क्या घर बैठे पता कर सकते हैं कि किडनी स्वस्थ है या नहीं? जानिए शुरुआती संकेत और कब हो जाएं अलर्ट

Kidney Health Guide: जब भी सेहत को ठीक रखने की बात आती है, तो सबसे पहले हमारे दिमाग में ‘हार्ट हेल्थ’ (Heart Health) का ख्याल आता है। हालांकि दिल की सेहत का ख्याल रखना जितना जरूरी है, उतना ही हमारे शरीर के दूसरे अंगों, विशेषकर किडनी (Kidney) को स्वस्थ रखना भी आवश्यक है।
किडनी हमारे शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो खून से बेकार पदार्थों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने, शरीर में नमक व मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। आधुनिक जीवनशैली और खान-पान की गड़बड़ियों के कारण आज किडनी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
क्या घर बैठे पता कर सकते हैं कि किडनी स्वस्थ है या नहीं?
सीधे शब्दों में कहें तो, घर बैठे लैब टेस्ट की तरह किडनी की कार्यक्षमता (Kidney Function) की सटीक पुष्टि नहीं की जा सकती है। हालांकि, शरीर में होने वाले कुछ अंदरूनी और बाहरी बदलावों को समय रहते पहचानकर आप यह अंदाजा जरूर लगा सकते हैं कि आपकी किडनी खतरे में तो नहीं है।
अगर आपको नीचे दिए गए संकेत लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से मिलकर किडनी की जांच (जैसे ब्लड में क्रिएटिनिन और यूरिन में एल्ब्यूमिन टेस्ट) करवानी चाहिए।
इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज (कब हो जाएं अलर्ट?)
पेशाब में बदलाव (Changes in Urination)
पेशाब करते समय लगातार बहुत ज्यादा झाग बनना, जो पेशाब में प्रोटीन (Proteinuria) आने का संकेत हो सकता है।
पेशाब के रंग में अचानक बदलाव दिखना, जैसे पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या गहरा भूरा होना।
चेहरे, हाथों या पैरों में सूजन
जब किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और सोडियम को ठीक से बाहर नहीं निकाल पाती, तो वह शरीर में जमा होने लगता है। इसके कारण सुबह उठने पर आंखों के आसपास या पलकों पर सूजन दिख सकती है। इसके अलावा टखनों (Ankles), पैरों या हाथों में भी सूजन आ सकती है। इसके साथ सांस फूलने की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
लगातार थकान और कमजोरी
यदि पर्याप्त आराम करने के बाद भी शरीर में हमेशा सुस्ती और कमजोरी बनी रहती है, तो यह किडनी की क्रॉनिक बीमारी (CKD) के कारण होने वाले एनीमिया (खून की कमी) का संकेत हो सकता है।
त्वचा में लगातार खुजली
किडनी के ठीक से काम न करने पर खून में मिनरल्स और अपशिष्ट पदार्थों का संतुलन बिगड़ने लगता है, जिससे त्वचा में गंभीर और लगातार खुजली की समस्या हो सकती है। कुछ लोगों को पैरों में मांसपेशियों की ऐंठन (Cramps) भी महसूस होती है।
हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure)
हाई बीपी और किडनी की बीमारी का चोली-दामन का साथ है। हाई बीपी किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है, और खराब किडनी ब्लड प्रेशर को और बढ़ा सकती है। इसलिए समय-समय पर अपना बीपी जरूर चेक करते रहें।
किन लोगों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है?
जिन लोगों को पहले से डायबिटीज (Diabetes) या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उन्हें अपनी किडनी को लेकर सबसे ज्यादा सतर्क रहना चाहिए।
डायबिटीज के मरीजों को नियमित अंतराल पर अपनी किडनी की रूटीन जांच (जैसे UACR और Serum Creatinine) करवाते रहना चाहिए।
बीपी के मरीजों को नमक का सेवन सीमित करना चाहिए और अपनी शारीरिक सक्रियता (Physical Activity) पर ध्यान देना चाहिए।




