Lucknow: दिव्यांग बच्चे को आगे बढ़ने, स्वतंत्र बनने और समाज में सहभागी होने के प्रदान किये जाएं अवसर
केजीएमयू में ‘दिव्यांग बच्चों के सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता एवं समावेशी सहभागिता’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित

Lucknow: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग (Department of Physical Medicine and Rehabilitation—DPMR) की ऑक्यूपेशनल थेरेपी इकाई द्वारा ऑल इंडिया ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट्स एसोसिएशन (AIOTA) के सहयोग से दिव्यांग बच्चों की सहभागिता, आत्मनिर्भरता एवं समावेशन सुनिश्चित करने हेतु अभिभावकों का सशक्तीकरण विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. केके सिंह (डीन, फैकल्टी ऑफ एलाइड हेल्थ साइंसेज, केजीएमयू) थे। इस अवसर पर प्रो. अनिल कुमार गुप्ता (विभागाध्यक्ष, भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग, केजीएमयू); डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव (पूर्व प्रभारी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी इकाई, डीपीएमआर), तथा डॉ. पंकज बाजपेयी (अध्यक्ष, ऑल इंडिया ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट्स एसोसिएशन) की भी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में प्रो. केके सिंह ने दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास, उनकी कार्यात्मक क्षमताओं के विकास तथा दैनिक जीवन में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने में ऑक्यूपेशनल थेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने केजीएमयू में बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (BOT) पाठ्यक्रम प्रारंभ करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिससे इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पेशेवरों की उपलब्धता बढ़ाने तथा पुनर्वास सेवाओं को और सुदृढ़ करने में सहायता मिल सके। पैनल चर्चा में विभिन्न विशेषज्ञों ने बाल्यावस्था में होने वाली दिव्यांगताओं, बच्चों के समग्र विकास तथा पुनर्वास प्रक्रिया में अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार साझा किए। पैनल में डॉ. अनुपम सिंह (सहायक प्रोफेसर, मनोचिकित्सा विभाग, सरदार पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन एंड हेल्थ साइंसेज); डॉ. आराधना शुक्ला (सहायक प्रोफेसर, भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग, केजीएमयू); डॉ. पूजा मल्हौर (प्रोफेसर, मनोचिकित्सा विभाग), तथा डॉ. नितेश कुमार श्रीवास्तव (वरिष्ठ ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट एवं प्रभारी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी इकाई, भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग, केजीएमयू) ने सहभागिता की।
अभिभावकों को जागरूक और सशक्त बनाना आवश्यक: विशेषज्ञ
पैनल विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि दिव्यांग बच्चों के विकास में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी, सही मार्गदर्शन, नियमित घरेलू अभ्यास, सकारात्मक व्यवहार तथा परिवार के सहयोग की अहम भूमिका होती है। पुनर्वास का उद्देश्य केवल बच्चे की कठिनाइयों को कम करना नहीं, बल्कि उसे दैनिक गतिविधियों में अधिक स्वतंत्र बनाना, सामाजिक सहभागिता बढ़ाना तथा घर, विद्यालय और समुदाय में समावेश के अवसर उपलब्ध कराना भी है। चर्चा के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि चिकित्सकीय एवं पुनर्वास सेवाओं के साथ-साथ अभिभावकों को जागरूक और सशक्त बनाना आवश्यक है, ताकि वे बच्चों की क्षमताओं को पहचानकर उनके विकास में प्रभावी योगदान दे सकें। परिवार, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शिक्षकों के बीच समन्वय से बच्चों के लिए अधिक अनुकूल एवं समावेशी वातावरण तैयार किया जा सकता है।

कार्यक्रम का आयोजन डॉ. नितेश कुमार श्रीवास्तव (वरिष्ठ ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट एवं प्रभारी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी इकाई, डीपीएमआर, केजीएमयू); डॉ. अरुण कुमार (ऑक्यूपेशनल थेरेपी) तथा डॉ. श्रीतोष सोनकर (ऑक्यूपेशनल थेरेपी) के नेतृत्व में किया गया। आयोजन में वीके दीक्षित, प्रदीप गंगवार, बलराम श्रीवास्तव एवं शुभ्रता श्रीवास्तव सहित टीम के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम में शहर के अनेक ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट्स ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को जागरूक करना, पुनर्वास सेवाओं में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करना तथा बच्चों में आत्मनिर्भरता, सामाजिक सहभागिता और समावेश को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक प्रयासों को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम ने इस संदेश को प्रमुखता से सामने रखा कि उचित पुनर्वास, सशक्त अभिभावक और समाज के सहयोग से प्रत्येक दिव्यांग बच्चे को अपनी क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने, स्वतंत्र बनने और समाज में सम्मानपूर्वक सहभागी होने के अवसर प्रदान किए जा सकते हैं।




