देश की 70% महिलाओं को PCOS-PCOD, जानिए क्या हैं बचाव के उपाय


PCOD and PCOS Risk: घर में बच्चे होते हैं, तो घर की रौनक, रिश्तों की मुस्कान और हर कपल के बीच प्यार बना रहता है। लेकिन अफसोस, हर घर को ये खुशकिस्मती आसानी से नहीं मिल पाती। हमारे देश में लाखों-करोड़ों जोड़े ऐसे हैं, जिनकी जिंदगी में बच्चे की चाह तो है पर किलकारी अब तक नहीं आई। इसकी वजह सिर्फ किस्मत या समाज नहीं है, आज करियर का दबाव, देर से शादी, देर से फैमिली प्लानिंग, तनाव, खराब खानपान, प्रदूषण और भागदौड़ भरी जिंदगी, ये सब मिलकर फर्टिलिटी पर असर डाल रहे हैं। ऊपर से पीसीओएस, फाइब्रॉइड्स, थायरॉइड और हॉर्मोनल गड़बड़ी जैसी दिक्कतें महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हैं जबकि पुरुषों में भी स्पर्म क्वॉलिटी और काउंट गिरना बड़ी चिंता बनता जा रहा है।
भविष्य का संकट! | PCOD and PCOS Risk
मसला सिर्फ सामाजिक नहीं, जिस्मानी भी है। इनफर्टिलिटी के मामले में परिस्थिति इतनी गंभीर है कि दुनिया के कई मुल्क अब इसे जनसंख्या नहीं, सेहत और भविष्य के संकट की तरह देखने लगे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रूस में तो जन्मदर बढ़ाने के लिए बाकायदा मुहिम चलाई जा रही है, कैश इनसेंटिव्स दिए जा रहे हैं, नई पॉलिसी बनाई जा रही हैं क्योंकि वहां फर्टिलिटी रेट रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे जा चुका है।
योग और अनुशासन है जरूरी | PCOD and PCOS Risk
हमें भी रूस से सबक लेने की जरूरत है। जब पीरियड्स इर्रेग्युलर हों, पेल्विक पेन हो, वजन तेजी से बढ़े, हॉर्मोन बिगड़ें और बावजूद इसके जांच-इलाज टलता रहे, तो आगे चलकर यही दिक्कतें इनफर्टिलिटी की बड़ी वजह बन सकती हैं। वक्त रहते अलर्ट होना बहुत जरूरी है। शर्म नहीं, स्क्रीनिंग जरूरी है। देरी नहीं, सही इलाज जरूरी है। योग, आयुर्वेद और अनुशासित लाइफस्टाइल को अपनाने का ताकि सब सेहतमंद रहें और आंगन में भी खुशियों की किलकारी गूंजे।
जरूर करें योग–प्राणायाम | PCOD and PCOS Risk
अगर आप पीसीओएस और पीसीओडी जैसी समस्याओं को मैनेज करना चाहते हैं या इस तरह की प्रॉब्लम्स से बचाव करना चाहते हैं या इनफर्टिलिटी के खतरे को कम करना चाहते हैं, तो आपको अपने डेली रूटीन में योग-प्राणायाम को जरूर शामिल करना चाहिए। योग-प्राणायाम आपकी फिजिकल और मेंटल हेल्थ को सुधारने में कारगर साबित हो सकता है। इनफर्टिलिटी के खतरे को कम करने के लिए आयुर्वेद-नेचुरोपैथी की मदद भी ली जा सकती है।





