World Cancer Day 2026: क्या छोटे बच्चों को भी हो सकता है कैंसर? आप भी जरूर जान लें ये बातें


World Cancer Day 2026: कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है, इस रोग के कारण हर साल सबसे ज्यादा मौतें भी होती हैं। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी (एसीएस) ने ग्लोबल कैंसर स्टैटिस्टिक्स 2024 की रिपोर्ट में बताया कि साल 2022 में अनुमानित 20 मिलियन (2 करोड़) कैंसर के नए मामले सामने आए और दुनिया भर में इस बीमारी से 9.7 मिलियन (97 लाख) से अधिक लोगों की मौत हो गई। जिस गति से कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं ऐसे में विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2050 तक कैंसर के मामलों की संख्या 35 मिलियन (3.5 करोड़) से ज्यादा तक पहुंच सकती है। अध्ययनों से पता चलता है कि खराब जीवनशैली, गलत खानपान, पर्यावरणीय प्रदूषण और रसायनों के संपर्क के कारण लोगों में ये बीमारी काफी आम होती जा रही है। कुछ दशकों पहले तक माना जाता था कि कैंसर उम्र से जुड़ी है यानी कि जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है इस रोग का खतरा भी अधिक होता जाता है, हालांकि अब महिला-पुरुष और कम उम्र के लोग भी कैंसर की चपेट में आते जा रहे हैं।
क्या 10 साल से कम उम्र के बच्चों को भी कैंसर हो सकता है? | World Cancer Day 2026
वैश्विक स्तर पर कैंसर के बढ़ते मामलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी रोकथाम, पहचान और इलाज को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी को वर्ल्ड कैंसर डे मनाया जाता है। कैंसर रोग विशेषज्ञ कहते हैं, इस बीमारी के बारे में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ज्यादातर मामलों में कैंसर का पता तब चलता है जब यह एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है। ऐसे में समय पर जागरूकता, सही जानकारी और स्वस्थ आदतें अपनाना बेहद जरूरी हो गया है। बच्चों में भी कैंसर के मामले बढ़ते देखे जा रहे हैं, इसलिए जोखिम कारकों को समय रहते पहचाना जाए और कम उम्र से ही जीवनशैली में सुधार कर लिया जाए, तो कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है। आइए बच्चों में बढ़ती इस बीमारी और इससे बचाव के तरीकों को जान लेते हैं।
बच्चों में कैंसर का खतरा | World Cancer Day 2026
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में भी कैंसर होता है, हालांकि इसके मामले वयस्कों की तुलना में कम होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में, दुनिया भर में 2.75 से ज्यादा बच्चों और किशोरों (0-19 साल की उम्र) में कैंसर का पता चला। करीब 1.05 लाख बच्चों की इस साल कैंसर से मौत हो गई। हालांकि, असली संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई देशों में बच्चों में कैंसर का पता लगाना मुश्किल होता है। ल्यूकेमिया बच्चों में अब तक का सबसे आम कैंसर है और बच्चों में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे आम कारण भी यही है। ल्यूकेमिया के अलावा ब्रेन ट्यूमर और लिम्फोमा का भी बच्चों में खतरा अधिक देखा जाता रहा है। बच्चों में कैंसर का संबंध अधिकतर जेनेटिक कारणों और इम्यून सिस्टम से होता है, न कि लाइफस्टाइल से। समय पर पहचान और सही इलाज से बच्चों में रिकवरी की संभावना काफी अच्छी होती है।
बच्चों में कैंसर होने के क्या कारण हैं? | World Cancer Day 2026
बच्चों में कैंसर अक्सर जन्म से पहले होने वाले डीएनए म्यूटेशन की वजह से होता हैं, इसका कोई एक कारण नहीं है। 5-10% वंशानुगत जीन्स या डेवलपमेंटल समस्याओं जैसे संक्रमण, गर्भावस्था के दौरान रेडिएशन के संपर्क, जेनेटिक सिंड्रोम जैसे डाउन सिंड्रोम और यहां तक कि गर्भावस्था में ज्यादा प्रोसेस्ड फूड्स खाने से भी हो सकता हैं। कुछ खास स्थितियों से बच्चों में कैंसर होने का खतरा बढ़ सकता है। इसका एक उदाहरण डाउन सिंड्रोम वाले बच्चे हैं। उनमें दूसरे बच्चों की तुलना में ल्यूकेमिया होने का खतरा 10 से 20 गुना ज्यादा होता है।
बच्चों को कैंसर से बचाएं कैसे? | World Cancer Day 2026
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आप ज्यादातर मामलों में बचपन के कैंसर को पूरी तरह से रोक नहीं सकते, क्योंकि इसके कारण अक्सर पता नहीं होते, हालांकि आप हेल्दी लाइफस्टाइल, खान-पान में सुधार करके धुआं-रेडिएशन और केमिकल्स से बचाव करके बच्चों में इसके खतरे को कम कर सकते हैं। जिन परिवारों में कैंसर की फैमिली हिस्ट्री है, उनके लिए जेनेटिक काउंसलिंग मदद कर सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान धूम्रपान न करने से कुछ प्रकार के कैंसर का खतरा कम हो सकता है। नियमित जांच से संभावित खतरों का जल्दी पता लगाने में मदद मिलती है। लगातार दर्द या गांठ जैसे लक्षणों को हल्के में न लें।





