वेब स्टोरीजस्पेशलिस्टस्वास्थ्य और बीमारियां

World Eye Donation Day 2025: मरने के बाद भी जिंदा रहेंगी आपकी आंखें

World Eye Donation Day 2025: विश्व नेत्रदान दिवस प्रति वर्ष 10 जून को मनाया जाता है। इस दिन नेत्रदान के महत्व बताकर उन्हें मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने की शपथ लेने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे मरने के बाद भी आपकी आंखें दुनिया देख सकें। नेत्रदान को बढ़ावा देकर ही लोगों की अंधकारमय जिंदगी में ज्यादा से ज्यादा रोशनी लाई जा सकती है। यह बात एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के ऑप्थेल्मोलॉजी विभाग की एचओडी डॉक्‍टर नीलिमा मेहरोत्रा ने कही। उन्‍होंने कहा कि दृष्टिहीनता प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। कॉर्निया की बीमारियां, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के बाद होने वाली दृष्टि हानि और अंधापन के प्रमुख कारणों में से एक हैं। स्मार्टफोन का ज्यादा इस्तेमाल भी इसमें एक नई वजह बन कर सामने आ रहा है। अधिकतर मामलों में दृष्टि की हानि को ‘नेत्रदान’ से ठीक किया जा सकता है।

डॉक्‍टर नीलिमा ने बताया कि  किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके विभिन्न अंगों को दान किया जा सकता हैं और उन अंगों को उन रोगियों में प्रत्यारोपित किया जाता है, जिन्हें उनकी जरूरत हो। ‘आंख’ भी ऐसा ही एक अंग है। मृत्यु के बाद नेत्रदान से कार्निया रहित अंधा व्यक्ति शल्य प्रक्रिया के माध्यम से कार्निया प्रत्यारोपण द्वारा फिर से देख सकता है, जिसमें क्षतिग्रस्त कॉर्निया की जगह पर नेत्रदाता के स्वस्थ कॉर्निया को प्रतिस्थापित किया जाता है। लोगों को नेत्रदान के प्रति ज्यादा से जागरूक करना ही विश्व नेत्रदान दिवस का मकसद है। डॉक्‍टर नीलिमा मेहरोत्रा ने नेत्र दान से संबंधित प्रमुख सवालों के दिए जवाब:

सवाल- मुझे नेत्र दान क्यों करना चाहिए?

जवाब- नेत्र दान एक नेक काम है। ऐसा कर आप दो या अधिक लोगों के जीवन में उजाला ला सकते हैं।

सवाल- नेत्रदान कौन कर सकता है?

जवाब- कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी उम्र, लिंग, रक्त समूह और धर्म का हो, नेत्रदान कर सकता है। लेंस या चश्मे का उपयोग करने वाले व्यक्ति या जिन व्यक्तियों की आंखों की सर्जरी हुई हो भी नेत्रदान कर सकते हैं। कमज़ोर दृष्टि नेत्रदान में बाधा नहीं है।

सवाल- मैं मधुमेह से पीड़ित हूं, तो क्या मैं भी नेत्र दान कर सकता हूं?

जवाब- मधुमेह, उच्च रक्तचाप या अस्थमा से पीड़ित रोगी भी अपनी आंखें दान कर सकते हैं। मोतियाबिंद से पीड़ित रोगी भी अपनी आंखें दान कर सकते हैं।

सवाल- कौन लोग नहीं कर सकते नेत्रदान?

जवाब- एड्स, हेपेटाइटिस बी या सी, रेबीज जैसे संक्रमण से पीड़ित व्यक्तियों के नेत्र प्रत्यारोपण के लिए उपयोग में नहीं लाये जाते।

सवाल- मृत्यु के बाद कितनी देर तक नेत्र दान हो सकता है?

जवाब- मृत्यु के चार घंटे के भीतर नेत्रदान ज्यादा बेहतर है। लेकिन, फिर भी मृत्यु के छह से आठ घंटे तक कॉर्निया सही होती है। इस अवधि तक नेत्रदान हो सकता है।

सवाल- नेत्रदान करने से क्या व्यक्ति का चेहरा ख़राब हो जाता हैं?

जवाब- यह केवल एक मिथक है। नेत्रदान से व्यक्ति का चेहरा ख़राब नहीं होता। कॉर्निया का निकाला जाना किसी भी तरह की विकृति का कारण नहीं है। इससे कोई विकृति नहीं दिखती।

सवाल- मैं अपनी आंखें कैसे दान कर सकता हूं?

जवाब- नेत्र दान के लिए आपको शपथ पत्र भरना चाहिए, जिसे अपने नज़दीकी नेत्र बैंक को भेजना होगा। एक बार नेत्र दाता के तौर पर पंजीकृत होने के बाद आपको नेत्रदाता कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। यदि नेत्र दान का फार्म नहीं भरा है तो भी नेत्र दान संभव है।

सवाल- मैं यह कैसे जान सकता हूं कि मुझे अपनी आँखें कहां दान करनी हैं?

जवाब- इसके लिए आप एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के आईबैंक के टोल फ्री नंबर 1919 या 0581-258200, 7900552000 पर कभी भी संपर्क कर सकते हैं। एसआरएमएस आई बैंक साल 2002 में आरंभ हुआ था। यहां 1500 से ज्यादा लोग नेत्रदान का शपथ पत्र भर चुके हैं।

सवाल- कितने व्यक्ति मेरे नेत्रदान से लाभान्वित हो सकते हैं?

जवाब- नेत्रदान से कम से कम दो व्यक्ति लाभान्वित हो सकते हैं। दानकर्ता की दोनों आंखें दो या इससे अधिक कॉर्निया से नेत्रहीन व्यक्तियों को लगाई जाती हैं। एसआरएमएस में कार्निया प्रत्यारोपण का काम भी उसी दिन कर लिया जाता है।

 सवाल- मैं अपनी आंखें कब दान कर सकता हूं?

जवाब- नेत्रदान की शपथ किसी भी उम्र में ली जा सकती है, लेकिन नेत्रदान केवल मृत्यु के बाद ही किया जा सकता है। शपथ लेने वाला व्यक्ति दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करता है।

सवाल- यदि मैं अपनी आँखें दान करता हूं, तो यह बात क्या दूसरों को मालूम होगी?

जवाब- नेत्रदाता और प्राप्तकर्ता दोनों की पहचान को गोपनीय रखा जाता है, इसलिए आपको अपनी पहचान के उजागर हो जाने के बारे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

सवाल- क्या नेत्र दाता के परिवार को किसी भी तरह का भुगतान या शुल्क मिलेगा?

जवाब- नहीं, मानव की आंखें, अंगों और ऊतकों को खरीदना व बेचना अवैध है। नेत्र प्रत्यारोपण के साथ जुड़े किसी भी तरह के खर्च का वहन नेत्र बैंक द्वारा किया जाता है।

सवाल- नेत्र दान की शपथत लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद क्या करना चाहिए?

जवाब- नेत्र दाता की पलकें बंद करें। पंखा बंद करें, एयर कंडीशनर ऑन रख सकते हैं। मृतक का सिर तकिए के नीचे रखकर थोड़ा ऊपर उठाएं। जल्द से जल्द अपने नजदीकी नेत्र बैंक के लिए 1919 पर संपर्क करें।

सवाल- क्या नेत्र दाता को अस्पताल ले जाने की जरूरत होगी?

जवाब- नहीं, आपको केवल एसआरएमएस आई बैंक से संपर्क करने की ज़रूरत है। यहां की टीम नेत्र दाता के निवास या अस्पताल, जहां नेत्र दाता की मृत्यु हुई है, वहां जाकर कार्निया निकाल लेगी।

सवाल क्या नेत्र दान करने के लिए कुछ अन्य औपचारिकताएं भी हैं?

जवाब- परिजनों की लिखित सहमति से दो गवाहों की उपस्थिति में ही नेत्र दान किया जा सकता है।

नेत्र दान न करने की वज़ह

आम जनता में जागरूकता का अभाव।

संस्थानों एवं अस्पतालों में अपर्याप्त सुविधाएं।

प्रशिक्षित कर्मियों के बीच दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता का अभाव।

सामाजिक एवं धार्मिक मिथक।

यह भी पढ़ें: मयूरासन… फिजिकल और मेंटल ताकत को बढ़ाने में सबसे ज्यादा मददगार

 नेत्र दान से संबंधित बातें 

स्त्री/पुरुष केवल अपनी मृत्यु के पश्चात ही नेत्रदान कर सकते हैं।

नेत्रदान से केवल कॉर्निया से नेत्रहीन व्यक्ति ही लाभान्वित हो सकते हैं।

कोई भी व्यक्ति चाहे, वह किसी भी उम्र, लिंग, या धर्म का हो, आंखें दान कर सकता है।

कॉर्निया को मृत्यु के एक से आठ घंटे के भीतर निकाला जाना चाहिए।

नेत्रदाता दो या इससे अधिक कार्निया से नेत्रहीन व्यक्तियों की दृष्टि बचा सकता है।

नेत्र निकालने में केवल 10 से 15 मिनट लगते हैं तथा चेहरे पर कोई निशान नहीं रहता।

दान की गई आंखों को खरीदा या बेचा नहीं जाता हैं, इसलिए नेत्रदान को नहीं न कहें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button