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Health Tips: महिलाओं की ये छोटी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी मुसीबतों का कारण

Health Tips in Hindi: अच्छी सेहत पाना मौजूदा समय की सबसे बड़ी जरूरत भी है और चुनौती भी। हालांकि, दुनियाभर में जिस तेजी से डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर हो या डायबिटीज-किडनी की बीमारियां, बढ़ती जा रही हैं, इसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं। जब बात महिलाओं की सेहत की आती है तो ये चिंता और भी बढ़ जाती है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि महिलाओं की सेहत लगातार चुनौतियों से जूझ रही है। करियर, परिवार और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच महिलाएं अक्सर अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं दे पातीं।

इसके अलावा खराब लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधियों में और बढ़ते मानसिक तनाव ने समस्याों को और भी गंभीर बना दिया है। पर्याप्त पोषण की कमी महिलाओं में एनीमिया का खतरा बढ़ाती जा रही है, भारत में 57% से अधिक महिलाएं खून की कमी का शिकार हैं। इन समस्याओं के अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञ एक छोटी सी लापरवाही को लेकर भी सभी महिलाओं को सावधान करते हैं, जो धीरे-धीरे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत को खराब करती जा रही है।

नींद की कमी महिलाओं की सेहत का दुश्मन | Health Tips in Hindi

महिलाओं में नींद की समस्या या रात में देर से सोने की आदत को स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत के लिए बहुत हानिकारक मानते हैं। नींद की कमी एक साइलेंट खतरे के रूप में उभर रही है। देर रात तक जागना, मोबाइल और स्क्रीन टाइम बढ़ना और स्ट्रेस के कारण महिलाओं की नींद पूरी नहीं हो पाती। अध्ययनों से पता चलता है कि रात में 8 घंटे से कम की नींद हार्मोनल असंतुलन के साथ महिलाओं की शारीरिक और मानसिक सेहत दोनों को प्रभावित कर सकती है। कम उम्र में ही  पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) मोटापा, डायबिटीज, थायरॉइड और मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के लिए सीधे तौर पर नींद विकारों या देर से सोने की आदत को जिम्मेदार पाया गया है।

हार्मोनल असंतुलन और पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं | Health Tips in Hindi

नींद पूरी न होना महिलाओं के हार्मोन सिस्टम को सबसे पहले प्रभावित करता है। नींद के दौरान शरीर एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और मेलाटोनिन जैसे जरूरी हार्मोन को संतुलत करता है। जब महिलाएं देर रात तक जागती हैं या 7-8 घंटे की नींद नहीं ले पातीं, तो इससे हार्मोनल साइकिल बिगड़ जाती है। इसका सीधा असर पीरियड्स पर पड़ता है, जिससे अनियमित माहवारी, ज्यादा दर्द, हैवी ब्लीडिंग या पीरियड्स का देर से आना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लगातार नींद की कमी पीसीओएस के खतरे को भी बढ़ाती है, जिसके कारण प्रजनन स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लग जाता है। इससे गर्भधारण में परेशानी और मूड स्विंग्स बढ़ सकते हैं।

मेटाबॉलिज्म की समस्या | Health Tips in Hindi

नींद कम आने या फिर देर रात से सोने की आदत मेटाबॉलिज्म से संबंधित समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। इसका सीधा असर वजन पर पड़ता है। नींद पूरी न होने के कारण भूख को कंट्रोल करने वाले हार्मोन लेप्टिन और घ्रेलिन में असंतुलन हो जाता है। इस वजह से भूख ज्यादा लगती है और हाई-कैलोरी, मीठा या जंक फूड खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है, जो बढ़ाने बढ़ाने वाले माने जाते हैं। जो महिलाएं रोजाना 6 घंटे से कम सोती हैं, उनमें मोटापा और पेट की चर्बी बढ़ने का खतरा ज्यादा होता है।

मेंटल हेल्थ की भी हो सकती है दिक्कत | Health Tips in Hindi

देर रात तक जागना और नींद की कमी महिलाओं की मानसिक सेहत के लिए भी बहुत नुकसानदायक मानी जाती है। नींद के दौरान दिमाग खुद को रिलैक्स करता है और स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल को कंट्रोल करता है। नींद पूरी न होने पर कोर्टिसोल लेवल बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ कोर्टिसोल एंग्जायटी, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स और डिप्रेशन का कारण बन सकता है। महिलाएं लगातार नींद की कमी से जूझती हैं, उनमें डिप्रेशन का खतरा लगभग दोगुना हो सकता है।

हार्ट और डायबिटीज का भी हो सकती हैं शिकार | Health Tips in Hindi

नींद की बनी रहने वाली कमी महिलाओं में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगों का भी जोखिम बढ़ाने वाली हो सकती है। नींद की कमी से ब्लड शुगर लेवल और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है, जो डायबिटीज की वजह बन सकता है। इसी तरह नींद न आने की दिक्कत कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी बिगाड़ती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। नींद की कमी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर देती है और समय से पहले एजिंग के लक्षण दिखने लगते हैं।

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