Mental Health: चिड़चिड़ापन और तनाव है? यहां जानिए क्यों है ऐसा?


Mental Health: शरीर को स्वस्थ रखने की बात होती है तो अक्सर हमारा ध्यान हड्डियों, मांसपेशियों और इम्युनिटी पर जाता है। लेकिन शरीर में मौजूद कुछ पोषक तत्व ऐसे भी हैं, जिनका असर हमारी शारीरिक सेहत के साथ-साथ दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। विटामिन-डी इन्हीं में से एक है। आमतौर पर इसे हड्डियों को मजबूत रखने वाले विटामिन के तौर पर जाना जाता है, लेकिन इसकी भूमिका सिर्फ इतनी ही नहीं है। अगर आपको लगातार थकान महसूस होती है, नींद ठीक नहीं आती, बिना किसी खास वजह के चिड़चिड़ापन रहता है या मूड बार-बार बदलता रहता है, तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
इनमें तनाव, खराब नींद, जीवनशैली और कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के साथ पोषक तत्वों की कमी भी एक कारण हो सकती है। विटामिन-डी की कमी को लेकर हुए शोधों में भी मानसिक स्वास्थ्य के साथ इसके संबंध पर ध्यान दिया गया है। विटामिन-डी शरीर में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। मस्तिष्क में भी विटामिन-डी के रिसेप्टर्स पाए जाते हैं, जिससे वैज्ञानिकों ने इसके न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य से संभावित संबंधों का अध्ययन किया है। यह मस्तिष्क के सामान्य कामकाज और कुछ ऐसे रसायनों की प्रक्रिया से जुड़ा माना जाता है, जो मूड और नींद को प्रभावित करते हैं।
विटामिन–डी की कमी से मूड बार–बार बदल सकता है? | Mental Health
अगर आप महसूस कर रहे हैं कि छोटी-छोटी बातों पर आपका मूड बदल जाता है, कभी बहुत चिड़चिड़ापन रहता है तो कभी बिना वजह उदासी महसूस होती है, तो इसे सिर्फ तनाव समझकर नजरअंदाज न करें। विटामिन-डी शरीर और मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली में भूमिका निभाता है। कुछ अध्ययनों में विटामिन-डी की कमी और अवसाद जैसे लक्षणों के बीच संबंध देखा गया है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि हर व्यक्ति में विटामिन-डी की कमी ही मूड खराब होने की वजह है। इसलिए अगर मूड में बदलाव लंबे समय से बना हुआ है, साथ में लगातार थकान, नींद की परेशानी या उदासी जैसे लक्षण भी हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
डिप्रेशन का भी बढ़ जाता है खतरा | Mental Health
विटामिन-डी और डिप्रेशन के बीच संबंध को लेकर कई शोध हुए हैं। कुछ अध्ययनों में विटामिन-डी का स्तर कम होने और अवसाद के लक्षणों के बीच संबंध पाया गया है। अगर किसी को लगातार उदासी, किसी काम में मन न लगना, नींद या भूख में बदलाव, ऊर्जा की कमी या निराशा जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो उसे केवल विटामिन-डी सप्लीमेंट लेकर ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। अच्छी नींद शरीर और दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। विटामिन-डी की कमी आपकी नींद को भी प्रभावित कर सकती है। अगर आपकी नींद लंबे समय से खराब है, रात में बार-बार आंख खुलती है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी दिनभर थकान रहती है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। कुछ स्थितियों में विटामिन-डी की कमी को भी जिम्मेदार माना जा सकता है।
विटामिन–डी की कमी को कैसे पहचानें? | Mental Health
विटामिन-डी की कमी होने पर हर व्यक्ति में एक जैसे लक्षण नहीं दिखाई देते। कुछ लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण भी नहीं होते। वहीं कुछ लोगों में हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपको लगातार ऐसे लक्षण महसूस हो रहे हैं या आपको लगता है कि आपके शरीर में विटामिन-डी की कमी का जोखिम है, तो डॉक्टर की सलाह से ब्लड टेस्ट कराया जा सकता है।
विटामिन-डी पाने का एक प्रमुख प्राकृतिक स्रोत सूर्य की रोशनी है। इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थों में भी विटामिन-डी पाया जाता है। डाइट में पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना और संतुलित जीवनशैली अपनाना जरूरी है। ध्यान रखें कि बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के विटामिन-डी की हाई डोज वाली सप्लीमेंट लेना सही नहीं है। शरीर में किसी भी विटामिन की जरूरत से ज्यादा मात्रा नुकसानदायक हो सकती है।





