
Anemia in Teenager: क्या आपका बच्चा भी हर समय थका-थका सा रहता है, सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूल जाती है या चेहरा भी उतर गया है? इसे सिर्फ पढ़ाई का दबाव और ज्यादा मेहनत का नतीजा मानना सही नहीं है, कई बार ये शरीर की गंभीर समस्या या एनीमिया का संकेत भी हो सकता है। एनीमिया यानी शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होना। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद वह प्रोटीन है, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।
इसकी कमी से होने शरीर के हर हिस्से तक ठीक तरीके से ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं पहुंच पाता है, जिसके कारण कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। महिलाओं और किशोरियों में ये समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती रही हैं। किशोरियों में मासिक धर्म के कारण आयरन की जरूरत और बढ़ जाती है। भोजन में आयरन की कमी, शरीर में आयरन का ठीक से अवशोषण न होने, संक्रमण या लगातार रक्तस्राव जैसी समस्याएं इसकी वजह बन सकती हैं। छोटे बच्चे भी इसका शिकार हो सकते हैं, इसलिए सभी लोगों में एनीमिया के लक्षणों पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।
एनीमिया के कारण हो सकती हैं कई दिक्कतें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एनीमिया का असर सिर्फ चेहरे के रंग पर नहीं पड़ता। शरीर को निरंतर पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने से कमजोरी और थकान बढ़ सकती है। गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली आयरन की कमी बच्चों और किशोरों के शारीरिक तथा मानसिक विकास को भी प्रभावित कर सकती है। बच्चों, खासतौर पर किशोरियों में इसपर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत होती है। चेहरे और त्वचा पर इसके स्पष्ट संकेत देखे जा सकते हैं।
एनीमिया का त्वचा पर दिखता है असर
एनीमिया की स्थिति में त्वचा या आंख के अंदर का सफेद हिस्सा सामान्य से ज्यादा पीला दिखने लगता है। इसके साथ कमजोरी, चक्कर आने, सिरदर्द, हाथ-पैर ठंडे होने और थोड़ी मेहनत पर सांस फूलने जैसी दिक्कतें भी हो सकती है। कुछ किशोरों को हर समय नींद या सुस्ती महसूस हो सकती है। लेकिन केवल चेहरा देखकर एनीमिया की पुष्टि नहीं की जा सकती। कई बार ये पीलिया का संकेत भी हो सकता है। इसलिए अगर लक्षण लगातार बने हुए हैं तो खून की जांच जरूरी है। एनीमिया की पुष्टि हीमोग्लोबिन की जांच से की जाती है और इसके बाद कारण पता करना भी उतना ही जरूरी है।
हर समय रहती है थकान
हीमोग्लोबिन कम होने पर खून की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता घट जाती है। इसका असर शरीर की ऊर्जा और काम करने की क्षमता पर पड़ सकता है। यही वजह है कि एनीमिया से पीड़ित किशोरों को थोड़ी देर मेहनत के बाद ही थकान महसूस हो सकती है। कई बच्चों के लिए खेलना, सीढ़ियां चढ़ना या लंबे समय तक खड़े रहना तक मुश्किल हो सकता है। अगर बच्चा पहले सामान्य रूप से खेलता था लेकिन अब जल्दी थकने लगा है, बार-बार आराम करना चाहता है या रोजमर्रा के कामों में कमजोरी महसूस करता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पढ़ाई और ध्यान लगाने में भी होती है दिक्कत
आयरन की कमी और एनीमिया का असर बच्चों में शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास पर भी देखा जाता है। संज्ञानात्मक यानी सोचने, समझने, याद रखने और ध्यान लगाने से जुड़ी क्षमता कम हो सकती है। अगर बच्चे में थकान के साथ पढ़ाई में ध्यान लगाने में परेशानी, सुस्ती या काम करने की क्षमता में कमी दिखे तो जांच जरूर कराएं। कई बार इस तरह की दिक्कतें नींद की कमी, तनाव और दूसरी समस्याओं के कारण भी हो सकती हैं। लेकिन लगातार शारीरिक कमजोरी के साथ पढ़ाई प्रभावित हो रही हो तो एनीमिया के जोखिमों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।




