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नहीं रहे Prateek Yadav, लंग्स में क्लॉट की समस्या से थे परेशान! क्या इस बीमारी से किसी की भी जा सकती है जान?

Prateek Yadav: मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव इस दुनिया में नहीं रहे। प्रतीक लंबे समय से डिप्रेशन में थे। उन्हें लंग्स में क्लॉट था जिसका इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा था। लंग्स में इंफेक्शन किसी की अचानक जान ले सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि इंफेक्शन किससे है और कितना गंभीर है। कुछ ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो कि बहुत ही तेजी से बढ़ जाते हैं, फैल जाते हैं। खासकर उन मरीजों में जिनका इम्यून सिस्टम पहले से ही कमजोर हो।

अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं है या कोई पुराने किडनी के CKD के मरीज है और CLD के मरीज हैं जिनका लिवर खराब चल रहा है या फिर जिनको COPD है। फेफड़े कमजोर हैं पहले से ही लंग्स का डिफेंस सिस्टम कमजोर है। ऐसे में शरीर का डिफेंस सिस्टम यानि बीमारी से लड़ने का तंत्र भी कमजोर हो जाता है। तो ऐसे मरीज का जब इम्यून सिस्टम वीक हो जाता है तो इंफेक्शन बहुत तेजी से फैलता है। देखा जाता है कि कुछ ही घंटों में pneumonia बहुत ही जल्दी बढ़ता है और जब बढ़ता है तो वो इंफेक्शन फिर पूरे शरीर में में फैल जाता है।

कितना गंभीर है फेफड़ों का इंफेक्शन | Prateek Yadav

इससे शरीर के बाकी अंगों पर भी असर होता है। ऐसी स्थिति में मरीज का ब्लड प्रेशर कम होने लग जाता है। मरीज सेप्टिक शॉक में चला जाता है और बाकी के अंग फिर काम करना बंद कर देते हैं और इससे मरीज की मौत हो सकती है। रेस्पिरेटरी फेलियर का मतलब है कि ऑक्सीजन की कमी हो गई और खून में कार्बनडाईऑक्साइड बढ़ना शुरू हो गई, बॉडी का pH कम हो गया। मरीज को सांस की मशीन पर या फिर वेंटिलेटर पर डालना पड़ गया।

क्या लंग इंफेक्शन से मौत हो सकती है? | Prateek Yadav

अगर किसी को इंफेक्शन है किसी को कोई TB है या फंगल इंफेक्शन है। किसी तरह का निमोनिया है जो कि बिल्कुल फेफड़े की जो झिल्ली होती है उसके बाहर एकदम उसको छू रही है या किसी जो मेन ट्यूब होती है सांस की उसको छू रही है तो इंफेक्शन से झिल्ली फट जाती है। ये छिल्ली फटने से एकदम छाती में हवा भर जाती है। उसको pneumothorax बोलते हैं। अगर समय पर इस हवा को तुरंत नहीं निकाला गया तो उससे भी एकदम किसी की मौत हो सकती है। खासकर जब मरीज वेंटिलेटर पर है तो किसी को हम बाहर से सांस दे रहे हो तो उसमें तो फिर वो हमें हवा निकालनी होती है वरना वो घातक हो सकती है।

फेफड़ों में क्लॉट होन से मौत हो सकती है? | Prateek Yadav

गंभीर रूप से बीमार मरीजों में खून के थक्के बनने का खतरा भी बढ़ जाता है। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने, शरीर में सूजन, कम ऑक्सीजन और कम गतिविधि के कारण पैरों की नसों में क्लॉट बन सकते हैं। जब यह क्लॉट टूटकर फेफड़ों तक पहुंचता है, तो इसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है। यह एक अत्यंत गंभीर स्थिति है और अचानक मौत का कारण बन सकती है। हालांकि हर इंफेक्शन तुरंत मौत का कारण नहीं बनता, लेकिन कुछ स्थितियां अचानक जानलेवा हो सकती हैं। जैसे हार्ट अटैक, पल्मोनरी एम्बोलिज्म, न्यूमोथोरैक्स या तेजी से फैलता हुआ संक्रमण, जिसमें मरीज सेप्टिक शॉक में चला जाता है।

फेफड़ों के इंफेक्शन को गंभीरता से लें | Prateek Yadav

ऐसे मरीज में डॉक्टर प्रोटोकॉल और गाइडलाइंस के अनुसार एंटीबायोटिक कवरेज शुरू करते हैं, लेकिन यदि संक्रमण उस दवा से नियंत्रित नहीं होता, तो संक्रमण को फैलने का अवसर मिल सकता है। इसीलिए निमोनिया और गंभीर संक्रमण वाले मरीजों को 2 से 3 दिनों तक लगातार मॉनिटर किया जाता है। डॉक्टर यह देखते हैं कि संक्रमण कम हो रहा है या नहीं। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण पैरामीटर्स जैसे प्रोकैल्सीटोनिन (Procalcitonin), CRP और अन्य जांचें नियमित रूप से की जाती हैं, ताकि यह पता चल सके कि संक्रमण नियंत्रण में आ रहा है या नहीं।

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