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Viral Fever vs Swine Flu: दोनों के बीच अंतर कैसे पता करें, बचाव के लिया क्या है जरूरी, जानिए

Viral Fever vs Swine Flu: मौसम में बदलाव के साथ वायरल इंफेक्शन और बुखार का खतरा काफी तेजी से बढ़ता है। आमतौर पर लोग हर बुखार को “सामान्य वायरल” समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन इन दिनों दिल्ली में स्वाइन फ्लू (H1N1) काफी तेजी से फैल रहा है। ऐसे में स्वाइन फ्लू (H1N1) और सामान्य वायरल फीवर के बीच का अंतर समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। दोनों के बीच क्या अंतर है और स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए कौन कौन से उपाय करना चाहिए।

वायरल फीवर और स्वाइन फ्लू के बीच मुख्य अंतर | Viral Fever vs Swine Flu

  • सामान्य वायरल फीवर धीरे-धीरे बढ़ता है। इसके विपरीत, स्वाइन फ्लू में वायरस का हमला अचानक और बहुत तेज होता है। इसमें मरीज कुछ ही घंटों में बहुत तेज बीमार महसूस करने लगता है।

  •  बुखार का लेवल: सामान्य वायरल फीवर में हल्का से मध्यम बुखार (99°-101°F) रहता है। स्वाइन फ्लू में अचानक 102°F से 104°F तक तेज बुखार आता है, जो साधारण दवाइयों से आसानी से कम नहीं होता।

  •  शरीर और मांसपेशियों में दर्द: स्वाइन फ्लू में मांसपेशियों और जोड़ों में बहुत तेज दर्द और थकान होती है, जबकि सामान्य वायरल में यह हल्का होता है।

  •  सांस संबंधी समस्याएं: सामान्य वायरल में केवल नाक बहना या हल्का गला खराब होने जैसी समस्याएं होती है।  स्वाइन फ्लू में सूखी, तेज खांसी, गले में खराश और कुछ मामलों में सांस फूलना या सीने में जकड़न महसूस होती है।

स्वाइन फ्लू (H1N1) से बचाव के उपाय | Viral Fever vs Swine Flu

  • स्वाइन फ्लू एक ड्रॉपलेट इन्फेक्शन है। इससे बचाव के लिए अपनाएं ये जरूर उपाय।

  • फ्लू टीकाकरण: स्वाइन फ्लू से बचने का सबसे प्रभावी तरीका एनुअल क्वाड्रिवेलेंट इन्फ्लूएंजा वैक्सीन है। यह शरीर में H1N1 वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी बनाता है।

  • मास्क और दूरी: भीड़भाड़ वाली जगहों पर N95 या सर्जिकल मास्क पहनें और खांसते या छींकते समय अपनी कोहनी या टिशू से मुंह ढकें।

  • हाथों की स्वच्छता: दिन में कई बार कम से कम 20 सेकंड तक साबुन-पानी से हाथ धोएं या अल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइज़र का उपयोग करें। गंदे हाथों से आंख, नाक और मुंह न छुएं।

  • खुद को आइसोलेट करें: यदि आपको बुखार या खांसी है, तो घर पर रहें ताकि परिवार और सहकर्मियों में यह संक्रमण न फैले।

डॉक्टर से सलाह कब लें? | Viral Fever vs Swine Flu

यदि आपको या आपके परिवार में किसी को सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, होंठों का नीला पड़ना, या 3 दिन से अधिक समय तक लगातार तेज बुखार रहे, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क करें। बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से एंटीबायोटिक्स का सेवन न करें। स्वाइन फ्लू एक वायरल बीमारी है, जिस पर एंटीबायोटिक्स असर नहीं करतीं।

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