पाकिस्तान तक पहुंचा H3N2 ‘सुपर फ्लू’ का खतरनाक स्ट्रेन, जानिए भारत को कितना खतरा?

ब्रिटेन के बाद अब H3N2 सुपर फ्लू पाकिस्तान तक पहुंच चुका है। इसके बाद अब भारत में भी इसे लेकर चिंता बढ़ने लगी है कि क्या यह वायरस यहां भी फैल सकता है? इसे लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस खतरे को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता है, लेकिन इसे लेकर फिलहाल सतर्कता बरतना जरूरी है। ऐसे में चलिए हम बताते हैं कि ब्रिटेन से पाकिस्तान पहुंचने वाले H3N2 सुपर फ्लू से भारत को कितना खतरा हो सकता है।
क्या है H3N2 सुपर फ्लू? | What is H3N2 Super Flu?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, यह वायरस इन्फ्लूएंजा ए का बदला हुआ रूप है, जिसे सबक्लेड के कहा जा रहा है। इसे सुपर फ्लू इसलिए कहा जा रहा है, क्योंकि इसमें कुछ जेनेटिक बदलाव देखे गए हैं। WHO का कहना है कि यह कोई नया वायरस नहीं है और न ही अब तक के आंकड़े यह बताते हैं कि यह पहले के मुकाबले ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा करता है। मगर, इसकी खास बात यह है कि यह सामान्य फ्लू सीजन से पहले ही तेजी से फैल रहा है।

ब्रिटेन और पाकिस्तान में क्यों बढ़ रही चिंता? | Super Flu in Pakistan
बीते कुछ समय में ब्रिटेन में इस फ्लू के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है। वहां हॉस्पिटल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा बताई जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, फ्लू के कारण हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों की संख्या में 50 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, सबसे ज्यादा संक्रमण 5 से 14 साल के बच्चों और 15 से 24 साल की युवाओं में देखा गया है। हालात को देखते हुए ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस ने बुजुर्गों, बच्चों और ज्यादा खतरे वाले लोगों से जल्द फ्लू वैक्सीन लगवाने की अपील की है। वहीं, यूरोप के बाद पाकिस्तान में भी H3N2 सुपर फ्लू के स्ट्रेन की पुष्टि हो चुकी है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसे लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत है। पाकिस्तान में यह वायरस कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इसे लेकर एक्सपर्ट्स ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर फ्लू आगे चलकर निमोनिया में बदल जाए तो मरीजों को वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ सकती है।
भारत में भी माना जा रहा खतरा | Super Flu in India
भारत और पाकिस्तान के बीच मौसम, हवा की दिशा और लोगों की आवाजाही काफी हद तक समान रहती है। इसके अलावा सर्दियों में कोहरा, प्रदूषण, भीड़-भाड़, स्कूलों में बच्चों का आपसी संपर्क और ट्रैवल वायरस के फैलने के लिए अनुकूल माहौल बनाता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर पड़ोसी देश में वायरस फैल रहा है तो भारत में इसके केस सामने आने के संभावना हो सकती है। इसके अलावा भारत में पहले भी H3N2 फ्लू के मामले देखे जा चुके हैं, इसलिए भारत का हेल्थ सिस्टम इस वायरस से पूरी तरह अनजान नहीं है।
देश में फ्लू सर्विलांस सिस्टम मौजूद है, हॉस्पिटलों में जांच की सुविधा है और डॉक्टर इसके लक्षण पहचानने में सक्षम है। हालांकि, एक बड़ी चिंता यह है कि भारत में फ्लू वैक्सीन लगवाने की दर काफी कम है, खासकर बुजुर्गों और हाई रिस्क ग्रुप में। इसके अलावा, एक्सपर्ट के मुताबिक 60 से ज्यादा उम्र के लोग डायबिटीज, दिल और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित मरीज और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत है।




