Diabetic Foot: ध्यान दें डायबिटीज मरीज, छोटी सी गलती से कट सकता है पैर


Diabetic Foot: डायबिटीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिससे देश में सभी उम्र के लोग प्रभावित देखे जा रहे हैं। आपके घर में, दोस्त या आसपास कोई न कोई इसका शिकार जरूर होगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्लड शुगर बढ़े रहने वाली ये बीमारी संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है, यही कारण है कि डॉक्टर इसे कंट्रोल में रखने वाले उपाय नियमित रूप से करते रहने की सलाह देते हैं। यहां समझना जरूरी है कि डायबिटीज सिर्फ शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर को अंदर ही अंदर कई तरीकों से नुकसान पहुंचाती है। अगर इसे समय पर कंट्रोल न किया जाए तो यह आंखों की रोशनी से लेकर किडनी और दिल तक को प्रभावित करती है। अक्सर शुगर बढ़े रहने की स्थिति कई बार इतनी चुनौतियां बढ़ाने वाली हो सकती हैं जिसमें रोगियों के पैर तक काटने पड़ सकते हैं। अब सवाल यह है कि डायबिटीज और पैरों का आपस में क्या संबंध है? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
हाई शुगर के कारण होने वाली दिक्कतें | Diabetic Foot
डॉक्टर बताते हैं, हाई शुगर की स्थिति शरीर के तमाम अंगों के लिए दिक्कतें बढ़ाने लगती है। जिस तरह से शुगर बढ़ने के कारण आंखों, किडनी पर असर होता है उसी तरह ये समय के साथ आपके शरीर के नसों को भी कमजोर और क्षतिग्रस्त करने लग जाती है। डायबिटीज के मरीजों में नसों की इस तरह की समस्या के कारण पैरों में रक्त का प्रवाह बाधित हो सकता है। इस समस्या को डायबिटिक फुट कहा जाता है। डायबिटिक फुट की समस्या पर अगर गंभीरता से ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण पैरों में अल्सर होने का खतरा रहता है, जिसके कारण पैर काटने तक भी पड़ सकते हैं।
डायबिटिक फुट और इसका खतरा | Diabetic Foot
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट कहती है कि डायबिटीज के करीब 25% मरीजों में जीवनकाल में कभी न कभी डायबिटिक फुट अल्सर होने का खतरा है। इनमें से बड़ी संख्या को समय रहते इलाज न मिलने पर पैर का हिस्सा गंवाना पड़ता है। डायबिटिक न्यूरोपैथी की समस्या जिसमें पैरों की नसों को नुकसान पहुंचने लगता है, इसके कारण अक्सर पैरों में दर्द, झुनझुनी और सुन्नता बनी रहती है। इसपर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो पैर की उंगलियां और अन्य हिस्सों में रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है जिससे कोशिकाएं डेड होने लग जाती है। पैरों पर काले धब्बे दिखना इसका संकेत है, शुगर बढ़े रहने के कारण ये अल्सर में बदलने लगते हैं। इस स्थिति में प्रभावित हिस्से को काटने तक की भी नौबत आ सकती है।

डायबिटिक फुट होता क्यों है? | Diabetic Foot
डॉक्टर बताते हैं, डायबिटिक फुट होने का सबसे बड़ा कारण है न्यूरोपैथी की समस्या। जब ब्लड शुगर लंबे समय तक हाई रहता है तो नसें कमजोर हो जाती हैं। इससे पैर में दर्द, गर्माहट या चोट का एहसास नहीं होता। मरीज को पता ही नहीं चलता कि पैर में घाव है। दूसरी ओर डायबिटीज से रक्त वाहिकाएं संकरी और कमजोर हो जाती हैं, जिससे पैर तक खून और ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंचते। नतीजतन, कोई भी छोटा सा घाव जल्दी भरता नहीं है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
डायबिटिक फुट से बचाव कैसे करें | Diabetic Foot
डॉक्टर बताते हैं, डायबिटिक फुट अल्सर वाले हर 5 में से 1 मरीज को पैर का कोई हिस्सा काटना पड़ सकता है। ऐसे मरीजों में पैरों के छोटे-छोटे छाले, कट या फटी एड़ियां भी गंभीर जख्म में बदल सकती हैं। इसपर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। पैर का जितना हिस्सा संक्रमित या खराब हो जाता है उसे सर्जरी करके हटाना पड़ सकता है। यदि आपके पैरों में घाव लगातार 2-3 हफ्तों में ठीक न हो, घाव से बदबू, मवाद आए या फिर पैरों का हिस्सा काला पड़ना शुरू हो जाए तो इसे तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। नियमित रूप से शुगर की जांच और इसे कंट्रोल रखने वाले उपाय, पैरों की देखभाल करके डायबिटिक फुट और इसकी जटिलताओं से बचा जा सकता है।





