kidney cysts: किडनी में सिस्ट होना क्या है? क्या हैं इसके कारण, कैसे होता है उपचार, जान लें


What is kidney cysts causes: किडनी शरीर का एक बेहद ही महत्वपूर्ण अंग है, जो कई जरूरी कार्यों को करती है. किडनी शरीर में दो होती है. इसका काम होता है शरीर से खराब, अपशिष्ट तरल पदार्थों को फिल्टर करना. जब आप पेशाब करते हैं तो ये अपशिष्ट पदार्थ पेशाब के जरिए बाहर निकल जाते हैं. साथ ही किडनी ब्लड से टॉक्सिक पदार्थ जैसे यूरिया, क्रिएटिनिन को भी बाहर निकालती है. किडनी में खराबी होना आपके लिए काफी नुकसानदायक और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है.
किडनी से संबंधित कई तरह की समस्याएं होती हैं, जैसे किडनी में स्टोन होना, किडनी इंफेक्शन, किडनी कैंसर आदि. इसके साथ ही एक और समस्या होती है और वो है किडनी में सिस्ट होना. अक्सर लोगों को इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं होती है. अंदर ही अंदर किडनी में सिस्ट हो जाए जो आगे चलकर गंभीर हो सकती है, ऐसे में आप किन लक्षणों से पहचाने की आपकी किडनी में सिस्ट है? चलिए यहां जानते हैं….
किडनी में सिस्ट होने की समस्या क्या है? | What is kidney cysts causes
किडनी में सिस्ट की समस्या से काफी लोग परेशान रहते हैं. सिस्ट पानी से भरे छोटे थैले होते हैं. ज्यादातर मामलों में ये नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, लेकिन समस्या तब शुरू होती है, जब सिस्ट का आकार बढ़ने लगे. पेट या कमर में दर्द होने लगे, पेशाब में जलन हो, बार-बार इंफेक्शन हो या ब्लड प्रेशर बढ़ने लगे. आयुर्वेद के अनुसार, किडनी सिस्ट बनने के पीछे शरीर में रुकावटें, कफ का जमा होना और दिनचर्या की गड़बड़ी जैसी वजहें देखी जाती हैं. कई मामलों में शुरुआती स्टेज पर जीवनशैली और कुछ पारंपरिक जड़ी-बूटियों का सहारा लेकर राहत मिल सकती है. किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
किडनी सिस्ट बनने की वजह क्या है? | What is kidney cysts causes
किडनी सिस्ट कई बार खराब खानपान, डेली रूटीन लाइफ की आदतें होती हैं. इसमें दिन भर में बेहद कम पानी पीना, देर रात तक जागना, ज्यादा नमक या मसालेदार भोजन खाना, मीठे पदार्थों का अधिक सेवन, शरीर में सूजन बढ़ना, कब्ज, धीमा पाचन. इन छोटी-छोटी गलतियों का असर धीरे-धीरे किडनी पर पड़ता है.
किडनी सिस्ट से बचने के उपाय | What is kidney cysts causes
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-आयुर्वेद के अनुसार, कुछ पारंपरिक उपायों को अपनाकर आप किडनी सिस्ट से छुटकारा पा सकते हैं. इसमें गोक्षुर और एलोवेरा जूस का कॉम्बिनेशन ले सकते हैं. वरुण चूर्ण, गिलोय सत्व, ककड़ी-पुदीना-धनिया से बना पानी, पुनर्नवा और अश्मभेद से बना काढ़ा पी सकते हैं. रात में भिगोए हुए मुनक्के, हल्का लौकी का पानी, रात में लिया गया त्रिफला शामिल है. इन उपायों से सूजन कम होता है. शरीर हल्का महसूस होने के साथ ही पाचन संतुलित रहता है.
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-हल्के योगासन जैसे भुजंगासन, मकरासन, मत्स्यासन किडनी में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाते हैं. कुछ लोग तांबे के बर्तन में पानी भी सुबह पीते हैं, जो पारंपरिक तौर पर पाचन और सफाई में सहायक माना जाता है.
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-किडनी सिस्ट की समस्या है तो आप अधिक तेल-मसाले, हेवी फूड, अत्यधिक नमकीन या प्रोसेस्ड चीजों का सेवन कम करें. आयुर्वेदिक दृष्टि से हल्के और पानी वाले खाद्य पदार्थ जैसे लौकी, ककड़ी, नारियल पानी, गाजर और हल्की दालों का सेवन करें. साथ ही 7 से 8 गिलास पानी जरूर हर दिन पिएं. पानी बहुत अधिक भी न पिएं. समय पर सोएं, प्रतिदिन 30 मिनट टहलें. प्रोटीन का सेवन अपनी शारीरिक जरूरतों के अनुसार करें.





