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Health Tips: सुबह उठकर पानी पीना: प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान

Health Tips in Hindi: हमारे पूर्वजों ने हजारों वर्ष पहले सुबह पानी पीने को जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बनाया था। आयुर्वेद में इसे ‘उषापान’ कहा गया है – ‘उषा’ (भोर) + ‘पान’ (पीना)। आज आधुनिक विज्ञान इस प्राचीन परंपरा की पुष्टि कर रहा है। आइए जानते हैं कि यह सदियों पुरानी आदत कितनी वैज्ञानिक और फायदेमंद है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में स्पष्ट लिखा है: “प्रातःकाले जलपानम् आरोग्यस्य प्रथम सोपानम्” – सुबह पानी पीना स्वास्थ्य की पहली सीढ़ी है। आयुर्वेद के अनुसार, रात के दौरान वात, पित्त और कफ दोषों का संतुलन बिगड़ता है। सुबह ताजा पानी इस संतुलन को बहाल करता है और ‘अम’ (विषाक्त तत्व) बाहर निकालता है।

योग में जल का महत्व

योगियों ने पंचतत्वों में जल को दूसरा सबसे महत्वपूर्ण तत्व माना। हठयोग प्रदीपिका में सुबह के जल का उल्लेख है जो नाड़ी शुद्धि और प्राण ऊर्जा के प्रवाह में सहायक होता है। ऋग्वेद में कहा गया: “आपो अस्मान् मातरः शुन्धयन्तु” – जल हमारी माता है जो हमें शुद्ध करती है। वेदों में पानी को ‘अमृत’ और ‘जीवनदाता’ माना गया है। आचार्य सुश्रुत ने लिखा कि मानव शरीर में जल सबसे महत्वपूर्ण द्रव्य तत्व है। प्राचीन चिकित्सकों ने पहचान लिया था कि शरीर का अधिकांश भाग पानी से बना है।

आधुनिक विज्ञान

  • – शरीर का 60% हिस्सा पानी है

  • – यह आवश्यक पोषक तत्व है जिसे शरीर स्वयं नहीं बना सकता

  • – कोशिकाओं तक पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचाता है

  • – शरीर का तापमान नियंत्रित करता है

  • – जोड़ों को चिकनाई देता है

रात भर की प्रक्रिया

रात में शरीर ‘निशा-शुद्धि’ (रात्रिकालीन शुद्धिकरण) से गुजरता है। निद्रा के समय अग्नि मंद होती है और विषाक्त पदार्थ एकत्रित होते हैं। 6-8 घंटे की नींद में शरीर सांस, पसीने और आंतरिक प्रक्रियाओं से पानी खोता है। सुबह गहरे पीले रंग का मूत्र निर्जलीकरण का संकेत है। आयुर्वेद कहता है कि सुबह का पानी ‘मेधा’ (बुद्धि) और ‘स्मृति’ (याददाश्त) बढ़ाता है।

Good Health Care Tips, By Drinking water so many times throughout the day,  you will Always be Fit And Water Drinking Time | Good Health Care Tips:  दिनभर में इतनी बार पिएं

  • – 2020 के अध्ययन में पाया गया: 500 मिली पानी से दिन भर याददाश्त बेहतर रहती है

  • – लाल रक्त कोशिकाएं बढ़ने से मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन मिलती है

  • – 1.36% निर्जलीकरण भी मूड और एकाग्रता खराब करता है

  • – थकान और चिंता कम होती है

पाचन तंत्र की शुद्धि: उषःकाले जलपानात् मल-मूत्र विसर्जनम् सुकरम्” – सुबह पानी से मल त्याग आसान होता है। यह ‘अग्नि’ प्रदीप्त करता है और ‘कोष्ठ शुद्धि’ (आंतों की सफाई) करता है।- पाचन तंत्र सक्रिय होता है

  • – कब्ज से बचाव

  • – लीवर की कार्यक्षमता बढ़ती है

  • – पाचक रस स्रावित होते हैं

  • – फाइबर का काम बेहतर होता है

त्वचा की चमक

“जलपानात् त्वचा स्निग्धा कान्तिमती च भवति” – पानी से त्वचा चिकनी और चमकदार होती है।

  • – त्वचा हाइड्रेटेड रहती है

  • – झुर्रियां कम होती हैं

  • – त्वचा की लोच बनी रहती है

  • – विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं

  • – प्राकृतिक चमक आती है

वजन नियंत्रण

गुनगुना पानी ‘मेदोधातु’ (वसा) संतुलित करता है और ‘अग्नि’ तेज करता है।

  • – सामान्य वजन वालों में मेटाबॉलिज्म 30% बढ़ा

  • – मोटे व्यक्तियों में 24% वृद्धि

  • – प्रभाव 30-40 मिनट रहता है

  • – भूख-प्यास का भ्रम दूर होता है

  • – अनावश्यक कैलोरी से बचाव

हृदय स्वास्थ्य

हृदय ‘प्राण का निवास’ है। जल रक्त संचार सुचारू करता है और धमनियां शुद्ध रखता है।

  • – पुरुषों में कोरोनरी रोग का खतरा 46% कम

  • – महिलाओं में 59% कम

  • – खून के थक्के बनने की संभावना घटती है

  • – रक्त वाहिकाओं में संचार बेहतर

जोड़ों का स्वास्थ्य

आयुर्वेद:*जल प्राकृतिक ‘स्नेहक’ है। वात प्रकृति वालों को विशेष लाभ। उपास्थि (Cartilage) 80% पानी से बनी है। हाइड्रेशन से जोड़ों की सहनशक्ति बढ़ती है। गठिया, पीठ दर्द में राहत।

बैठकर पानी पीएं या खड़े होकर, क्या आप भी रहते हैं कंफ्यूज...जानिए पानी पीने  का सही तरीका

गुर्दे (किडनी) की सफाई

‘मूत्राशय’ की सफाई और ‘अश्मरी’ (पथरी) से बचाव।

  • – रक्त फिल्ट्रेशन बेहतर

  • – हार्मोन उत्पादन में सहायता

  • – खनिज अवशोषण

  • – पथरी से बचाव

  • – मूत्र पथ संक्रमण में कमी

प्रतिरक्षा तंत्र

‘ओज’ (प्रतिरक्षा शक्ति का सार) की वृद्धि और ‘व्याधि क्षमत्व’ (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ती है।

  • – लसीका तंत्र को समर्थन

  • – श्वेत रक्त कोशिकाओं की कार्यक्षमता बढ़ती है

  • – संक्रमण से बेहतर सुरक्षा

रक्त शर्करा नियंत्रण

  • तांबे के बर्तन का पानी या औषधीय पानी ‘प्रमेह’ (मधुमेह) में लाभदायक।

  • – भिंडी का पानी गर्भावधि मधुमेह में शर्करा कम करता है

  • – नींबू पानी में विटामिन सी और फ्लेवोनॉइड टाइप 2 मधुमेह में लाभदायक

अन्य लाभ

  • – सिरदर्द और माइग्रेन में राहत

  • – मासिक धर्म के दर्द में कमी

  • – नींद की गुणवत्ता में सुधार (अप्रत्यक्ष रूप से)

  • – बालों को मजबूती (बाल 25% पानी से बने हैं)

कैसे पिएं

  • – आयुर्वेद: 2-3 अंजलि (400-600 मिली)

  • – आधुनिक: 8-16 औंस (250-500 मिली)

तापमान

  • – *वात प्रकृति: गुनगुना (सूखी त्वचा, कब्ज, जोड़ों का दर्द)

  • – *पित्त प्रकृति: सामान्य (अम्लता, गर्मी)

  • – *कफ प्रकृति: गर्म (वजन, सुस्ती)

विशेष विधियां

  • तांब्र जल: रात भर तांबे के बर्तन में रखा पानी – त्रिदोष संतुलन और रोगाणुरोधी

  • नींबू पानी: आधा नींबू – विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट, अग्नि प्रदीप्त

  • जीरा पानी: रात को भिगोया – पाचन और वजन घटाने में

  • त्रिफला पानी: रात को डाला – आंतों की गहन सफाई

सही समय और क्रम

  1. बिस्तर छोड़ने के तुरंत बाद

  2. मुंह धोने से पहले

  3. भोजन से 45 मिनट पहले

  4. बैठकर, धीरे-धीरे घूंट-घूंट करके

भ्रांतियां और सच्चाई

भ्रांति : केवल सुबह ही फायदेमंद

सच: पूरे दिन हाइड्रेटेड रहना जरूरी। सुबह अच्छी शुरुआत है, लेकिन दिन भर 6-8 गिलास चाहिए।

 

भ्रांति : ठंडा पानी मेटाबॉलिज्म बहुत बढ़ाता है

सच: केवल 5% वृद्धि (4-7 कैलोरी/गिलास)। आयुर्वेद भी अत्यधिक ठंडे पानी से मना करता है – यह ‘अग्नि मंद’ कर सकता है।

 

भ्रांति : पानी पूर्ण डिटॉक्स करता है

सच: किडनी की प्राकृतिक सफाई में मदद करता है, लेकिन यह निरंतर प्रक्रिया है, किसी खास समय की नहीं।

व्यावहारिक सुझाव

  • बिस्तर के पास रखें: तांबे या कांच के बर्तन में

  • अलार्म सेट करें: याद दिलाने के लिए

  • स्वाद बढ़ाएं: नींबू, पुदीना, खीरा

  • धीरे-धीरे बढ़ाएं: पहले एक गिलास, फिर अधिक

  • मूत्र देखें: हल्का पीला = सही हाइड्रेशन

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