Swine Flu: इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज, स्वाइन फ्लू हो सकता है खतरनाक: डॉ सूर्यकांत


Swine Flu: फ्लू और स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहें हैं। ऐसे में लोगों के लिए इन बीमारियों के लक्षणों और इनके बीच अंतर को समझना बेहद जरूरी है। सामान्य सर्दी-जुकाम प्रायः हल्का होता है, जबकि फ्लू अचानक तेज लक्षणों के साथ शुरू हो सकता है और कुछ मरीजों में गंभीर रूप भी ले सकता है। स्वाइन फ्लू भी इन्फ्लुएंजा वायरस से होने वाला श्वसन संक्रमण है। यह जानकारी डॉ. सूर्यकान्त, विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय ने दी है। उन्होंने बताया कि आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाने वाला एच1एन1 इन्फ्लुएंजा-ए वायरस से होने वाला संक्रमण है।डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि साधारण सर्दी-जुकाम में बुखार सामान्यतः नहीं होता या हल्का रहता है। सिरदर्द भी हल्का हो सकता है और शरीर में दर्द बहुत कम या कभी-कभार ही होता है। कमजोरी सामान्यतः हल्की रहती है। गले में खराश या गला खराब होना सामान्य लक्षण है, जबकि छाती में तकलीफ प्रायः हल्की होती है। अधिकांश मामलों में इसके लक्षण धीरे-धीरे शुरू होते हैं और बीमारी अपेक्षाकृत हल्की रहती है। स्वाइन फ्लू (एच1एन1) मौसमी फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा-ए संक्रमण का ही एक प्रकार है। इसके लक्षण सामान्य मौसमी फ्लू जैसे ही हो सकते हैं, जिनमें तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, खांसी, गले में खराश, अत्यधिक कमजोरी और थकान प्रमुख हैं।
समय पर चिकित्सकीय सलाह जरूरी
कुछ मरीजों में लक्षण अधिक गंभीर हो सकते हैं और सांस लेने में परेशानी, निमोनिया तथा अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए स्वाइन फ्लू को लेकर विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले मरीजों में समय पर चिकित्सकीय सलाह और उचित उपचार आवश्यक है। फ्लू संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने अथवा बात करने के दौरान निकलने वाली श्वसन बूंदों से फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति के निकट संपर्क में रहने तथा संक्रमित हाथों से आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। इसलिए हाथों की स्वच्छता और खांसते-छींकते समय सावधानी बेहद जरूरी है। हल्के सर्दी-जुकाम या फ्लू की स्थिति में पर्याप्त आराम करने, पानी एवं अन्य तरल पदार्थों का सेवन करने तथा हल्का और सुपाच्य भोजन लेने की सलाह दी जाती है। सामान्य वायरल संक्रमण में बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक का सेवन नहीं करना चाहिए। बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह के अनुसार पैरासिटामोल, सर्दी-जुकाम के लिए एंटी-एलर्जिक दवा तथा खांसी के लिए कफ सिरप लिया जा सकता है। एंटीवायरल दवाओं का सेवन केवल योग्य चिकित्सक के परामर्श से ही करना चाहिए।





