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Snoring In Kids: छोटे बच्चों का खर्राटा लेना सामान्य नहीं, जानिए इसके पीछे के मूल कारण

Snoring in Kids: अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि माता-पिता बच्चों के खर्राटे लेने को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह एक स्वास्थ्य समस्या है। डॉक्टर ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक 35 किलो वजन का बच्चा, जो काफी मोटा था, उसके माता-पिता उसे ‘स्वस्थ’ समझ रहे थे और उसके खर्राटों को सामान्य मान रहे थे। खर्राटे लेना और वजन का बढ़ना आपस में गहराई से जुड़े हो सकते हैं। अगर बच्चा नियमित रूप से खर्राटे लेता है, तो इसका सीधा मतलब है कि उसके श्वसन मार्ग में कोई रुकावट है, जिसे समय रहते पहचानना और इलाज करना जरूरी है।

क्या है खर्राटे का साइंस? | Snoring in Kids

नाक से लेकर फेफड़ों तक जाने वाले हवा के रास्ते में जब भी कोई बाधा आती है, तो हवा उसके विरुद्ध टकराती है और ध्वनि उत्पन्न होती है, जिसे हम खर्राटा कहते हैं। सर्दी-जुकाम के दौरान म्यूकस (बलगम) जमा होने से 2-3 हफ्ते नाक बजना सामान्य है, क्योंकि बच्चे इसे बाहर नहीं निकाल पाते। लेकिन अगर बच्चा स्वस्थ होने पर भी रोज खर्राटे लेता है, तो यह ‘टॉन्सिल्स’ या श्वसन तंत्र के ‘सॉफ्ट टिश्यू मास’ में वृद्धि का संकेत हो सकता है।

खर्राटे का असर | Snoring in Kids

जब बच्चा खर्राटे लेता है, तो इसका मतलब है कि उसे सांस लेने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है। इससे बच्चे की रात की नींद पूरी नहीं होती, जिसका सीधा असर उसकी दिनचर्या पर पड़ता है। डॉक्टर ने बताया कि ऐसे बच्चे दिनभर चिड़चिड़े रहते हैं, उन्हें स्कूल में पढ़ाई के दौरान ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है और खेल-कूद में भी वे जल्दी थक जाते हैं। नींद की कमी उनके मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती है।

बच्चों में खर्राटों के मुख्य कारण और मोटापे का संबंध | Snoring in Kids

छोटे बच्चों में खर्राटों के कुछ सामान्य मेडिकल कारण बताए हैं, जिनमें एलर्जिक राइनाइटिस, एडिनोइड्स और टॉन्सिल हाइपरट्रॉफी प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा, कुछ प्रतिशत बच्चों में मोटापा भी खर्राटों की एक बड़ी वजह बनता है। शरीर की अतिरिक्त चर्बी श्वसन मार्ग पर दबाव डालती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। इसलिए बच्चे के वजन को नियंत्रित रखना भी खर्राटों के इलाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

समय पर इलाज है संभव | Snoring in Kids

खर्राटों की समस्या को इग्नोर नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने डॉक्टर से मिलें और बच्चे के सभी लक्षणों जैसे रात में सांस लेने का तरीका, दिन की सुस्ती और वजन के बारे में खुलकर चर्चा करें। सही समय पर डायग्नोसिस होने से बच्चा न केवल चैन की नींद सो पाएगा, बल्कि उसकी एकाग्रता और स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।

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