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Mouth Ulcer: बार-बार छाले होना नहीं है सामान्य! इनगंभीर बीमारियों का है संकेत

Mouth Ulcer: मुंह में छाले होना एक आम समस्या है, जो अक्सर कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन यदि आपके मुंह में बार-बार छाले हो रहे हैं या लंबे समय तक बने रहते हैं, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। हर किसी को ये समझने की जरूरत है कि बार-बार होने वाले मुंह के छाले केवल मसालेदार भोजन, तनाव या विटामिन की कमी की वजह से ही नहीं होते, बल्कि कई बार यह शरीर में छिपी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी संकेत हो सकते हैं। यदि छालों के साथ तेज दर्द, बुखार, वजन कम होना या बार-बार संक्रमण जैसी समस्याएं भी दिखाई दें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। आइए जानते हैं कि मुंह में बार-बार छाले किन बीमारियों का संकेत हो सकते हैं और उनसे बचाव के लिए क्या करना चाहिए। मुंह में बार-बार छाले किन बीमारियों का संकेत हो सकते हैं?

विटामिन B12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी | Mouth Ulcer

शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी का असर सबसे पहले कई बार मुंह और त्वचा पर दिखाई देता है। विटामिन B12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी होने पर मुंह के अंदर की त्वचा कमजोर हो सकती है, जिससे बार-बार छाले होने की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा जीभ में जलन, मुंह का स्वाद बदलना, कमजोरी, थकान, चक्कर आना और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। इनकी कमी को पूरा करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अंडे, दूध, मांस, मछली और ड्राई फ्रूट्स को डाइट में शामिल किया जा सकता है।

पाचन संबंधी बीमारियां | Mouth Ulcer

अगर मुंह में बार-बार छाले हो रहे हैं, तो कई बार इसका संबंध पाचन तंत्र से भी हो सकता है। सीलिएक डिजीज, क्रोहन डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी बीमारियों में शरीर पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता। इसके कारण विटामिन और मिनरल्स की कमी हो सकती है, जिससे मुंह में छाले बनने लगते हैं। सीलिएक डिजीज में ग्लूटेन नामक प्रोटीन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया के कारण छोटी आंत प्रभावित होती है। वहीं क्रोहन डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस आंतों में सूजन पैदा करने वाली बीमारियां हैं। इन समस्याओं के साथ पेट दर्द, दस्त, गैस, वजन कम होना और भूख में कमी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

कमजोर इम्यून सिस्टम | Mouth Ulcer

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में मुंह में बैक्टीरिया या वायरस का प्रभाव बढ़ सकता है, जिससे बार-बार छाले होने की समस्या हो सकती है। कमजोर इम्यूनिटी के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे लंबे समय तक तनाव, नींद की कमी, खराब खानपान, कुछ गंभीर बीमारियां या लंबे समय तक चलने वाली दवाएं। जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनमें छाले जल्दी ठीक नहीं होते और बार-बार दोबारा हो सकते हैं।

डायबिटीज | Mouth Ulcer

डायबिटीज यानी शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाना भी मुंह की समस्याओं का कारण बन सकता है। जब ब्लड शुगर लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहता, तो शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो सकती है। इससे मुंह में बैक्टीरियल या फंगल संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है और छाले या घाव आसानी से बन सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों में मुंह का सूखापन, मसूड़ों से जुड़ी समस्याएं, बार-बार संक्रमण और घाव भरने में देरी जैसी परेशानियां भी देखी जा सकती हैं।

ऑटोइम्यून रोग | Mouth Ulcer

कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से अपने ही स्वस्थ ऊतकों पर हमला करने लगता है। ऐसी स्थिति में मुंह में बार-बार छाले होना एक लक्षण हो सकता है। बेहसेट सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है जिसमें बार-बार मुंह के छाले, जननांगों में घाव और आंखों में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं ल्यूपस जैसी बीमारी में भी मुंह के अंदर घाव या छाले दिखाई दे सकते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करें? | Mouth Ulcer

  • छाले 2 सप्ताह से अधिक समय तक रहें

  •  बार-बार छाले निकलें

  • खाने-पीने में ज्यादा दर्द हो

  •  बुखार या वजन कम होने लगे

  •  मुंह में सफेद या लाल धब्बे दिखाई दें

  • ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

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