H1N1: किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा? बचने के लिए क्या हैं एडवायजरी


H1N1 Se Kaise Bache: देश के कई हिस्सों में इन दिनों वायरल संक्रमण और फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कई लोगों में तेज बुखार 103-104 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंच रहा है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में इन्फ्लुएंजा और कोविड जैसे श्वसन संक्रमण के लक्षण कई बार एक-दूसरे से काफी मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर दोनों में अंतर करना हमेशा संभव नहीं होता।
H1N1 को आम भाषा में स्वाइन फ्लू कहा जाता है | H1N1 Se Kaise Bache
H1N1 इन्फ्लुएंजा वायरस का एक स्ट्रेन है। इसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है, हालांकि H1N1 के संदर्भ में यह नाम पूरी तरह सटीक नहीं माना जाता। इन्फ्लुएंजा वायरस समय के साथ अपने स्वरूप में बदलाव करता रहता है। वायरस में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को एंटीजेनिक ड्रिफ्ट कहा जाता है, जबकि बड़े बदलावों को एंटीजेनिक शिफ्ट कहा जाता है। इसी वजह से इन्फ्लुएंजा के खिलाफ वैक्सीन में भी समय-समय पर बदलाव किया जाता है, ताकि उस समय फैल रहे मुख्य स्ट्रेन के खिलाफ बेहतर सुरक्षा मिल सके।
H1N1 स्वाइन फ्लू से किसे लोगों को सावधान रहना चाहिए? | H1N1 Se Kaise Bache
फ्लू और दूसरे सांस से जुड़े संक्रमणों से गंभीर बीमारी का खतरा कुछ लोगों में ज्यादा रहता है। इनमें खास तौर पर शामिल हैं-
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5 साल से कम उम्र के छोटे बच्चे
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65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग
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गर्भवती महिलाएं
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कमजोर इम्युनिटी वाले लोग
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अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोग
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इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेने वाले मरीज
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गंभीर डायबिटीज या हाइपरटेंशन वाले लोग
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क्रॉनिक लंग डिजीज के मरीज
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किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीज
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ज्यादा मोटे लोगों को खतरा
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इन लोगों में संक्रमण होने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जल्द संपर्क करना जरूरी है।
कोविड और फ्लू के लक्षणों में कैसे करें अंतर? | H1N1 Se Kaise Bache
कोविड और इन्फ्लुएंजा दोनों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, शरीर में दर्द, थकान और सिरदर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि संक्रमण कोविड का है या फ्लू का। कोविड के शुरुआती दौर में स्वाद और गंध चले जाने को एक प्रमुख संकेत माना जाता था, लेकिन अब हर कोविड मरीज में ऐसा होना जरूरी नहीं है। इसलिए सिर्फ स्वाद या गंध सामान्य रहने के आधार पर कोविड को खारिज नहीं किया जा सकता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से कोविड या इन्फ्लुएंजा की जांच कराई जा सकती है। खासकर हाई-रिस्क मरीजों में सही समय पर संक्रमण की पहचान और इलाज महत्वपूर्ण है।
संक्रमण से बचने के लिए N95 मास्क और दूरी मददगार | H1N1 Se Kaise Bache
जिस तरह कोविड के दौरान संक्रमण से बचने के लिए सावधानियां अपनाई जाती थीं, उनमें से कई उपाय H1N1 से निपटने में भी प्रभावी हैं। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली सांस की बूंदों और एरोसोल से संक्रमण फैल सकता है। इसलिए भीड़भाड़ वाली जगहों, सार्वजनिक परिवहन, बाजार और स्कूल जैसे स्थानों पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अगर आसपास कोई व्यक्ति लगातार खांस या छींक रहा है तो उससे उचित दूरी रखना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर अच्छी तरह फिट होने वाला N95 मास्क भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें? | H1N1 Se Kaise Bache
अगर बुखार लगातार बना हुआ है, लक्षणों में सुधार नहीं हो रहा है या मरीज की हालत बिगड़ रही है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति, शरीर में पानी की कमी या लगातार बिगड़ते लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि हाई-रिस्क समूह के लोगों में लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह, पर्याप्त आराम और संक्रमण से बचाव की सावधानियां बीमारी को गंभीर होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।





