बुजुर्गों की सेहत के लिए कितनी खतरनाक है शरीर में जमा चर्बी? जानिए इसे घटाने का सबसे असरदार तरीका

Seniors Weight Loss & Fat Burn Tips: अच्छी सेहत और दीर्घायु के लिए वजन को नियंत्रित रखना सबसे जरूरी माना जाता है। शरीर में अतिरिक्त चर्बी (Fat), खासकर पेट के आसपास जमा फैट, कई गंभीर बीमारियों की मुख्य वजह बनता है। बढ़ती उम्र में यह समस्या और भी जटिल हो जाती है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की ताकत घटती है, हड्डियां कमजोर होती हैं और शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता (Metabolism) धीमी पड़ जाती है।
ऐसे में बुजुर्गों के पेट और शरीर के अन्य हिस्सों में जमा अतिरिक्त चर्बी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक और जोड़ों के दर्द (Arthritis) का खतरा कई गुना बढ़ा देती है।
बुजुर्गों में फैट बढ़ने से जुड़ी समस्याएं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वजन और फैट ज्यादा होने से बुजुर्गों को चलने-फिरने, सीढ़ियां चढ़ने और दैनिक कामकाज करने में काफी परेशानी होती है। इसके अलावा, शरीर में अत्यधिक वसा होने से नींद का पैटर्न खराब होता है (जैसे स्लीप एप्निया) और शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है। इसलिए उम्रदराज लोगों के लिए वजन और फैट को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
हालिया अध्ययन का खुलासा: HIIT व्यायाम है सबसे ज्यादा प्रभावी
ऑस्ट्रेलिया की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ द सनशाइन कोस्ट’ द्वारा किए गए छह महीने के एक अध्ययन में पाया गया कि बुजुर्गों में शरीर का फैट घटाने और मांसपेशियों (Muscles) को सुरक्षित रखने में हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) सबसे ज्यादा प्रभावी है।
यह अध्ययन प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल ‘मेटुरिटास’ (Maturitas) में प्रकाशित हुआ है:
अध्ययन का दायरा: ऑस्ट्रेलिया के ग्रेटर ब्रिस्बेन क्षेत्र के 123 स्वस्थ बुजुर्गों (औसत उम्र 72 वर्ष) पर यह शोध किया गया।
रिसर्च के नतीजे: जिन बुजुर्गों ने हफ्ते में 3 दिन 45 मिनट के लिए HIIT वर्कआउट किया, उनके शरीर का फैट तेजी से कम हुआ और उनकी मांसपेशियां (Lean Tissue) भी मजबूत रहीं।
मध्यम व्यायाम का असर: इसके विपरीत, केवल हल्की या मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम करने वालों का फैट तो घटा, लेकिन उनके लीन टिश्यूज (मांसपेशियों का द्रव्यमान) में भी कमी आई, जो बुजुर्गों के लिए सही नहीं माना जाता।
क्या है ‘हाई–इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग‘ (HIIT)?
HIIT एक विशेष वर्कआउट तकनीक है, जिसमें कम समय के लिए बहुत तेज गति से एक्सरसाइज की जाती है और फिर थोड़ी देर आराम या हल्की गतिविधि की जाती है।
उदाहरण: कुछ सेकंड के लिए बहुत तेज गति से साइकिल चलाना या तेज दौड़ना/चलना, और फिर उसके बाद कुछ समय धीमी गति से चलना।
फायदे: HIIT करने से कम समय में ज्यादा कैलोरी बर्न होती है, दिल की कार्यक्षमता (Heart Functioning) सुधरती है, स्टैमिना बढ़ता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है।
विशेषज्ञों की जरूरी चेतावनी
अध्ययन में भले ही HIIT के बेहतरीन फायदे देखे गए हों, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यह वर्कआउट हर बुजुर्ग के लिए सीधा शुरू करना सुरक्षित नहीं है:
डॉक्टरी सलाह अनिवार्य: पहले से दिल की बीमारी, जोड़ों के गंभीर दर्द या अन्य क्रॉनिक बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों को डॉक्टर या फिटनेस एक्सपर्ट की देखरेख में ही इसे शुरू करना चाहिए।
चोट का खतरा: बिना सलाह या सही तकनीक के अचानक बहुत तेज वर्कआउट शुरू करने से हार्ट रेट अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है और मांसपेशियों व हड्डियों में गंभीर चोट आ सकती है।



