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FSSAI की मानसून सेफ्टी गाइडलाइंस: किचन, कुकिंग और पर्सनल हाइजीन से लेकर बच्चों की हेल्थ तक के जरूरी टिप्स

Monsoon Safety Tips 2026: बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अपने साथ खानपान और साफ-सफाई से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं का रिस्क भी लेकर आता है। मानसून में हवा में नमी (Humidity) बढ़ने के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। यही कारण है कि इस मौसम में फूड पॉइजनिंग, दस्त, उल्टी और स्टमक इन्फेक्शन (पेट के संक्रमण) के मामले अचानक बढ़ जाते हैं।

इस मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ी बीमारी की वजह बन सकती है। ऐसे में लोगों को सुरक्षित रखने के लिए ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया’ (FSSAI) ने मानसून स्पेशल फूड सेफ्टी गाइडलाइन जारी की है।

FSSAI की मानसून सेफ्टी गाइडलाइंस: किचन, कुकिंग और पर्सनल हाइजीन से लेकर बच्चों की हेल्थ तक के जरूरी टिप्स

FSSAI की गाइडलाइन: क्या करें और क्या न करें?

FSSAI ने अपनी गाइडलाइन में मुख्य रूप से पर्सनल हाइजीन, फूड स्टोरेज और किचन की साफ-सफाई पर खास ध्यान देने को कहा है:

हाथों की सफाई: खाना बनाने से पहले और बाद में हाथों को साबुन व साफ पानी से अच्छी तरह धोएं।

सैनिटाइजेशन: किचन की सतह (प्लेटफॉर्म) को नियमित सैनिटाइज करें और बर्तनों की अच्छे से सफाई करें।

फ्रिज का रखरखाव: फ्रिज को रेगुलर साफ करें और हर दो हफ्ते में इसे डिफ्रॉस्ट जरूर करें।

कुकिंग का नियम: खाना हमेशा अच्छी तरह पकाकर (Properly Cooked) ही खाएं। आधा पका भोजन न लें।

स्टोरेज: बचे हुए भोजन को बाहर देर तक न छोड़ें, उसे तुरंत फ्रिज में स्टोर करें।

मोबाइल से दूरी: खाना बनाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि फोन की स्क्रीन पर भारी मात्रा में बैक्टीरिया होते हैं।

फल और सब्जियां: फल-सब्जियों को हमेशा साफ बहते पानी से धोएं और खुद भी साफ कपड़े पहनें।

क्यों जरूरी है यह गाइडलाइन और मानसून में क्यों बढ़ता है बीमारियों का रिस्क?

विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश के दिनों में तापमान और नमी के उतार-चढ़ाव के कारण इंसानी शरीर की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर हो जाती है। इसके अलावा इन्फेक्शन बढ़ने के 5 मुख्य कारण हैं:

बारिश का पानी जमना: रुका हुआ पानी डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के मच्छरों को पनपने की जगह देता है।

कीटाणुओं की ग्रोथ: हवा की नमी बैक्टीरिया और फंगस के लिए अनुकूल माहौल बनाती है।

दूषित खाना और पानी: बारिश का पानी सीवर और कचरे के संपर्क में आकर दूषित होता है, जिससे सप्लाई का पानी और खुला खाना आसानी से संक्रमित हो जाता है।

धूप की कमी: मानसून में धूप कम निकलने के कारण वातावरण में मौजूद रोगाणु लंबे समय तक जीवित रहते हैं।

FSSAI का ‘हाइजीन मंत्र’: इन श्रेणियों में रखें सफाई

स्वस्थ रहने के लिए FSSAI ने हाइजीन को मुख्य रूप से इन जरूरी कैटेगरीज में बांटा है, जिस पर हर परिवार को ध्यान देना चाहिए:

किचन हाइजीन: बारिश में किचन में नमी जल्दी जमा होती है। अगर सिंक, किचन प्लेटफॉर्म, ड्रेन (नाली) और कूड़ेदान की रेगुलर सफाई न हो, तो फूड कंटैमिनेशन (भोजन का दूषित होना) का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए किचन को हमेशा साफ और सूखा रखें।

फूड व कुकिंग हाइजीन: भोजन को सही तापमान पर पकाना और ढककर रखना।

वाटर व होम हाइजीन: पीने के लिए उबले या फिल्टर पानी का इस्तेमाल और घर के कोनों की सफाई।

पर्सनल व चाइल्ड हाइजीन: बच्चों के खानपान के बर्तनों और उनकी शारीरिक स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना, क्योंकि बच्चों की इम्युनिटी बड़ों से कम होती है।

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