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नवजात शिशु के बर्थमार्क को न करें इग्नोर, हो सकता है ‘हेमेंजियोमा’; जानें कारण, लक्षण और इलाज

Newborn Baby Birthmark: कुछ नवजात शिशुओं में जन्म के बाद स्किन पर लाल, बैंगनी या भूरे रंग का उभरा हुआ दाग दिखाई देता है। अक्सर पेरेंट्स इसे साधारण बर्थमार्क समझकर छोड़ देते हैं या घबरा जाते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह लक्षण ‘इन्फैंटाइल हेमेंजियोमा’ (Infantile Hemangioma) का संकेत हो सकता है, जिसे आम भाषा में ‘स्ट्रॉबेरी बर्थमार्क’ भी कहा जाता है।

‘इंडियन जर्नल ऑफ डर्मेटोलॉजी, वेनेरियोलॉजी एंड लेप्रोलॉजी’ में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, भारत में हेमेंजियोमा की दर 4.3% है, जो कई देशों की तुलना में अधिक है। वहीं वैश्विक स्तर पर 1 साल तक की उम्र के करीब 5-10% बच्चों में यह समस्या देखी जाती है।

हेमेंजियोमा (Hemangioma) क्या है और यह क्यों होता है?

यह छोटी ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) का एक असामान्य गुच्छा होता है, जो एक जगह जमा होकर नॉन-कैंसरस ट्यूमर का रूप ले लेता है।

मुख्य कारण: इसका सटीक कारण अभी अज्ञात है, लेकिन यह ब्लड वेसल्स की कोशिकाओं के जरूरत से ज्यादा बढ़ने के कारण बनता है।

किन बच्चों को है ज्यादा रिस्क: समय से पहले जन्मे (प्री-मैच्योर) बच्चे, जन्म के समय कम वजन वाले शिशु और लड़कों की तुलना में लड़कियों में इसका खतरा ज्यादा होता है।

भ्रम दूर करें: यह किसी संक्रमण, चोट या गर्भावस्था के दौरान माता-पिता की किसी गलती के कारण नहीं होता है। यह सीधे तौर पर जेनेटिक (अनुवांशिक) भी नहीं है।

प्रमुख संकेत और लक्षण: कैसे पहचानें?

यह आमतौर पर जन्म के कुछ दिनों या हफ्तों बाद दिखाई देता है और पहले साल तेजी से बढ़ता है। इसके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

स्किन पर लाल या बैंगनी रंग का उभार या फफोले जैसी गांठ होना।

इसका साइज सामान्यतः 0.6 से 5 सेंटीमीटर तक हो सकता है।

यह सिंगल या शरीर पर गुच्छों के रूप में भी दिख सकता है।

आमतौर पर यह दर्द रहित होता है, लेकिन चोट लगने पर ब्लीडिंग या दर्द हो सकता है।

प्रभावित हिस्से: यह ज्यादातर सिर, चेहरा, गर्दन, छाती और पीठ पर होता है। रेयर केसेस में यह लिवर, लंग्स या किडनी जैसे अंदरूनी अंगों में भी हो सकता है।

नवजात शिशु के बर्थमार्क को न करें इग्नोर, हो सकता है 'हेमेंजियोमा'; जानें कारण, लक्षण और इलाज

क्या वयस्कों को भी होता है?

हां, वयस्कों में इसे ‘चेरी हेमेंजियोमा’ कहा जाता है। 75 साल से ज्यादा उम्र के लगभग 4 में से 3 लोगों में यह छोटे लाल धब्बों के रूप में दिखता है, जो अपने-आप खत्म नहीं होता पर नुकसानदेह भी नहीं होता।

डॉक्टर कैसे करते हैं जांच और क्या है इसका इलाज?

अधिकांश मामलों में शिशुओं का यह मार्क समय के साथ अपने आप छोटा हो जाता है, इसलिए केवल निगरानी (Observation) की जरूरत होती है। हालांकि, गंभीर मामलों में डॉक्टर निम्नलिखित कदम उठाते हैं:

चरण                     अपनाई जाने वाली प्रक्रिया

डायग्नोसिस (जांच)            फिजिकल एग्जामिनेशन, ब्लड फ्लो देखने के लिए अल्ट्रासाउंड या आंतरिक जांच के लिए MRI और कुछ मामलों में बायोप्सी।

इलाज के विकल्प            आवश्यकतानुसार ओरल दवाएं, स्किन की ऊपरी लेयर के लिए लेजर ट्रीटमेंट, या क्रिटिकल मामलों में सर्जरी।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि बच्चे का बर्थमार्क नीचे दी गई स्थितियों में हो, तो बिना देर किए डॉक्टर को दिखाएं:

यदि इसका साइज लगातार और बहुत तेजी से बढ़ रहा हो।

इसके रंग में अचानक बदलाव दिखे या वहाँ घाव (अल्सर) बन जाए।

प्रभावित हिस्से से ब्लीडिंग (खून बहना) शुरू हो जाए।

यह आंख, मुंह, ठुड्डी या गले के पास हो (जिससे सांस लेने या देखने में दिक्कत हो सकती है)।

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