स्ट्रोक पर करना है स्ट्राइक, मानें न्यूरो सर्जन डॉ. डीके वत्सल की सलाह
स्ट्रोक आने की चेतावनी देता है अनियंत्रित डायबिटीज और ब्लड प्रेशर

अभिषेक पाण्डेय
Interview of Neuro Surgeon Dr. DK Vatsal on Stroke: स्ट्रोक यानी मस्तिष्काघात… एक ऐसी मेडिकल आपात स्थिति है, जिसमें देरी जानलेवा साबित हो सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञ हमेशा यह सलाह देते हैं कि स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर यदि समय रहते चिकित्सा सहायता ली जाए, तो मरीज की जान बचाने के साथ-साथ उसे स्थायी विकलांगता से भी बचाया जा सकता है। स्ट्रोक से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और आमजन को इसके प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से देश के जाने-माने न्यूरो सर्जन डॉ. डीके वत्सल से विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि किन लोगों को स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है, इसके चेतावनी संकेत क्या होते हैं और किस तरह की जीवनशैली अपनाकर इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। पढ़िए इस बातचीत के अंश..
सवाल: क्या स्ट्रोक अचानक होता है या उसके पहले कुछ चेतावनी संकेत मिलते हैं?
जवाब: देखिये, स्ट्रोक हमें कुछ न कुछ संकेत जरूर देता है। उदहारण के तौर पर अनियंत्रित मधुमेह, अनियंत्रित रक्तचाप, नींद में कमी और अचानक डिहाइड्रेशन होना। ये कुछ ऐसे संकेत हैं, जिनसे यह पता चल सकता है कि स्ट्रोक की संभवना है।
सवाल: ‘ब्रेन अटैक’ शब्द सुनने में आता है। क्या स्ट्रोक को इस नाम से बुलाना सही है?
जवाब: जी हां, आम मरीजों को समझाने के लिए हम इस शब्द को इस्तेमाल कर सकते हैं। उदहारण के तौर पर, हार्ट अटैक एक प्रकार का हार्ट स्ट्रोक है। हालांकि, हार्ट अटैक कॉमन है, ठीक वैसे ही ब्रेन अटैक में स्ट्रोक शब्द कॉमन है।
सवाल: किन लोगों को स्ट्रोक का सबसे ज़्यादा खतरा होता है? क्या यह अब युवाओं में भी बढ़ रहा है?
जवाब: देखिये, जो भी व्यक्ति किसी लंबी बीमारी से ग्रसित हैं, जैसे- कैंसर, मधुमेह, थायरॉइड, ब्लड प्रेशर आदि से, उनको स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। यानी अगर आपको स्ट्रोक से बचना है तो क्रॉनिक बीमारियों को कंट्रोल करना ही सबसे जरूरी है। रही बात युवाओं की तो उनका रहन-सहन, परिवर्तित जीवनशैली (फिजिकल एक्टिविटीज को महत्त्व न देना) गलत खान-पान (जंक फ़ूड) आदि स्ट्रोक का बहुत बड़ा कारण है। यही वजह है कि युवाओं को भी स्ट्रोक चपेट में ले रहा है।
सवाल: डाइट और फिजिकल एक्टिविटी स्ट्रोक की रोकथाम में कितनी भूमिका निभाती हैं?
जवाब: फाइबर युक्त डाइट, फलों का सेवन, सलाद आदि से स्ट्रोक को काफी हद तक रोका जा सकता है। वहीं, फिजिकल एक्टिविटीज जैसे- योग, व्यायाम, बाहरी खेल-कूद, पैदल चलना, दौड़ना जैसी गतिविधियां भी स्ट्रोक की रोकथाम में अहम भूमिका निभाती हैं।
सवाल: क्या मानसिक तनाव या डिप्रेशन जैसे कारक स्ट्रोक के रिस्क को बढ़ा सकते हैं?
जवाब: आमतौर पर मेंटल स्ट्रेस या डिप्रेशन, स्ट्रोक की वजह नहीं बनते हैं। हालांकि, स्ट्रोक के बाद डिप्रेशन बहुत कॉमन है। वैसे, कभी-कभी ऐसे मामले भी सामने आते हैं, जिनमें मेंटल स्ट्रेस से जूझ रहे मरीजों में ओवर मेडिकेशन की वजह से स्ट्रोक होता है।
सवाल: स्ट्रोक के बाद फिजिकल और मानसिक रिकवरी में सबसे ज़्यादा चुनौती किस चीज़ में आती है?
जवाब: स्ट्रोक के मरीजों की रिकवरी में सबसे ज्यादा चुनौती बोलने में, स्मरण-शक्ति और हाथ की ताकत वापस लौटने में आती है। पैर में अक्सर इतनी ताकत आ जाती है कि मरीज छड़ी या बिना छड़ी के खड़ा होकर चल सकता है।
सवाल: स्ट्रोक सर्वाइवर को समाज और परिवार से किस तरह का सहयोग मिलना चाहिए?
जवाब: शुरू के दिनों में परिवार और समाज के साइकोलॉजिकल सपोर्ट बहुत जरूरी है। दरअसल, मरीज साइकोलॉजिकल कमज़ोर होता है और उसे लगता है कि वे जिंदगी में न कभी चल पाएगा और न बोल पाएगा। ऐसे में परिवार और समाज को मरीज का मनोबल बढ़ाना होता है। अधिकतर मरीज, दवाई और सामाजिक सपोर्ट की वजह से बहुत जल्दी रिकवर भी कर लेते हैं।
सवाल: आम जनता को स्ट्रोक के बारे में कौन सी बेसिक बातें ज़रूर पता होनी चाहिए?
जवाब: व्यक्तिगत तौर पर हम स्ट्रोक अवेयरनेस प्रोग्राम चलाते हैं, जिसमें पब्लिक को यह बताया जाता है कि स्ट्रोक क्या है। देखिये, जब किसी को भी ऐसा लगे कि अचानक बोलने में दिक्कत आ रही है, अचानक हाथ-पैर कमजोरी लग रही है तो ये स्ट्रोक का वार्निंग साइन है। ऐसा होने पर तत्काल न्यूरो स्पेशलिस्ट की सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित मरीजों को ख़ास ख्याल रखने की जरूरत है। अधिया डाइट लेनी की सलाह दी जाती है। हीटवेव से बचें, अत्यधिक ठण्ड से बचें। योग और व्यायाम को जीवनशैली में जरूर शामिल करें।
सवाल: क्या हमारे देश में स्ट्रोक को लेकर पर्याप्त जागरूकता है?
जवाब: देखिये, व्यक्तिगत तौर पर मैं और हमारी टीम अस्पताल और ओपोडी में मरीजों को हमेशा यही समझाते हैं कि नशे से दूर रहें। इसके साथ ही स्ट्रोक को लेकर अन्य जानकारियां भी साझा करते हैं। सरकार भी कई जागरूकता अभियानों का संचालन करती है, जिसमें स्ट्रोक और अन्य गंभीर बीमारियों के बारे में आम जनता को बताया जाता है। हालांकि, दूर-दराज के गावों में अभी भी जागरूकता की कमी है, इस लेवल पर भी ध्यान देने की जरूरत है।