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Triphala: आयुर्वेद का चमत्कार है त्रिफला! जानिए इस्तेमाल का सही तरीका

Triphala Health Benefits: आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, गलत खान-पान, मानसिक तनाव और अनियमित दिनचर्या के कारण पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है, जिससे अनेक रोग जन्म लेते हैं. त्रिफला ऐसे समय में प्राकृतिक चिकित्सक की भूमिका निभाता है. यह शरीर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालकर अंग-प्रत्यंग को शुद्ध करता है. त्रिफला का सबसे बड़ा गुण यह है कि यह किसी एक अंग पर नहीं, बल्कि पूरे शरीर पर समग्र रूप से कार्य करता है चाहे वह पाचन हो, नेत्र स्वास्थ्य हो, त्वचा की चमक हो या दीर्घकालिक रोगों से सुरक्षा यह सबके लिए लाभदायक होता है.

अच्छे स्वास्थ्य का आधार है त्रिफला | Triphala Health Benefits

आयुर्वेद में त्रिफला को सिर्फ दवा नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य का आधार माना गया है. त्रिफला तीन फलों हरड़ (हरितकी), बहेड़ा (बिभीतकी) और आंवला को मिलाकर बनाया जाता है. ये तीनों मिलकर शरीर के वात, पित्त और कफ को संतुलन में रखते हैं, इसलिए त्रिफला को त्रिदोषनाशक कहा जाता है. पुराने आयुर्वेद ग्रंथों में त्रिफला को अमृत के समान बताया गया है, क्योंकि यह शरीर को अंदर से साफ करता है और धीरे-धीरे ताकत, स्फूर्ति और रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ाता है. इसका नियमित सेवन करने से शरीर हल्का महसूस होता है और व्यक्ति खुद को ज्यादा स्वस्थ और ऊर्जावान महसूस करता है.

पाचन तंत्र को मजबूत करता है त्रिफला | Triphala Health Benefits

आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला पाचन तंत्र को मजबूत करता है. यह कब्ज, गैस, अपच, अम्लता और पेट भारी रहने जैसी समस्याओं में बेहद लाभकारी है. यह आंतों की प्राकृतिक गति को सुधारता है, जिससे मल साफ और नियमित होता है.लंबे समय तक सेवन करने से पाचन तंत्र मजबूत बनता है. इसी के साथ यह शरीर की आंतरिक सफाई (डिटॉक्स) करता है. त्रिफला एक बेहतर प्राकृतिक डिटॉक्सिफायर है. यह आंतों, यकृत और रक्त में जमा विषैले तत्वों को धीरे-धीरे बाहर निकालता है. शरीर जब भीतर से साफ होता है तो थकान, सुस्ती और भारीपन अपने आप कम होने लगते हैं.

आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक | Triphala Health Benefits

हेल्थ एक्सपर्ट ने बताया कि हरड, बिभीतकी और आंवला का सेवन आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक होता है. आयुर्वेद में त्रिफला को चक्शुष्या कहा गया है, अर्थात आंखों के लिए बेहद हितकारी. यह आंखों की थकान, जलन, सूखापन और कमजोर दृष्टि में लाभ देता है. नियमित सेवन से दृष्टि तेज होती है और नेत्र रोगों का खतरा कम होता है. इसी के साथ यह मानसिक स्वास्थ्य और स्मरण शक्ति में सहायक होता है. त्रिफला मानसिक तनाव को कम करता है और मस्तिष्क को शांत करता है. यह स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक है और अनिद्रा जैसी समस्याओं में भी लाभ देता है.

त्रिफला चूर्ण का सेवन रात को सोने से पहले आधा से एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें. इसे काढ़े के रूप में भी सेवन कर सकते हैं. एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को 1½ गिलास पानी में उबालें. जब आधा रह जाए तो छानकर सुबह खाली पेट पिएं. यह शरीर की गहरी सफाई करता है. इसके अलावा आंखों के लिए त्रिफला जल का उपयोग करे. रात में 1 चम्मच त्रिफला चूर्ण पानी में भिगो दें. सुबह छानकर उसी जल से आंखें धोएं. इससे आंखों की थकान दूर होती हैं. त्रिफला चूर्ण को गुलाब जल या दही में मिलाकर फेस पैक के रूप में लगाएं. बालों के लिए त्रिफला काढ़े से सिर धोया जा सकता है. त्रिफला आयुर्वेद का ऐसा अनमोल उपहार है, जो शरीर को रोगों से मुक्त रखते हुए संपूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करता है. नियमितता के साथ इसका सेवन किया जाए तो त्रिफला वास्तव में स्वास्थ्य, सौंदर्य और दीर्घायु का अमृत सिद्ध होता है.

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