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Heart Attack vs Heart Failure: दोनों को एक न समझें, जानें अंतर और बचाव के तरीके

Heart Attack vs Heart Failure: आजकल कम उम्र के लोग, यहां तक कि बच्चे भी इसका हृदय संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। भारतीय आबादी भी इससे सुरक्षित नहीं है, यहां बड़ी संख्या में लोगों में हृदय रोग और उसके जोखिम कारक देखे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, चूंकि किसी भी उम्र के व्यक्ति को हृदय रोगों से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है, इसलिए जरूरी हो गया है कि बचपन से ही हार्ट को हेल्दी रखने वाली आदतें डालीं जाएं।

हृदय संबंधी रोगों (CVD) के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और बेहतर खानपान, व्यायाम जैसे उपायों के बारे में जागरूक कर लोगों के हृदय को स्वस्थ रखने के लिए बारे में शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 29 सितंबर को वर्ल्ड हार्ट डे (विश्व हृदय दिवस) मनाया जाता है। विश्व हृदय दिवस 2025 का थीम है- डोन्स मिस अ बीट यानी एक भी धड़कन न चूके।

What Is Difference Between Heart Attack And Heart Failure Full Details In  Hindi - Amar Ujala Hindi News Live - Heart Disease:हार्ट अटैक और हार्ट  फेलियर में क्या अंतर है, इनसे बचाव

दोनों में अंतर पहचानना जरूरी | Heart Attack vs Heart Failure

यह विषय हृदय स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी संकेतों को पहचानने, समय पर चिकित्सा सहायता लेने और गंभीर हृदय संबंधी घटनाओं को रोकने के लिए हृदय-स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने के महत्व पर जोर देता है। हृदय स्वास्थ्य और इससे संबंधित समस्याओं को लेकर अब भी लोगों में कई तरह का कंफ्यूजन देखा जा रहा है। उनमें से एक है क्या हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर एक ही है?

हृदय स्वास्थ्य पर दें ध्यान | Heart Attack vs Heart Failure

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक दुनियाभर में करीब 1.8 करोड़ लोगों की मौत हृदय रोगों से होती है, इनमें से बड़ी संख्या 40 साल से कम उम्र के लोगों की है। भारत में स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि यहां हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं कम उम्र में ही सामने आने लगी हैं।

दिल की बीमारियों को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम देखा जाता रहा है कि हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर में फर्क क्या है? कई लोग इन्हें एक ही मान लेते हैं, लेकिन वास्तव में दोनों बिल्कुल अलग स्थितियां हैं।  इस अंतर को समझना बहुत जरूरी है।

हार्ट अटैक के बारे में | Heart Attack vs Heart Failure

हार्ट अटैक तब होता है, जब दिल की मांसपेशियों तक खून का बहाव प्रभावित हो जाता है या अचानक रुक जाता है। इसका मुख्य कारण धमनियों में प्लाक (कोलेस्ट्रॉल और फैट का जमाव) बनना होता है। जब यह प्लाक टूटता है तो  इससे ब्लड क्लॉट बनते हैं जो खून का बहाव रोक सकते हैं।

हार्ट अटैक की स्थिति में सीने में तेज दर्द या दबाव, दर्द के हाथ-पीठ या जबड़े तक फैलने, सांस लेने में तकलीफ, पसीना और मतली आने जैसी स्थितियां शामिल हैं। हार्ट अटैक एक गंभीर स्थिति है जिसमें तुरंत डॉक्टर की मदद ज़रूरी होती है। अगर समय पर इलाज मिल जाए तो जान बचाई जा सकती है।

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हार्ट फेलियर के बारे में | Heart Attack vs Heart Failure

हृदय गति रुकना एक गंभीर स्थिति है, जिसमें हृदय की मांसपेशियां शरीर के लिए पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन पंप करने में असमर्थ या बहुत कमजोर हो जाती है। हार्ट फेलियर का मतलब यह नहीं कि दिल पूरी तरह से रुक गया है, बल्कि इसका मतलब है कि दिल अपनी पंपिंग क्षमता खोने लगता है। यानी दिल शरीर के बाकी हिस्सों तक उतना खून नहीं पहुंचा पाता जितनी शरीर को जरूरत होती है।

यह एक धीरे-धीरे बढ़ने वाली स्थिति है। लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बार-बार हुए हार्ट अटैक, धूम्रपान या मोटापा इसे बढ़ा सकती है। इसमें मरीज को सांस लेने में दिक्कत, पैरों में सूजन, थकान, तेज धड़कन और रात में बार-बार जागना जैसी समस्याएं होती हैं। हार्ट फेलियर से बचे रहने के लिए दवाइयों, लाइफस्टाइल में बदलाव की मदद ली जाती है।

हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर में अंतर | Heart Attack vs Heart Failure

हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं। इसमें अंतर को ऐसे समझा जा सकता है।

हार्ट अटैक अचानक होता है, इसमें धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं और खून दिल तक नहीं पहुंच पाता।

हार्ट फेलियर धीरे-धीरे बढ़ता है, इसमें दिल कमजोर होकर खून पंप करना कम कर देता है।

हार्ट अटैक एक आपात स्थिति है, जबकि हार्ट फेलियर एक क्रॉनिक (लंबे समय तक रहने वाली) बीमारी है।

हार्ट अटैक का सही समय पर इलाज करने से जान बच सकती है, जबकि हार्ट फेलियर को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल होता है, बस इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को हृदय की बीमारी रही हो, अगर आप मोटापा या ब्लड प्रेशर को शिकार रहे हों तो हृदय स्वास्थ्य को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए।

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