Food Safety: खाने की थाली बन रही मौत की वजह! WHO ने जारी की रिपोर्ट


Food Safety: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक नई रिपोर्ट ने फूड सेफ्टी को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, गंदे और खराब खाने की वजह से हर साल लाखों लोग बीमार पड़ रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों की जान भी जा रही है. वहीं सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि छोटे बच्चे इस खतरे का सबसे बड़ा शिकार बन रहे हैं. पांच साल से कम उम्र के बच्चों में खराब खाने से होने वाली बीमारियों का खतरा बड़े बच्चों और एडल्ट्स की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा है. दुनिया की कुल आबादी में इन बच्चों की हिस्सेदारी केवल 9 प्रतिशत है, लेकिन फूड बोर्न डिजीज के करीब एक-तिहाई मामले इन्हीं से जुड़े हैं.
छोटे बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा क्यों है? | Food Safety
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह ग्रो नहीं होता है. यही वजह है कि खराब खाने में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं. खराब खाने की वजह से होने वाली कई बीमारियां डायरिया से जुड़ी होती हैं. छोटे बच्चों के लिए डायरिया जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि इससे शरीर में पानी और जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है.
2021 में करोड़ों लोग हुए बीमार | Food Safety
रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ साल 2021 में खराब खाने की वजह से दुनिया भर में करीब 86.6 करोड़ लोग बीमार पड़े. वहीं लगभग 15 लाख लोगों की मौत हो गई. विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से बड़ी संख्या में मौतों और बीमारियों को रोका जा सकता था. अगर साफ पानी उपलब्ध हो, खाने को सही तरीके से तैयार और स्टोर किया जाए, साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए और समय पर इलाज मिल जाए तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
खाने में मौजूद केमिकल हैं इतने खतरनाक | Food Safety
अक्सर लोग सोचते हैं कि खराब खाने का मतलब सिर्फ बैक्टीरिया या वायरस से संक्रमण है, लेकिन WHO ने चेतावनी दी है कि खाने में मौजूद कुछ केमिकल भी बेहद खतरनाक हो सकते हैं, सीसा (Lead) और मिथाइलमरकरी जैसे केमिकल बच्चों के ग्रो हो रहे दिमाग को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे बच्चों के मानसिक विकास, सीखने की क्षमता और तंत्रिका तंत्र पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि केमिकल प्रदूषण को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसके प्रभाव कई बार लाइफटाइम बने रह सकते हैं.
फूड बोर्न डिजीज हुई मौतों में केमिकल सबसे बड़ा कारण कैसे है? | Food Safety
रिपोर्ट में बताया गया है कि खाने से जुड़ी बीमारियों के ज्यादातर मामले बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों की वजह से होते हैं, लेकिन मौतों के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार केमिकल प्रदूषण है. 2021 में खराब खाने से जुड़ी कुल मौतों में लगभग 73 प्रतिशत हिस्सेदारी केमिकल खतरों की रही. इनमें अकार्बनिक आर्सेनिक (Inorganic Arsenic) और सीसा सबसे बड़े कारण रहे. ये दोनों तत्व हार्ट डिजीज स्ट्रोक और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं. WHO के अनुसार, फूड बोर्न डिजीज हुई मौतों में करीब 42 प्रतिशत मामलों का संबंध अकार्बनिक आर्सेनिक से था, जबकि 31 प्रतिशत मौतें सीसे के संपर्क से जुड़ी थीं.
WHO ने क्या कहा? | Food Safety
WHO ने कहा कि फूड सेफ्टी कोई सामान्य मुद्दा नहीं है. यह हर फैमिली और हर दिन के खाने से जुड़ा हुआ विषय है. उन्होंने कहा कि खराब खाना लंबे समय से पब्लिक हेल्थ के लिए बड़ी चुनौती रहा है, लेकिन अब सामने आए नए आंकड़े यह दिखाते हैं कि इसका इंसानों और अर्थव्यवस्था पर कितना बड़ा असर पड़ रहा है. रिपोर्ट में दुनिया के कई क्षेत्रों के बीच बड़ी असमानता भी सामने आई है, हालांकि साल 2000 के बाद से फूड बोर्न डिजीज का कुल बोझ कुछ कम हुआ है, लेकिन अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया आज भी सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं. दुनिया भर में होने वाली लगभग 75 प्रतिशत फूड बोर्न डिजीज और करीब 60 प्रतिशत मौतें इन्हीं क्षेत्रों में दर्ज की गई हैं. खराब खाने असर सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है. WHO के अनुसार, 2021 में खराब खाने की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ. बीमारी के कारण लोगों के काम न कर पाने से दुनिया को लगभग 310 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रोडक्टिवीटी का नुकसान हुआ.
आगे और बढ़ सकती है चुनौती | Food Safety
WHO का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण और एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ता Antimicrobial Resistance आगे फूड सेफ्टी की चुनौती को और मुश्किल बना सकता है. रिपोर्ट में 2000 से 2021 के बीच 194 देशों में 42 प्रमुख फूड खतरों का अध्ययन किया गया. इसमें बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और रासायनिक प्रदूषकों को शामिल किया गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर आंकड़ों और निगरानी व्यवस्था की मदद से देश फूड सेफ्टी से जुड़े सबसे बड़े खतरों की पहचान कर सकते हैं और समय रहते जरूरी कदम उठा सकते हैं.





