Covid-19: भारत में RF.5 ने बढ़ाई चिंता, जानिए ये कितना खतरनाक


Covid-19: करीब दो साल तक काफी शांत रहने के बाद भारत में कोविड-19 एक बार फिर सुर्खियों में है। भारत के अलावा चीन में भी संक्रमण बढ़ने की खबरें हैं। सिर्फ जून महीने में ही चीन में करीब 80 हजार लोगों को संक्रमण का शिकार पाया गया था। इसके अलावा 1-16 जुलाई के बीच भारत में करीब 339 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई। मुंबई और आंध्र प्रदेश में फिलहाल कोरोना को लेकर सबसे ज्यादा हलचल देखी जा रही है। आंध्र प्रदेश में अब तक 16 कोविड-19 मामलों और 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
16 में से 12 मामले 16 जुलाई तक सामने आए थे। यहां चार लोगों के पॉजिटिव सैंपल में ओमिक्रॉन के RF.5 वैरिएंट की पहचान की गई है। ओमिक्रॉन के इस सब-वेरिएंट के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। जीनोम सीक्वेंसिंग में कडप्पा जिले के कोविड-19 संक्रमित सैंपल में इस वेरिएंट की पहचान हुई है। गौरतलब है कि ये वैरिएंट ओमिक्रॉन फैमिली का ही हिस्सा है और दुनियाभर में पहचाने गए कई ओमिक्रॉन सब-लीनिएज में से एक है। अब सवाल ये है कि क्या ये वैरिएंट पहले के मिले ओमिक्रॉन वैरिएंट्स से ज्यादा खतरनाक है?
कितना खतरनाक है ये RF.5 वैरिएंट? | Covid-19
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि कडप्पा जिले में सामने आए कोविड-19 मामलों के चार सैंपल टेस्टिंग के लिए पुणे की एक वायरोलॉजी लैब में भेजे गए थे। इसमें ओमिक्रॉन वैरिएंट के RF.5 सब-लीनिएज की मौजूदगी का पता चला है। शनिवार देर रात जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज में आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव ने कहा, पुणे की वायरोलॉजी लैब में जीनोम सीक्वेंसिंग से चार कोविड-19 पॉजिटिव सैंपल में ओमिक्रॉन RF.5 वैरिएंट की मौजूदगी की पाई गई है। विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। RF.5, ओमिक्रॉन परिवार का ही एक सब-लाइनिएज है। अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि यह पहले से मौजूद ओमिक्रॉन वैरिएंट्स की तुलना में अधिक गंभीर बीमारी, ज्यादा मौत या अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम पैदा करता है।
पहले भी देखा जा चुका है ये वैरिएंट | Covid-19
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी इस वैरिएंट पर नजर बनाए हुए है। यह वैरिएंट पहले सिंगापुर और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में देखा गया है। अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार RF.5 भी ओमिक्रॉन के पहले के वैरिएंट की तरह ही है। इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी जरूर बरतनी चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि RF.5 कोई रिकॉम्बिनेंट (दो अलग-अलग वैरिएंट के मिलकर बनने वाला नया वायरस) नहीं है। यह वायरस प्राकृतिक रूप से विकसित हुआ है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह JN.1 वैरिएंट से आगे LF.7 और PY.1.1.1 के जरिए विकसित होकर RF.5 बना है।
क्या हैं इसके लक्षण? | Covid-19
मेडिकल एजुकेशन के डायरेक्टर विष्णुवर्धन ने कहा कि सार्स-सीओवी-2 की रूटीन जीनोमिक निगरानी के तहत RF.5 वैरिएंट पर नजर रखी जा रही थी। RF.5 के लक्षण भी दूसरे ओमिक्रॉन वैरिएंट जैसे ही हैं। इनमें लोगों को गले में खराश, खांसी, बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसी दिक्कतें हो रही हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि फिलहाल आंध्र प्रदेश में कोविड-19 के मामले इक्का-दुक्का ही सामने आ रहे हैं और राज्य के सभी अस्पताल किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। मेडिकल कॉलेजों और शिक्षण अस्पतालों में जरूरत पड़ने पर विशेष कोविड वार्ड तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही कोविड जांच किट और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि समय पर संक्रमित मरीजों की पहचान की जा सके।





