Developmental Delay in Kids: बच्चा देर से बोल रहा, Eye Contact भी कम? न करें नजरअंदाज


Development Delay in Kids: हर बच्चे के बढ़ने और सीखने की रफ्तार अलग होती है, इसलिए कई बार माता पिता यह सोचकर बात टाल देते हैं कि बच्चा थोड़ा देर से बोलना शुरू करेगा। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर बोलने में देरी के साथ साथ आई कॉन्टैक्ट कम होना या बुलाने पर प्रतिक्रिया न देना जैसे लक्षण भी दिखें, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। आइए जानते हैं बच्चों में बोलने में देरी की क्या वजहें हो सकती हैं, किन बातों पर ध्यान देना चाहिए, और कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी हो जाता है।
हर बच्चे का डिवेलपमेंट एक जैसा नहीं होता | Development Delay in Kids
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों में बोलने की ताकत एक तय समय के आसपास डेवलप होती है, लेकिन हर बच्चे में यह प्रोसेस थोड़ी अलग तरह से हो सकती है। हालांकि अगर उम्र के हिसाब से देरी हो रही हो, तो यह परेशानी बन सकता है। कई बार बच्चे में देरी से बोलने की वजह सुनने की ताकत में कमी होती है, जिससे बच्चा आवाजें ठीक से सुन नहीं पाता है और नतीजतन बोल भी नहीं पाता है। कुछ मामलों में वोकल कॉर्ड, इंटरनल इयर, नर्वस सिस्टम या दिमाग के भाषा से जुड़े हिस्से में किसी तरह की कमजोरी इसकी वजह बन सकती है। कम शक्ति की वजह से भी बच्चों को लंबे बात सुनकर उन्हें दोहराने में दिक्कत हो सकती है।
यह नहीं करना चाहिए नजरअंदाज | Development Delay in Kids
सिर्फ देर से बोलना ही अकेला इशारा नहीं है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर बच्चे में बार बार हाथ फड़फड़ाना, गोल गोल घूमना या खिलौनों के सिर्फ एक हिस्से जैसे पहिए से ही बार बार खेलते रहना जैसी आदतें दिखें, तो इन्हें भी ध्यान में रखना चाहिए। इसके अलावा तेज रोशनी, तेज आवाज या किसी खास कपड़े को छूने पर बहुत ज्या चिड़चिड़ा हो जाना भी एक अहम इशारा माना जाता है।
आई कॉन्टैक्ट कम होना क्यों है अहम इशारा? | Development Delay in Kids
बोलने में देरी के साथ साथ अगर बच्चा आंखों में आंखें डालकर बात करने से बचता है, नाम पुकारने पर जवीब नहीं देता है, या दूसरों के साथ जुड़ने में दिलचस्पी कम दिखाता है, तो यह सिर्फ शर्मीलेपन का मामला नहीं हो सकता। ऐसे लक्षण एक साथ दिखने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना ज्यादा बेहतर रहता है।
कब करना चाहिए डॉक्टर से संपर्क? | Development Delay in Kids
अगर समय देने और बात करने के तमाम कोशिशों के बावजूद बच्चे की स्पीच में सुधार नहीं दिख रहा है,या बताए गए किसी भी लक्षण के साथ बोलने में देरी जुड़ी हुई है, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें। शुरुआती पहचान और सही समय पर मिली मदद बच्चे के आगे के डेवलप में काफी फर्क ला सकती है।





