इस गंभीर बीमारी से हुई तबला वादक Zakir Hussain की मौत, कहीं आपमें भी तो नहीं दिखे ऐसे संकेत?

Zakir Hussain Passed Away: विश्वविख्यात तबला वादक और पद्म विभूषण से सम्मानित जाकिर हुसैन का सोमवार (16 दिसंबर) को निधन हो गया। इस खबर ने दुनियाभर में उनके प्रशंसकों को गमगीन कर दिया। परिवार की तरफ से साझा की गई जानकारियों के अनुसार, वह अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक अस्पताल में भर्ती थे। वह लंबे समय से इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (Idiopathic Pulmonary Fibrosis) नामक बीमारी और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं से पीड़ित थे।

क्या है इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस बीमारी? (What is Idiopathic Pulmonary Fibrosis Disease?)
इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) फेफड़ों में होने वाली एक क्रोनिक बीमारी है, जिसकी वजह से समय के साथ सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है और कई अन्य प्रकार की जटिलताएं होने लगती हैं। इस बीमारी के कारण फेफड़ों में स्कार टिशू (फाइब्रोसिस) बनने लगता है, जिस वजह आपके फेफड़े रक्तप्रवाह में ऑक्सीजन को प्रभावी ढंग पहुंचाने में कठिनाई महसूस करते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि फेफड़ों की ये बीमारी किसी को भी हो सकती है, इसलिए समय रहते इसके लक्षणों की पहचान करना और बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है।
महान तबला वादक की मौत जिस इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस बीमारी के कारण हुई है, वह 50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में बहुत आम है। ये इंटरस्टिशियल लंग डिजीज (ILD) का एक प्रकार है, जिसकी वजह से फेफड़ों के ऊतक मोटे होने लगते हैं और इनमें फाइब्रोसिस की दिक्कत हो सकती है। फाइब्रोसिस की वजह से रक्त प्रवाह में ऑक्सीजन रिलीज करना और शरीर के बाकी हिस्सों में पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाना फेफड़ों के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि आनुवांशिकता और दिनचर्या से संबंधित कारक इस बीमारी की वजह हो सकते हैं।
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कैसे जानें कहीं आपको भी तो नहीं है ये बीमारी?
हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को फेफड़ों की गंभीर बीमारी रही हो, उन्हें विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है। अमेरिकन लंग्स एसोसिएशन (American Lungs Association) के अनुसार, इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस के मुख्यरूप से दो लक्षण होते हैं, जिन पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
1. लंबे समय तक सूखी खांसी बने रहना- आईपीएफ वाले अधिकांश लोगों को 8 सप्ताह से अधिक समय तक खांसी बनी रहती है।
2. अक्सर सांस फूलना- अगर आपको अक्सर सांस फूलने की दिक्कत रहती है तो ये अलार्मिंग है। जैसे-जैसे फाइब्रोसिस की दिक्कत बढ़ती जाती है आपको आराम करते समय भी सांस लेने में कठिनाई का अनुभव हो सकता है।
इन लक्षणों के साथ मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, अक्सर थकान बने रहने, ऊर्जा की कमी महसूस होना और बिना स्पष्ट कारण के वजन कम होना भी इस बीमारी की संकेत हो सकता है।

इस बीमारी का कारण क्या है?
हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कई मामलों में डॉक्टर यह पता नहीं लगा पाते हैं कि व्यक्ति को ये बीमारी क्यों हुई है? जब बीमारी का कारण पता नहीं चलता है तो फाइब्रोसिस को “इडियोपैथिक” कहा जा सकता है। जाकिर हुसैन को भी इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस की समस्या थी, जिसका मतलब है कि डॉक्टर्स को उनमें बीमारी का स्पष्ट कारण पता नहीं था।
अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों में इस बीमारी की फैमिली हिस्ट्री रही है या जो लोग धूम्रपान करते हैं, उनमें आईपीएफ होने का जोखिम अधिक देखा जाता है। इसके अलावा वायरल संक्रमण, वायु प्रदूषण जैसी स्थितियां भी इसे बढ़ावा दे सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, धूम्रपान फेफड़ों की कई गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण है इसलिए इससे दूरी बनाना सबसे जरूरी है।

पल्मोनरी फाइब्रोसिस से कैसे बचें?
डॉक्टर कहते हैं कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों से बचाव के लिए कुछ बातों पर निरंतर ध्यान देते रहना और बचाव के उपाय करना जरूरी है।
धूम्रपान से दूरी बनाना आपको पल्मोनरी फाइब्रोसिस सहित फेफड़ों की कई गंभीर बीमारियों से बचा सकता है। चूंकि, सेकेंड हैंड स्मोकिंग भी आपके फेफड़ों के लिए हानिकारक है, इसलिए धूम्रपान करने वाले लोगों के आस-पास रहने से बचें।
जो चीजें आपके फेफड़ों के लिए दिक्कतें बढ़ाती हैं उनसे भी दूर बनाएं। रसायनों से निकलने वाले धुएं, इनडोर प्रदूषकों के कारण भी फेफड़ों में जलन हो सकती है। इनसे बचाव करें।
फेफड़ों की बीमारी से बचने और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान में सुधार करें। एंटी-इंफ्लेमेटरी चीजों का सेवन करें।
नियमित व्यायाम करना, जैसे वॉक करना या साइकिलिंग आपके लिए बहुत लाभकारी है।
सर्दी-जुकाम और फ्लू जैसे श्वसन संक्रमण पल्मोनरी फाइब्रोसिस के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। इससे बचाव के लिए निमोनिया का टीका और सालाना फ्लू वैक्सीन के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।