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Sonam Wangchuk Hunger Strike: भूख हड़ताल से शरीर को क्या- होते हैं खतरे? जानें

Sonam Wangchuk Hunger Strike: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जारी है। उनकी बिगड़ती सेहत लेकर चिंता जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनम वांगचुक का शरीर कमजोर हो रहा है और उनकी मांसपेशियों में दर्द है। वांगचुक का वजन 8.5 किलोग्राम कम हो चुका है, उनका ब्लड प्रेशर 109/70 है। उनके हजारों समर्थक अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे हैं, हालांकि वह अपने फैसले पर अडिग हैं। वांगचुक की तेजी से बिगड़ती सेहत और गिरता वजन लोगों परेशान करने वाला है। वैसे तो उपवास को अध्ययनों में सेहत के लिए अच्छा बताया जाता रहा है। पर क्या आप जानते हैं कि लंबे समय तक बिना भोजन के रहने से शरीर पर क्या असर पड़ता है? क्या यह सिर्फ कमजोरी तक सीमित रहती है या फिर इससे गंभीर खतरा पैदा हो सकता है?

भूख हड़ताल का सेहत पर क्या असर होता है? | Sonam Wangchuk Hunger Strike

मेडिकल एक्सपर्ट्स के अनुसार, लंबे समय तक भूख हड़ताल या लगातार भोजन न करने की स्थिति में शरीर पहले ग्लूकोज, फिर ग्लाइकोजन और उसके बाद ऊर्जा के लिए फैट तथा मांसपेशियों का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है। समय बढ़ने के साथ डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, लो ब्लड प्रेशर और शुगर की समस्या के साथ मांसपेशियों में कमी और कई अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। इतना ही नहीं  यदि पर्याप्त पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स या चिकित्सकीय निगरानी न हो तो स्थिति जानलेवा भी बन सकती है। हालांकि, भूख हड़ताल के दौरान स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रभाव हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। यह व्यक्ति की उम्र, पहले से मौजूद बीमारियों, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के सेवन तथा मेडिकल मॉनिटरिंग जैसी कई बातों पर निर्भर करता है।

इलेक्ट्रोलाइट्स असंतुलन के कारण होने वाली दिक्कतें | Sonam Wangchuk Hunger Strike

लंबे समय तक भोजन न करने पर शरीर में केवल कैलोरी की कमी नहीं होती, बल्कि सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फॉस्फेट जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का स्तर भी प्रभावित होने लगता है। ये तत्व दिल की धड़कन, मांसपेशियों के संकुचन, नसों के काम और दिमाग के सामान्य कार्य के लिए बेहद जरूरी हैं। जब इनका संतुलन बिगड़ता है तो कमजोरी, चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन, बेहोशी और गंभीर मामलों में दिल की धड़कन अनियमित तक हो सकती है। लंबे उपवास के बाद अचानक सामान्य भोजन शुरू करने पर रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा भी बढ़ जाता है।

अंगों की कार्यक्षमता हो जाती है कम | Sonam Wangchuk Hunger Strike

भोजन बंद होने के शुरुआती 24 घंटे के भीतर शरीर पहले ग्लाइकोजन का उपयोग करता है। इसके बाद ऊर्जा के लिए फैट का इस्तेमाल बढ़ता है। लेकिन जब उपवास लंबा हो जाता है, तब केवल फैट पर्याप्त नहीं रहती और शरीर अपनी मांसपेशियों के प्रोटीन को तोड़कर ग्लूकोज बनाना शुरू कर देता है। इसे कैटाबोलिज्म कहा जाता है। लंबे समय तक प्रोटीन की कमी से सांस लेने वाली मांसपेशियां भी कमजोर हो सकती हैं। शरीर की इम्युनिटी घटने लगती है। घाव भरने की क्षमता कम हो जाती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

ब्लड शुगर-ब्लड प्रेशर पर असर | Sonam Wangchuk Hunger Strike

लंबे उपवास के दौरान शरीर में पानी और पोषक तत्वों की कमी होने लगती है। यदि आप पर्याप्त मात्रा में तरल नहीं लेते हैं तो इससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है जो ब्लड प्रेशर लो कर सकता है। बीपी लो होने के कारण चक्कर आते हैं, बेहोशी हो सकती है। ज्यादा देर तक भूखे रहने से ब्लड शुगर भी लो हो सकता है। लो ब्लड शुगर से पसीना आने, घबराहट, भ्रम, बोलने में कठिनाई और गंभीर मामलों में बेहोशी तक हो सकती है।

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