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Diabetes: मरीजों को राहत, अब 325 में मिलेगी 11,000 वाली दवा

भारतीय कंपनियों ने लॉन्च किया सेमाग्लूटाइड का जेनेरिक वर्जन

Diabetes: देश में करोड़ों डायबिटीज और मोटापे से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर है। जो दवा कभी हर महीने ग्यारह हजार रुपये खर्च कराती थी, अब वही दो हजार रुपये से भी कम में उपलब्ध है — और कुछ विकल्पों में तो साप्ताहिक कीमत मात्र तीन सौ पच्चीस रुपये तक आ गई है।

क्या है यह दवा? | Diabetes

सेमाग्लूटाइड वह दवा है जो डेनमार्क की कंपनी नोवो नॉर्डिस्क की मशहूर दवाओं ओज़ेम्पिक और वेगोवी में इस्तेमाल होती है। यह दवा टाइप-२ डायबिटीज के नियंत्रण और वजन घटाने — दोनों में कारगर मानी जाती है। अब इसका पेटेंट खत्म होने के बाद भारतीय कंपनियों ने इसके किफायती जेनेरिक संस्करण बाजार में उतार दिए हैं।

किस कंपनी की दवा कितने में? | Diabetes

इक्कीस मार्च को सन फार्मास्यूटिकल, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, जाइडस लाइफसाइंसेज और ग्लेनमार्क सहित कई प्रमुख भारतीय फार्मा कंपनियों ने एक साथ इस दवा के जेनेरिक ब्रांड बाजार में उतारे। एल्केम लैबोरेटरीज के सेमासाइज़, ओबेसेमा और हेपाग्लाइड अठारह सौ रुपये से शुरू हो रहे हैं। सन फार्मा के नोवेलट्रीट और सेमाट्रिनिटी की साप्ताहिक लागत सात सौ पचास से दो हजार रुपये के बीच है। जाइडस का इलाज लगभग बाईस सौ रुपये प्रतिमाह पड़ता है, जबकि डॉ. रेड्डीज का ओबेडा करीब बयालीस सौ रुपये में उपलब्ध है। सबसे किफायती विकल्प ग्लेनमार्क का ग्लिपिक है, जिसकी साप्ताहिक लागत तीन सौ पच्चीस से चार सौ चालीस रुपये के बीच बताई जा रही है।

आगे और सस्ती होगी दवा | Diabetes

विशेषज्ञों का मानना है कि जल्द ही बाजार में पचास से अधिक जेनेरिक ब्रांड आ सकते हैं। जितनी ज्यादा प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, कीमतें उतनी ही और नीचे आएंगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ा बदलाव मान रहे हैं, जिससे डायबिटीज और मोटापे के इलाज को लेकर आम मरीजों की पहुँच पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी।

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