Cervical Cancer: सर्वाइकल कैंसर से बचाव के ये 5 असरदार तरीकों के बारे में जरूर जान लीजिए


Cervical Cancer: भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे खतरनाक कैंसरों में से एक है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, हर 8 मिनट में एक भारतीय महिला इसी कैंसर की वजह से अपनी जान गंवा देती है. यह आंकड़ा बहुत चिंताजनक है क्योंकि यह कैंसर शुरुआती चरण में आसानी से रोका और इलाज किया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर यह कैंसर तब पता चलता है जब यह काफी बढ़ चुका होता है. सर्वाइकल कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है, कई सालों तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के, इस लंबी अवधि का फायदा उठाकर हम इसे रोक सकते हैं या समय रहते इलाज कर सकते हैं. ऐसे में आइए आज हम आपको इस जानलेवा बीमारी से बचाव के 5 सबसे कारगर तरीके बताते हैं.
टीकाकरण सबसे ज्यादा प्रभावशाली | Cervical Cancer
सर्वाइकल कैंसर के ज्यादातर मामले ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) के कारण होते हैं. यह वायरस यौन संपर्क के जरिए फैलता है. ज्यादातर HPV संक्रमण अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन अगर उच्च जोखिम वाले स्ट्रेन सालों तक शरीर में रहते हैं, तो सर्वाइकल की कोशिकाओं में धीरे-धीरे बदलाव शुरू हो जाता है और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. HPV वैक्सीन इस संक्रमण को रोकती है. इसे सबसे अच्छे परिणाम के लिए 9 से 14 साल की उम्र में लगवाना चाहिए, लेकिन जरूरत पड़ने पर 26 साल या उससे ज्यादा उम्र में भी दिया जा सकता है. जिन देशों में व्यापक टीकाकरण हुआ है, वहां सर्वाइकल कैंसर की दर काफी कम हो गई है, भारत ने अब राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत इस वैक्सीन को शामिल किया है.
समय समय पर स्क्रीनिंग कराना जरूरी | Cervical Cancer
सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती चरण में लक्षण नहीं दिखते, कोई दर्द या असुविधा नहीं होती, स्क्रीनिंग से कैंसर बनने से पहले ही कोशिकाओं में बदलाव का पता चल सकता है. स्क्रीनिंग के प्रमुख तरीके पैप स्मीयर टेस्ट, HPV DNA टेस्ट या कम संसाधनों वाले क्षेत्रों में दृश्य निरीक्षण विधियां हैं. भारत में राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत लाखों महिलाओं की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में कवरेज अभी भी कम है.30 से 65 साल की महिलाओं को नियमित रूप से स्क्रीनिंग करानी चाहिए.
धूम्रपान से करें परहेज | Cervical Cancer
HPV मुख्य रूप से यौन संपर्क से फैलता है. कंडोम का नियमित इस्तेमाल संक्रमण का खतरा कम करता है. यौन साथी कम रखें और कम उम्र में यौन संबंध बनाने से बचें. यौन स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा करना जरूरी है, इससे संक्रमण और कैंसर का खतरा कम होता है. धूम्रपान सिर्फ फेफड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाता, यह इम्यूनिटी को कमजोर करता है. कमजोर इम्यूनिटी के कारण शरीर HPV संक्रमण को खत्म नहीं कर पाता, तंबाकू के हानिकारक रसायन सर्वाइकल की कोशिकाओं में जमा हो जाते हैं. धूम्रपान छोड़ने से धीरे-धीरे शरीर की प्रतिरक्षा लौट आती है और कैंसर का जोखिम कम होता है.
परिवार को भी रहना होगा सतर्क | Cervical Cancer
कई महिलाएं लक्षणों की अनदेखी करती हैं या डॉक्टर से मिलने में देर करती हैं. इसके गंभीर लक्षणों में पीरियड्स ब्लीडिंग, संभोग के बाद ब्लीडिंग, रजोनिवृत्ति के बाद ब्लीडिंग,, लगातार दुर्गंधयुक्त ब्लीडिंग,लगातार श्रोणि दर्द शामिल हैं. इसके शुरुआती पहचान से इलाज संभव है और जीवन बचाया जा सकता है. सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम सिर्फ महिला की जिम्मेदारी नहीं है. परिवार, शिक्षक, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता और नीति निर्माता सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए. टीकाकरण, स्क्रीनिंग और शीघ्र इलाज पहले से मौजूद हैं. जो कमी रह जाती है, अगर सही जानकारी और समर्थन मिले, तो लाखों महिलाओं की जान बचाई जा सकती है.





