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Asha Bhosle Death: क्यों होता है सीने में संक्रमण, आशा भोसले थीं शिकार

Asha Bhosle Death: मशहूर गायिका आशा भोसले (92) का रविवार (12 अप्रैल) को निधन हो गया। एक दिन पहले शनिवार को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ है, हालांकि बाद में पोती जनाई भोसले ने ट्वीट कर बताया कि उन्हें अत्यधिक थकान और सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ब्रीच कैंडी अस्पताल के डॉ. प्रतीत समदानी ने जानकारी दी है कि, आशा भोसले ने आज ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण उनका निधन हुआ। अब सवाल ये है कि सीने में संक्रमण की समस्या क्या है? ये दिक्कत होती क्यों है और किस तरह से ये जानलेवा तक साबित हो सकती है? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

सीने में संक्रमण के बारे में जानिए | Asha Bhosle Death

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, उम्र बढ़ने के साथ सीने के इन्फेक्शन की समस्या आम हो जाती है। वैसे तो ये संक्रमण अक्सर हल्के होते हैं और दवाओं के साथ आराम करने से ठीक हो जाते हैं। पर कुछ स्थितियों में संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग पहले से ही कोमोरबिडिटी का शिकार रहे हैं, उनमें संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा अधिक होता है। ये जानलेवा तक हो सकती है। सीने का संक्रमण ऐसी समस्या है जो फेफड़ों या सांस की नलियों को प्रभावित करती है। यह अक्सर किसी वायरस या बैक्टीरिया के कारण होता है। ब्रोंकाइटिस और निमोनिया सीने में संक्रमण के सबसे आम प्रकार हैं।  ब्रोंकाइटिस सांस की बड़ी नलियों को प्रभावित करता है। इसमें आमतौर पर बलगम के साथ लगातार खांसी की दिक्कत बनी रहती है।

यह अक्सर वायरल संक्रमण के कारण होता है। वहीं निमोनिया फेफड़ों में सांस की छोटी नलियों और हवा की थैलियों में होने वाला एक संक्रमण है। यह अधिक गंभीर होता है और अक्सर इसके लिए डॉक्टरी इलाज की जरूरत पड़ती है। बुजुर्गों में निमोनिया का खतरा अधिक रहता है, इसपर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये जानलेवा तक हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं,  सीने का संक्रमण सामान्य सर्दी या फ्लू के बाद भी हो सकता है। इसके शुरुआती लक्षणों पर नजर रखना जरूरी है, ताकि जल्द से जल्द इलाज शुरू किया जा सके और किसी भी तरह की जटिलता से बचा जा सके।

चेस्ट इंफेक्शन होने की पहचान क्या है? | Asha Bhosle Death

सीने में संक्रमण के शुरुआती लक्षण बहुत हल्के या सामान्य सर्दी-खांसी जैसे होते हैं, जिसका पता लगाना आमतौर पर कठिन होता है। हालांकि कुछ दिक्कतें अगर लगातार बनी हुई हैं तो सावधान हो जाना चाहिए। जल्द से जल्द डॉक्टरी सलाह और दवा शुरू करना जरूरी हो जाता है।

  •  खांसी जो ठीक न हो रही हो। खांसी के साथ बलगम भी आ रहा हो।

  • सांस फूलना या सांस लेने में दिक्कत होना

  • सीने में दर्द या जकड़न महसूस होना, खासकर खांसते या सांस लेते समय।

  • तेज बुखार, कंपकंपी या बहुत ज्यादा ठंड लगना।

  • बहुत ज्यादा थकान या कमजोरी महसूस होना।

बुजुर्गों में क्यों होता है ज्यादा खतरा ? | Asha Bhosle Death

डॉक्टर बताते हैं, सीने का इन्फेक्शन वैसे तो किसी को भी हो सकता है, लेकिन बुजुर्गों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है और गंभीर भी हो सकती है। जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कम होती जाती है। कोमोरबिडिटी जैसी स्थितियों में तो संक्रमण ठीक होने में और भी ज्यादा समय लग सकता है। बुजुर्गों में चेस्ट इंफेक्शन के मुख्य कारणों को जान लीजिए।

  •  उम्र बढ़ने के साथ इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, जिससे इन्फेक्शन से लड़ना मुश्किल हो जाता है।

  • क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), हार्ट की समस्या या डायबिटीज जैसी बीमारियां सीने में संक्रमण के खतरे और गंभीरता को बढ़ा सकती हैं।

  • उम्र बढ़ने के साथ शारीर के कम सक्रिय रहने से फेफड़ों के काम करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

  • पोषण और पानी की कमी के कारण छाती से संबंधित दिक्कतों का खतरा और भी बढ़ जाता है।

ऑर्गन फेलियर का हो सकता है खतरा | Asha Bhosle Death

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बुजुर्गों में सीने का संक्रमण अगर बढ़ जाए तो इससे ऑर्गन फेलियर तक का खतरा हो सकता है। संक्रमण बढ़ने की स्थिति में बैक्टीरिया फेफड़ों से खून में भी प्रवेश कर जाते हैं। इससे संक्रमण के अन्य अंगों में फैलने का भी खतरा बढ़ जाता है। समय रहते अगर इसे कंट्रोल न किया जाए तो इससे कई अंगों के काम करना बंद करने (ऑर्गन फेलियर) का खतरा भी बढ़ जाता है, जो मौत का भी कारण बन सकती है।

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