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Hair Problems: कमजोर और पतले हैं आपके बाल? जानिए क्या है इसका इलाज

Hair Problems: क्या आप भी बालों की समस्या से परेशान हैं? महंगे शैंपू, सीरम, हेयर ऑयल खरीदकर सोचा कि अब बालों का झड़ना और पतला होना रुक जाएगा? शुरुआत में थोड़ा फर्क महसूस भी हुआ होगा, लेकिन कुछ महीनों बाद फिर वही कहानी, बाल पहले से ज्यादा पतले, कमजोर और बेजान दिखने लगे। ऐसे में सबसे पहला सवाल यही आता है कि आखिर इतनी महंगी चीजें इस्तेमाल करने के बाद भी बाल ठीक क्यों नहीं हो रहे? असल में यहीं सबसे बड़ी गलतफहमी छिपी हुई है। हमें वर्षों से यही बताया गया है कि सही हेयर प्रोडक्ट चुन लेंगे तो बालों की हर समस्या खत्म हो जाएगी। लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। अगर बालों के पतले होने की वजह शरीर के अंदर छिपी है, तो बाहर से लगाया गया कोई भी प्रोडक्ट उस असली वजह तक पहुंच ही नहीं सकता।

बालों की समस्याओं की जड़ को समझिए | Hair Problems

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बाल सिर्फ सिर की त्वचा पर उगने वाले रेशे नहीं हैं, बल्कि हर बाल एक छोटे से जीवित हेयर फॉलिकल (बाल बनाने वाली जड़) से निकलता है। यही फॉलिकल तय करता है कि नया बाल कितना मजबूत या मोटा होगा और कितने समय तक सिर पर टिकेगा? अगर यही जड़ कमजोर होने लगे, तो चाहे आप दुनिया का सबसे महंगा शैंपू इस्तेमाल कर लें, समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। दिलचस्प बात यह है कि कई बार बालों के पतले होने की शुरुआत उस समय होती है, जब हमें लगता है कि सब कुछ सामान्य चल रहा है। लगातार तनाव, शरीर में आयरन या विटामिन की कमी, हार्मोन का बिगड़ना, थायरॉयड की समस्या या आनुवंशिक कारण धीरे-धीरे बालों की जड़ों को प्रभावित करते रहते हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ कहते हैं कि बालों का इलाज सिर्फ महंगे प्रोडक्ट खरीदने से नहीं, बल्कि सही कारण पता लगाने से शुरू होता है।

क्या कहते हैं डॉक्टर? | Hair Problems

बालों की कमजोरी या इसके झड़ने के पीछे असल समस्या यह नहीं है कि आपने गलत ब्रांड या गलत प्रोडक्ट चुना है। समस्या यह है कि बालों का पतला होना शरीर के अंदर होने वाली जैविक (बायोलॉजिकल) प्रक्रिया से जुड़ा होता है। बाहर से लगाया जाने वाला कोई भी प्रोडक्ट उस जगह तक पहुंच ही नहीं सकता, जहां से यह समस्या शुरू होती है। हर बाल की जड़ के नीचे एक हेयर फॉलिकल होता है। इसे आसान भाषा में समझें तो यह बाल बनाने वाली एक छोटी-सी जीवित संरचना होती है। यही तय करती है कि बाल कितने मजबूत, मोटे और लंबे समय तक बढ़ेंगे।

शरीर में हार्मोन का संतुलन, पोषक तत्वों की मात्रा, शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और आनुवंशिकता जैसी कई चीजों का इसपर असर होता है। अगर शरीर में फेरिटिन लेवल कम हो जाए या थायरॉयड ठीक से काम न करे, पुरुष हार्मोन (एंड्रोजन) का स्तर बढ़ जाए या व्यक्ति लंबे समय तक तनाव में रहे, तो बालों की जड़ों को ऐसे सिग्नल मिलने लगते हैं जिससे बालों का ग्रोथ फेज छोटा हो जाता है। इससे जो बाल उगते हैं, वे पहले की तुलना में पतले और कमजोर होते हैं। यह प्रक्रिया हर नए हेयर साइकल में होती है और धीरे-धीरे पूरे सिर के बाल पतले दिखाई देने लगते हैं।

ज्यादा स्ट्रेस लेना भी बालों का दुश्मन | Hair Problems

लोगों में लगातार बढ़ता मानसिक तनाव भी बालों के पतले होने का एक बड़ा कारण माना जाता है, ज्यादातर लोग इसे समझ नहीं पाते। स्टेम सेल रिव्यूज एंड रिपोर्ट्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, लगातार तनाव रहने पर हेयर फॉलिकल की स्टेम सेल्स (विशेष कोशिकाएं जो नए बाल बनने की प्रक्रिया शुरू करती हैं) में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज यानी हानिकारक अणुओं की मात्रा बढ़ जाती है। ये अणु इन कोशिकाओं के डीएनए और माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचाते हैं। जब स्टेम सेल्स ठीक से काम नहीं कर पातीं, तो नए बाल बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है।

ये लिंक भी समझिए | Hair Problems

लंबे समय तक तनाव रहने से बालों की जड़ों के आसपास मौजूद लिम्फेटिक सिस्टम (जो शरीर से सूजन और अपशिष्ट पदार्थ हटाने में मदद करता है) भी प्रभावित होता है। इससे सूजन कम करने की प्राकृतिक प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और बालों की जड़ों को दोबारा सक्रिय होकर नए बाल बनाने के लिए अनुकूल वातावरण नहीं मिल पाता। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तनाव होने के तुरंत बाद बाल नहीं झड़ते। अक्सर इसका असर दो से चार महीने बाद दिखाई देता है। यही वजह है कि अधिकांश लोगों को अपने बालों के झड़ने का कारण समझ ही नहीं आता है।

न्यूट्रिशन की कमी भी हो सकती है कारण | Hair Problems

डॉक्टर कहते हैं, शरीर में कुछ जरूरी पोषक तत्वों की कमी से भी बाल झड़ने लगते हैं। सामान्य ब्लड टेस्ट में अक्सर सिर्फ हीमोग्लोबिन देखा जाता है, जबकि फेरिटिन की जांच नहीं होती। इसी तरह विटामिन डी, विटामिन बी12 और जिंक की जांच भी आमतौर पर तभी कराई जाती है जब डॉक्टर अलग से लिखें। ऐसा भी हो सकता है कि डॉक्टर आपकी रिपोर्ट देखकर कह दें कि सब कुछ सामान्य है, लेकिन वास्तव में शरीर में फेरिटिन का स्तर इतना कम हो कि उससे बालों की जड़ें प्रभावित हो रही हों। यानी नॉर्मल’ रिपोर्ट का मतलब हमेशा बालों के लिए पर्याप्त होना नहीं होता। ऐसे लोगों में बालों के झड़ने और पतलेपन के कारणों को समझने के लिए ट्राइकोस्कोपी (विशेष कैमरे से बालों और उनकी जड़ों की बारीकी से जांच) और  कुछ जरूरी ब्लड टेस्ट कराए जाते हैं।

सही कारणों को समझने और इसके आधार पर इलाज की मदद से समस्या को ठीक किया जा सकता है। यदि बालों के फॉलिकल अभी जीवित हैं और समय रहते इलाज शुरू कर दिया जाए, तो परिणाम काफी बेहतर मिल सकते हैं। लेकिन अगर वर्षों तक केवल हेयर प्रोडक्ट बदलते रहे और सही जांच नहीं कराई, तो कई फॉलिकल स्थायी रूप से निष्क्रिय हो सकते हैं। इसलिए सही समय पर जांच और इलाज शुरू करना बेहद महत्वपूर्ण है।

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