आप भी रोज खाते हैं अंडे, इसके सेवन से हो सकता है कैंसर का खतरा!

Egg Health Risk: कहा जाता है कि रोजाना अंडे का सेवन हृदय की कार्यप्रणाली को बेहतर बना सकता है। साथ ही शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है। यह मांसपेशियों के लिए फायदेमंद होता है और आंखों व दिमाग को तेज बनाती है। अंडा सस्ता, सुलभ और प्रोटीन का भरोसेमंद स्त्रोत है। मगर, एक हालिया रिपोर्ट में अंडे की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर के क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे ब्रांडेड और बिना ब्रांड वाले अंडों के सैंपल इकट्ठा करके 10 मान्यता प्राप्त लैब में जांच के लिए भेजें। FSSAI अंडों के सैंपल में नाइट्रोफ्यूरान्स (Nitrofurans) की मौजूदगी की जांच कर रहा है। सवाल है कि नाइट्रोफ़्यूरान्स क्या है और अंजे में इसके जैसे प्रतिबंधित एंटीबायोटिक अवशेष कैसे मौजदू हो सकते हैं? इसका उपभोक्ता पर क्या असर हो सकता है?

नाइट्रोफ़्यूरान्स क्या हैं? | What is Nitrofurans?
नाइट्रोफ़्यूरान्स एक एंटीबायोटिक समूह है, जिसका इस्तेमाल पहले पशुपालन और पोल्ट्री में संक्रमण रोकने के लिए होता था। WHO और कई अंतरराष्ट्रीय नियामक एजेंसियों ने इनके उपयोग पर रोक लगाई, क्योंकि इनके अवशेष (metabolites) कैंसर के जोखिम से जुड़े पाए गए। ये डीएनए को नुकसान वाले जीनोटॉक्सिक हो सकते हैं और लंबे समय तक सेवन से लिवर व किडनी पर असर डाल सकते हैं। पोल्ट्री फार्मिंग में इन दवाओं का अवैध रूप से इस्तेमाल किया जाए, तो उनके अवशेष अंडों तक पहुंच सकते हैं। ईयू, यूएस और भारत (FSSI) जैसे देशों नें खाद्य पशुओं में इनका इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
ये अंडों में कैसे पहुंचते हैं?
गलत या अवैध प्रैक्टिस से अंडों में नाइट्रोफ़्यूरान्स पहुंच जाता है। अगर पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों को प्रतिबंधित एंटीबायोटिक दिया जाए तो इसकी संभावना रहती है। इनका उपयोग मुर्गियों को बैक्टीरिया से बचाने और ज्यादा अंडे देने के लिए गैरकानूनी तरीके से किया जाता है। खासकर उन पोल्ट्री फार्मिंग में जो छोटी हैं और बिना नियम कानून के संचालित होती हैं। किसी भी तरह के मुर्गियों के संपर्क में केमिकल के आने से इनके अवशेष अंडों में रह सकते हैं। हालांकि, यह समस्या हर अंडे में नहीं होती, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले कुछ सप्लाई चैन में सामने आ सकती है।
सेहत को क्या नुकसान हो सकता है?
इस तरह के अंडे कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। DNA को नुकसान पहुंचा सककते हैं। कभी-कभार ऐसे अंडे खाने से तत्काल बीमारी होना दुर्लभ है। लेकिन लंबे समय तक लगातार सेवन से जोखिम बढ़ सकता है। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वालों में। सबसे बड़ा खतरा तब है, जब नियमित निगरानी और टेस्टिंग कमजोर हो।
बचाव के लिए क्या करें?
अंडे का सेवन रोज करें, लेकिन भरोसेमंद ब्रांड या स्थानीय सप्लायर से ही अंडे लें। अंडा लेते समय FSSAI लाइसेंस और ट्रेसिबिलिटी देखें। बहुत सस्ते, अनजान स्रोत से आने वाले अंडों से बचें। कच्चा अंडा न खाएं, बल्कि अच्छी तरह पकाएं। हालांकि पकाने से सभी अवशेष खत्म हों, यह गारंटी नहीं, पर जोखिम घटता है। साथ ही डाइट में विविधता रखें, केवल अंडे पर निर्भर न रहें।




