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Lucknow: निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम के लिए नया फरमान, नियम तोड़ा तो लटकेगा ताला

Lucknow: स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत अब निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम में सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तव में एमबीबीएस डाक्टरों की उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। यदि अस्पताल में एमबीबीएस डाक्टर मौजूद नहीं है तो यह मरीजों की जान से खिलवाड़ है और नियमों के अनुसार ऐसी स्थिति में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह निर्णय छोटे अस्पतालों में हो रही लापरवाही को देखते हुए एवं स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए लिया गया है। सीएमओ (मुख्य चिकित्साधिकारी) डा. एनबी सिंह के मुताबिक, छोटे अस्पतालों में नोटिस बोर्ड पर तो एमबीबीएस डाक्टर के नाम लिखे रहते हैं, लेकिन कई बार ड्यूटी पर तैनात नहीं मिलते। ऐसे में अब यह नहीं चलेगा। केवल दोपहर के खाने का समय छोड़कर बाकी सुबह से लेकर रात तक अस्पताल में पूर्णकालिक एमबीबीएस डाक्टर (पैनल में जिस चिकित्सक का नाम हो) का रहना अनिवार्य है।

इस वजह से व्यवस्था की जायेगी लागू | Lucknow

यदि ड्यूटी पर पैनलिस्ट डाक्टर नहीं मिलते (सर्जन छोड़कर) तो भारी जुर्माना के साथ अस्पताल के पंजीकरण को निरस्त करने की सिफारिश की जाएगी। किसी भी दशा में मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी डॉ. एपी सिंह ने कहा, आए दिन ऐसी खबरें आती हैं कि किसी निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज की जान चली जाती है। कई बार जांच में पीड़ित के आरोप सही पाए जाते हैं। इसलिए इस व्यवस्था को लागू करना जरूरी है। निजी अस्पतालों में एमबीबीएस डाक्टर का होना 24/7 आपातकालीन सेवाओं, मरीजों की तत्काल प्राथमिक जांच, स्थिति को स्थिर करने और विशेषज्ञ डाक्टरों की अनुपलब्धता में गंभीर मामलों को संभालने के लिए महत्वपूर्ण है। एक एमबीबीएस डाक्टर सामान्य चिकित्सक के रूप में मरीजों की निरंतर देखभाल और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करता है। कई बार मरीज को सर्जरी के बाद दिक्कतें हो जाती हैं। ऐसे में कोई विशेषज्ञ डाक्टर के न होने से सही इलाज मुहैया कराना मुश्किल होता है।

पांच मार्च से चलेगा अभियान | Lucknow

डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि नई व्यवस्था को कड़ाई से लागू कराना सुनिश्चित करेंगे। होली के बाद टीमें गठित कर निजी अस्पतालों एवं नर्सिंग होम के निरीक्षण होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निरीक्षण के नाम पर किसी को परेशान नहीं किया जाएगा। जिन अस्पतालों में नियम का पालन नहीं होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

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