Health Tips: पेशाब में बन रहा है अधिक झाग, इन गंभीर बीमारियों का है ये संकेत

Foam in Urine Causes: पेशाब का रंग और उसमें होने वाले बदलाव हमारे स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं। आमतौर पर पेशाब में हल्का झाग बनना सामान्य बात है, जो कि पेशाब के तेज बहाव और टॉयलेट में मौजूद डिटर्जेंट के कारण हो सकता है। लेकिन अगर यह झाग लगातार और अत्यधिक मात्रा में बन रहा है, और यह साबुन के झाग जैसा गाढ़ा और स्थायी है, तो यह एक चेतावनी का संकेत हो सकता है। पेशाब में अधिक झाग का मुख्य कारण प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) का मूत्र में आना है, जिसे प्रोटीन्यूरिया कहते हैं।
यह अक्सर किडनी से जुड़ी समस्याओं का एक लक्षण होता है, जहां किडनी रक्त को ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती और प्रोटीन मूत्र के साथ बाहर निकलने लगता है। इस स्थिति को अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि यह कई अन्य गंभीर बीमारियों का शुरुआती लक्षण हो सकता है। इसलिए अगर आपको लगातार और असामान्य रूप से झागदार पेशाब दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी है।
किडनी से जुड़ी समस्याएं | Foam in Urine Causes
किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर करने का काम करती है। जब किडनी खराब होने लगती है, तो यह रक्त में मौजूद प्रोटीन को भी फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे वह पेशाब के साथ बाहर आने लगता है। पेशाब में अधिक प्रोटीन होने से वह झागदार हो जाता है। क्रोनिक किडनी रोग या नेफ्रोटिक सिंड्रोम जैसी स्थितियां इसका प्रमुख कारण हो सकती हैं।
मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर | Foam in Urine Causes
मधुमेह और हाई ब्लड प्रेशर दोनों ही लंबे समय में किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बढ़ा हुआ ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंचाता है, जिससे उनकी फिल्टर करने की क्षमता प्रभावित होती है। यही वजह है कि इन बीमारियों से पीड़ित लोगों में पेशाब में झाग बनने की समस्या अक्सर देखी जाती है।
डिहाइड्रेशन | Foam in Urine Causes
कभी-कभी, गंभीर डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी के कारण भी पेशाब अधिक झागदार हो सकता है। जब शरीर में पानी कम होता है, तो मूत्र अधिक गाढ़ा और केंद्रित हो जाता है, जिससे झाग बनता है। यह स्थिति आमतौर पर पानी पीने से ठीक हो जाती है, लेकिन अगर झाग बना रहे तो यह किसी अन्य गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
यूटीआई | Foam in Urine Causes
झागदार पेशाब के अन्य कारणों में यूटीआई, कुछ दवाएं और अत्यधिक शारीरिक परिश्रम भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अगर यह समस्या बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर से मिलकर सही जांच और समय पर इलाज करवाना बहुत जरूरी है ताकि किसी भी संभावित गंभीर बीमारी को शुरुआती चरण में ही रोका जा सके।