KGMU: प्रो. डॉ. नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने किया जटिल ऑपरेशन सफल


KGMU: हरदोई निवासी 75 वर्षीय राधिका, जो करीब एक महीने से गिरने के कारण लगी चोट के बाद बिस्तर पर थीं, को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ में सफल ऑपरेशन के बाद दोबारा चलने-फिरने की नई उम्मीद मिली है। करीब एक माह पहले जमीन पर फिसलकर गिरने से उनके दाहिने पैर की जांघ की हड्डी (डिस्टल फीमर) में फ्रैक्चर हो गया था। शुरुआत में चोट की गंभीरता का पता न चलने के कारण वह लगभग 20 दिनों तक घर पर ही दर्द निवारक दवाइयाँ लेती रहीं। बाद में एक्स-रे कराने पर फ्रैक्चर का पता चला। फ्रैक्चर की जटिलता को देखते हुए हरदोई जिला अस्पताल से उन्हें बेहतर उपचार के लिए केजीएमयू रेफर किया गया। विस्तृत जाँच में पता चला कि जांघ की हड्डी का निचला हिस्सा काफी क्षतिग्रस्त था और हड्डी की गुणवत्ता भी कमजोर थी। मरीज की अधिक उम्र तथा हड्डी को हुए व्यापक नुकसान को देखते हुए सामान्य तरीके से प्लेट लगाकर फ्रैक्चर ठीक करना चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में मरीज के उपचार के लिए डिस्टल फीमोरल मेगाप्रोस्थेसिस लगाने का निर्णय लिया गया। इस जटिल मामले की जिम्मेदारी केजीएमयू के प्रोफेसर एवं आर्थ्रोप्लास्टी तथा जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपनी टीम के साथ संभाली। उनकी टीम में डॉ. रवि (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. अश्विन एवं डॉ. शशांक (जूनियर रेजिडेंट) शामिल रहे। टीम ने 29 अक्टूबर 2026 को अत्यंत चुनौतीपूर्ण मेगाप्रोस्थेसिस सर्जरी सफलतापूर्वक सम्पन्न की।
मरीज का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक सम्पन्न
जटिल ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. शशांक कन्नौजिया (एडिशनल प्रोफेसर) तथा उनकी टीम में शामिल डॉ. उजमा (जूनियर रेजिडेंट) एवं डॉ स्वीकृति (जूनियर रेजिडेंट) ने संभाली। उनकी टीम ने पूरे ऑपरेशन को सुरक्षित एवं सुचारू रूप से सम्पन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आखिरकार चिर-प्रतीक्षित सफलता मिली। करीब एक महीने तक बिस्तर पर रहने के बाद मरीज का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। वर्तमान में मरीज की हालत स्थिर है और उन्होंने ऑपरेशन के बाद घुटने की मूवमेंट (नी मोबिलाइजेशन) भी शुरू कर दी है। यह उनके दोबारा चलने-फिरने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस उपचार की एक विशेष उपलब्धि यह भी रही कि पूरी सर्जरी आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पूरी तरह कैशलेस की गई। जिससे उन्हें बिना किसी आर्थिक बोझ के अत्याधुनिक एवं विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो सका। केजीएमयू के आर्थोपेडिक्स विभाग ने एक बार फिर जटिल से जटिल मामलों के सफल उपचार में अपनी विशेषज्ञता और प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। विभाग ने न केवल एक बुजुर्ग मरीज को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया, बल्कि उन्हें दोबारा चलने-फिरने और सामान्य जीवन की ओर लौटने की नई उम्मीद भी दी है।



