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Lucknow: विकास नगर अग्नि-प्रभावित बस्ती में इंटीग्रल विश्वविद्यालय ने पहुँचाई राहत

Lucknow: राजधानी लखनऊ के विकास नगर स्थित झुग्गी बस्ती में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड ने सैकड़ों परिवारों को बेघर और बेसहारा कर दिया। जब आग की लपटें शांत हुईं, तो पीछे छूट गईं केवल राख, टूटे सपने और असहाय चेहरे। ऐसे विकट समय में जब ये परिवार आसमान के नीचे दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज थे, इंटीग्रल विश्वविद्यालय, लखनऊ के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग ने संवेदना और सेवा का परिचय देते हुए इन पीड़ितों तक समय पर राहत पहुँचाई।

कुलाधिपति के संरक्षण में हुई सार्थक पहल

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. एस. डब्ल्यू. अख्तर के प्रेरक संरक्षण एवं दूरदर्शी मार्गदर्शन में आयोजित इस विस्तार गतिविधि ने यह सिद्ध किया कि उच्च शिक्षा के संस्थान केवल डिग्रियाँ बाँटने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज की धड़कन को भी महसूस करते हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम की तैयारी में पूरा सहयोग प्रदान किया और यह सुनिश्चित किया कि पीड़ितों तक राहत सामग्री शीघ्रता एवं व्यवस्थित रूप से पहुँचे।

विभागाध्यक्ष प्रो. जेबा आकिल के कुशल, संवेदनशील और प्रेरणादायी नेतृत्व में विभाग की पूरी टीम एकजुट हुई। उन्होंने न केवल इस गतिविधि को अकादमिक दायित्व के रूप में लिया, बल्कि इसे एक मानवीय कर्तव्य के रूप में भी स्वीकार किया। उनकी प्रेरणा से शिक्षक और विद्यार्थी दोनों उत्साहपूर्वक इस अभियान का हिस्सा बने। मानविकी और सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई तब सार्थक होती है जब वह सैद्धांतिक कक्षाओं से निकलकर समाज की ज़मीन पर उतरे। आज हमारे विद्यार्थियों ने जो सीखा है, वह किसी पाठ्यपुस्तक से नहीं मिलता — यह जीवन की पाठशाला है।”

Lucknow: विकास नगर अग्नि-प्रभावित बस्ती में इंटीग्रल विश्वविद्यालय ने पहुँचाई राहत

डॉ. तबिंदा अंजुम इस पहल की असली धुरी

इस संपूर्ण कार्यक्रम की रीढ़ रहीं डॉ. तबिंदा अंजुम, जिन्होंने इस विस्तार गतिविधि की योजना बनाने से लेकर उसके सफल क्रियान्वयन तक हर कदम पर अथक परिश्रम किया। उन्होंने पहले बस्ती का दौरा कर प्रभावित परिवारों की संख्या और आवश्यकताओं का आकलन किया, फिर भोजन की व्यवस्था, टीम का समन्वय और वितरण की पूरी रणनीति तैयार की। डॉ. अंजुम की कार्यशैली की विशेषता यह रही कि उन्होंने इस कार्यक्रम को केवल एक औपचारिक गतिविधि नहीं बनने दिया — उन्होंने टीम को प्रेरित किया कि वे हर पीड़ित के पास जाकर, उनसे बात करके, उनका दर्द सुनकर राहत सामग्री प्रदान करें। यही मानवीय स्पर्श इस पूरे कार्यक्रम को भीड़ से अलग बनाता है। सहयोगी शिक्षकों ने उनके बारे में कहा — “डॉ. तबिंदा जी ने इस कार्यक्रम में अपनी पूरी आत्मा डाल दी। उनका उत्साह और समर्पण हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बना।”

विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की है कि इस प्रकार की सामुदायिक विस्तार गतिविधियाँ भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित की जाती रहेंगी, ताकि विद्यार्थियों में नागरिक बोध, सेवाभाव और सामाजिक संवेदनशीलता का निरंतर विकास होता रहे। कार्यक्रम के समापन पर विभागाध्यक्ष प्रो. जेबा आकिल, डॉ. तबिंदा अंजुम, समस्त शिक्षकगण एवं विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से हार्दिक बधाई एवं प्रशंसा व्यक्त की गई। यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि जब ज्ञान, करुणा और कर्तव्यबोध एक साथ चलते हैं — तो समाज बदलता है, और इतिहास बनता है।

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