किस करने से भी हो सकती है जानलेवा बीमारी, होश उड़ा देगा ये खुलासा!

Connection Between Mental Illness and Kissing: किस करना प्यार जताने का आम जरिया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपको मानसिक बीमारियों की ओर भी धकेल सकती है? हाल ही में ईरान में हुई एक स्टडी ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि किसिंग के दौरान थूक (saliva) के जरिए मानसिक बीमारियां एक इंसान से दूसरे में ट्रांसफर हो सकती हैं, जिनमें डिप्रेशन, एंग्जायटी और यहां तक कि डिमेंशिया जैसे गंभीर बीमारी भी शामिल हैं.
ईरान के शोधकर्ताओं ने 2024 में फरवरी से अक्टूबर के बीच 268 नवविवाहित जोड़ों पर यह अध्ययन किया. इनमें से एक पार्टनर पहले से डिप्रेशन और एंग्जायटी से पीड़ित था, जिसमें अनिद्रा (insomnia) प्रमुख लक्षण था. शादी की शुरुआत में इन जोड़ों से लार के नमूने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी प्रश्नावली भरी गई. छह महीने बाद फिर से यही प्रक्रिया दोहराई गई. नतीजों ने हैरान कर देने वाला खुलासा किया, जिन पार्टनर्स की मानसिक स्थिति पहले सामान्य थी, उन्होंने भी अब डिप्रेशन, एंग्जायटी और नींद न आने जैसी समस्याएं बताईं.
एक्सपर्ट का क्या मानना? | Connection Between Mental Illness and Kissing
विशेषज्ञों का मानना है कि थूक में मौजूद कॉर्टिसोल हार्मोन दिमाग के हिप्पोकैम्पस हिस्से को नुकसान पहुंचा सकता है. यही हिस्सा याददाश्त और इमोशन्स को कंट्रोल करता है. अगर एक व्यक्ति का कॉर्टिसोल स्तर ज्यादा है और वह अक्सर किस करता है, तो यह हार्मोन दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है.

अध्ययन में क्या पाया गया? | Connection Between Mental Illness and Kissing
अध्ययन में यह भी पाया गया कि इस प्रभाव का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ा. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह निष्कर्ष मानसिक रोगों के इलाज की स्ट्रैटेजी में बदलाव ला सकता है, खासतौर पर कपल्स के लिए, जहां एक पार्टनर बीमार है लेकिन इलाज दोनों को मिलना चाहिए. हालांकि अध्ययन की सीमाएं भी हैं कि यह केवल ईरान के फारसी बोलने वाले लोगों पर आधारित था और इसमें लाइफस्टाइल, खानपान और पर्सनल एक्सपीरिएंस को शामिल नहीं किया गया.
डब्ल्यूएचओ का क्या कहना? | Connection Between Mental Illness and Kissing
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में 30 करोड़ से ज्यादा लोग डिप्रेशन से जूझ रहे हैं और महामारी के बाद ये आंकड़े तेजी से बढ़े हैं. ऐसे में यह स्टडी मेंटल हेल्थ की गंभीरता और किस जैसे सामान्य व्यवहार के खतरों को उजागर करती है.
