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Haert Attack से बचाने में मदद करेगी लाल रंग की ये सब्जी, Expert ने बताया कैसे

महिलाओं में हार्ट अटैक का रिस्क कम करने के लिए भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाली एक सस्ती-सी सब्जी का जूस कारगर साबित हो सकता है। यह सब्जी है चुकंदर या बीटरूट जो एक पौष्टिक सब्जी है और आसानी से मिल भी जाती है। हाल ही में एक स्टडी में यह दावा किया गया कि मेनोपॉज के बाद के फेज में जब महिलाओं में हार्ट अटैक का रिस्क बहुत अधिक बढ़ जाता है तब बीटरूट का जूस पीने से महिलाओं की हार्ट हेल्थ में सुधार किया जा सकता है और उनमें हार्ट अटैक का खतरा भी कम किया जा सकता है।

हार्ट अटैक रोकने में कैसे सक्षम है चुकंदर?

बीटरूट या चुकंदर में नाइट्रेट पाया जाता है। यह तत्व हार्ट डिजीजेज का रिस्क कम करता है। स्टडी में शोधकर्ताओं ने बताया कि चुकंदर के रस में नाइट्रेट की मात्रा अधिक होती है। यह नाइट्रेट शरीर में पहुंचकर ब्लड की सप्लाई और नसों में ऑक्सीजन के फ्लो को तेज कर देता है। इससे हार्ट पर दबाव कम होता है और इससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी स्थितियों का रिस्क कम होने लगता है। यह नसों में जमा गंदगी को भी साफ करने में मदद करता है। यह नसों को आराम दिलाता है और उनकी सिकुड़न को कम करता है।

बता दें कि मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक महत्वपूर्ण फेज है जिसमें उनके पीरियड्स आना बंद हो जाते हैं। मेनोपॉज शुरू होने से पहले और उसके बाद के कुछ वर्षों तक महिलाओं को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। पीरियड्स बंद होने का यह फेज आमतौर पर महिलाओं में 45 से 50 साल की उम्र में होता है। फ्रंटीयर जर्नल में प्रकाशित इस नयी स्टडी के अनुसार, चूंकि मेनोपॉज के दौरान महिलाओं में हार्ट अटैक का रिस्क जब बढ़ने लगता है तब चुकंदर का जूस पीने से महिलाओं को कमजोरी से राहत मिलती है। साथ ही हार्ट को हेल्दी रखने में मदद मिलती है।

महिलाओं के लिए बीटरूट जूस पीने के फायदे

इस स्टडी में जहां मेनोपॉज के दौरान कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ में सुधार के लिहाज से बीटरूट का जूस फायदेमंद बताया गया है। वहीं, चुकंदर का जूस पीने से महिलाओं को कुछ और बड़े फायदे हो सकते हैं। कुछ ऐसे ही स्वास्थ्य लाभ ये हैं –

  • बीटरूट का जूस पीने से नसों की सिकुड़न कम होती है। इससे कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम की कार्यप्रणालियों में सुधार होता है।
  • एनीमिया की समस्या महिलाओं में अधिक देखी जाती है। बीटरूट का जूस पीने से महिलाओं में हिमोग्लोबिन की कमी पूरी होती है जिससे कमजोरी और एनीमिया के लक्षण कम होते हैं।

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