जरूरी है। यह यूटीआई से बचाव में मददगार साबित होता है। अगर फिर भी कोई असामान्य लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।





