Lucknow News: रिहैबिलिटेशन की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण लेने द होप सेंटर पहुंची नर्सिंग की छात्राएं
बाबा हॉस्पिटल एंड कॉलेज ऑफ नर्सिंग के 150 विद्यार्थियों ने द होप रिहैबिलिटेशन ऐंड लर्निंग सेंटर में दो दिवसीय शैक्षणिक कार्यक्रम में किया प्रतिभाग


Lucknow News: द होप रिहैबिलिटेशन ऐंड लर्निंग सेंटर (लखनऊ) में बाबा हॉस्पिटल एंड कॉलेज ऑफ नर्सिंग के बीएससी नर्सिंग तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष के 150 छात्रों ने दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण और प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। कम्युनिटी हेल्थ एंड रिहैबिलिटेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं को आधुनिक बाल न्यूरो-रिहैबिलिटेशन की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
सीखी थेरेपी की बारीकियां, रिहैबिलिटेशन नर्सिंग प्रोटोकॉल पर भी किया फोकस | Lucknow News
सेशन में छात्रों को क्लिनिकल ऑब्ज़र्वेशन और विभिन्न थेरेपी मॉडल्स का परिचय कराया गया। इसमें ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपी, बिहेवियर थेरेपी और स्पेशल एजुकेशन के सिद्धांत एवं प्रैक्टिकल डेमॉन्स्ट्रेशन शामिल था। विद्यार्थियों ने सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों की फिज़ियोथेरेपी, सेंसरी इंटीग्रेशन तकनीक और स्पीच थेरेपी सेशन को करीब से देखा। रिहैबिलिटेशन नर्सिंग प्रोटोकॉल्स पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें पोज़िशनिंग तकनीक, फीडिंग सपोर्ट, एडीएल (एक्टिविटीज़ ऑफ डेली लिविंग) ट्रेनिंग, केयरगिवर एजुकेशन और मेडिकल डॉक्यूमेंटेशन प्रैक्टिस शामिल रही। विद्यार्थियों को केस स्टडीज़ का विश्लेषण करने, थेरेपी इक्विपमेंट का प्रयोग सीखने और विशेषज्ञों के साथ सीधी बातचीत का मौका मिला।

रिहैबिलिटेशन नर्सिंग की बढ़ती भूमिका पर जोर | Lucknow News
द होप रिहैबिलिटेशन ऐंड लर्निंग सेंटर के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु कुमार ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, भारत में हेल्थ टूरिज़्म की संभावनाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं। वर्ष 2024 में भारत का मेडिकल टूरिज़्म बाज़ार लगभग 9 बिलियन डॉलर का था, जो 2030 तक 13 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन इसमें रिहैबिलिटेशन सेवाओं का योगदान अभी बहुत कम है। अगर हम चाहते हैं कि भारत एक ग्लोबल हेल्थ डेस्टिनेशन बने, तो रिहैबिलिटेशन नर्सिंग को मज़बूत करना होगा।
उन्होंने बताया कि न्यूरोडाइवर्स बच्चों की तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य के स्वास्थ्य-सेवा क्षेत्र में रिहैबिलिटेशन नर्सिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती जा रही है। रिहैबिलिटेशन नर्स केवल दवा देने वाली नर्स नहीं होती। वह फिज़ियोथेरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट और डॉक्टर के बीच एक सेतु का काम करती है। वह बच्चे की दैनिक प्रगति पर नज़र रखती है, माता-पिता को घरेलू देखभाल सिखाती है, और थेरेपी सेशन के बीच निरंतरता बनाए रखती है।

अर्ली इंटरवेंशन कितना जरूरी? | Lukcnow News
दिव्यांशु कुमार ने कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए कहा कि भारत में हर 100 में से 2-3 बच्चे सेरेब्रल पाल्सी, ऑटिज़्म, एडीएचडी या सेंसरी प्रोसेसिंग डिसऑर्डर से प्रभावित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया की लगभग 15% आबादी किसी न किसी प्रकार की दिव्यांगता के साथ जीवन जी रही है। भारत में यह संख्या लगभग 2.68 करोड़ है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा बच्चे और युवा हैं। अर्ली इंटरवेंशन—यानी 0 से 6 साल की उम्र में शुरू की गई थेरेपी—से बच्चे के मस्तिष्क में नए न्यूरल पाथवेज़ बनते हैं। इस गोल्डन पीरियड में शुरू की गई थेरेपी बच्चे के भविष्य को पूरी तरह बदल सकती है।
उभरता हुआ क्षेत्र है रिहैबिलिटेशन नर्सिंग | Lucknow News
वहीं, बाबा हॉस्पिटल एंड कॉलेज ऑफ नर्सिंग के प्रमुख डॉ. नितिन सोनी ने कहा, यह शैक्षणिक भ्रमण हमारे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभदायक रहा। रिहैबिलिटेशन नर्सिंग एक उभरता हुआ क्षेत्र है और द होप जैसे संस्थानों से सहयोग हमारे छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करता है। हम भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को जारी रखेंगे ताकि हमारे विद्यार्थी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।





