Union Budget 2026: ऑटोइम्यून दवाएं होंगी सस्ती, इन बीमारियों में मिलेगी राहत


Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 के अपने भाषण में वित्त मंत्री ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य भारत को एक ‘वैश्विक बायोफार्मा हब’ के रूप में विकसित करना है, जिससे आम जनता को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भारी खर्च न करना पड़े। बजट में विशेष रूप से कैंसर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों की दवाओं को किफायती दरों पर उपलब्ध कराने का संकल्प लिया गया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि नवाचार को बढ़ावा देकर ‘गैर-संचारी रोगों’ के उपचार को सुलभ बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार अगले 10 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च करने की योजना बना रही है। इस निवेश से न केवल दवाओं की कीमतें कम होंगी, बल्कि ‘बायो-फार्मा शक्ति’ और ‘बायोलॉजिक्स’ के उत्पादन में भी भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा।
क्या हैं ऑटोइम्यून बीमारियां और क्यों महंगी हैं इनकी दवाएं? | Union Budget 2026
ऑटोइम्यून बीमारी वह स्थिति है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता गलती से स्वस्थ कोशिकाओं पर ही हमला करने लगती है। इसमें रूमेटाइड अर्थराइटिस, सोरायसिस, ल्यूपस और टाइप-1 डायबिटीज जैसी बीमारियां शामिल हैं। वर्तमान में इनकी दवाएं और ‘बायोलॉजिक्स’ इंजेक्शन काफी महंगे होते हैं क्योंकि इनके निर्माण में उच्च तकनीक और जटिल अनुसंधान की आवश्यकता होती है। बजट 2026 के बाद, इन दवाओं के घरेलू उत्पादन से मरीजों का वित्तीय बोझ काफी कम होने की उम्मीद है।
बायोफार्मा हब और अनुसंधान के लिए 10 हजार करोड़ का फंड | Union Budget 2026
भारत को वैश्विक मानक का दवा केंद्र बनाने के लिए सरकार ने 10 वर्षीय विजन पेश किया है। इस 10 हजार करोड़ रुपये के निवेश से बायो-फार्मा फोकस नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस नेटवर्क में तीन राष्ट्रीय संस्थाएं फार्मास्युटिकल, शिक्षा और अनुसंधान एक साथ मिलकर काम करेंगी। इससे दवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और नई दवाओं की खोज में तेजी आएगी, जिससे भारत विदेशों से आयात होने वाली महंगी दवाओं पर निर्भरता कम कर सकेगा।
सेंट्रल ड्रग कंट्रोलर का सशक्तीकरण और वैश्विक मानक | Union Budget 2026
दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए वित्त मंत्री ने सेंट्रल ड्रग कंट्रोलर को और अधिक सशक्त बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य भारतीय दवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है ताकि ‘मेड इन इंडिया’ दवाएं दुनिया भर में भरोसा जीत सकें। कड़े नियमों और बेहतर निगरानी से नकली दवाओं पर लगाम लगेगी और बायोफार्मा क्षेत्र में नवाचार को सही दिशा मिलेगी। यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी बढ़ावा देगा।
किफायती स्वास्थ्य सेवा की ओर बढ़ते भारत के कदम | Union Budget 2026
बजट 2026 की ये घोषणाएं स्पष्ट करती हैं कि सरकार का ध्यान अब गंभीर और लंबी चलने वाली बीमारियों के उपचार को मध्यम वर्ग की पहुंच में लाना है। कैंसर और डायबिटीज जैसी जानलेवा बीमारियों के साथ-साथ ऑटोइम्यून रोगों के लिए सस्ता इलाज लाखों परिवारों को जीवनदान देगा। नवाचार और बेहतर रिसर्च नेटवर्क के माध्यम से भारत न केवल अपनी जनता को सस्ता इलाज देगा, बल्कि पूरी दुनिया को किफायती बायोफार्मा समाधान प्रदान करने वाला अग्रणी राष्ट्र बनेगा।





