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Fever Risk Factors: बार-बार हो रहा है बुखार? कैसे जानें ये वायरल फीवर है या मलेरिया

Fever Risk Factors: मौसम बदलते ही बुखार होना काफी आम है, इसका कोई भी शिकार हो सकता है। हालांकि जब बुखार बरसात के दिनों में आ रहा हो, साथ में जोड़ों-पैरों में दर्द की समस्या भी बनी रहती हो तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। ये मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों जैसे डेंगू-मलेरिया या फिर चिकनगुनिया का संकेत भी हो सकता है। अक्सर हम सभी बुखार को सामान्य वायरल फीवर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही लापरवाही बड़ी परेशानी का कारण बन जाती है। खासकर अगर बुखार बार-बार ठंड लगने, कंपकंपी, पसीना और कमजोरी के साथ हो रहा हो तो और भी सतर्क हो जाना जरूरी है। ये मलेरिया का संकेत हो सकता है। मलेरिया फीवर के बारे में लोगों को जागरूक करने और इसके खिलाफ वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। इस बीमारी को लेकर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि कैसे जाने हमें जो बुखार हो रहा है वो मलेरिया है या फिर सामान्य वायरल फीवर?

मलेरिया और इसका खतरा | Fever Risk Factors

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में दुनिया भर में मलेरिया के लगभग 26 करोड़ से अधिक मामले सामने आए और 5.97 लाख लोगों की मौत हुई। मलेरिया को लेकर लोगों में देखी जा रही लापरवाही सबसे ज्यादा भारी पड़ रही है। मलेरिया सिर्फ एक साधारण बुखार नहीं, बल्कि एक परजीवी संक्रमण है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह शरीर में जाकर लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है और धीरे-धीरे व्यक्ति को गंभीर रूप से कमजोर होता जाता है। मलेरिया का अगर सही से इलाज न किया जाए तो इससे ऑर्गन फेलियर तक का खतरा हो सकता है।

विशेषज्ञ कहते हैं, मलेरिया के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे ही लगते हैं जिसमें लोगों को सिर और बदन में दर्द, थकान, भूख न लगने के साथ बुखार की दिक्कत हो सकती है। यही कारण है कि कई लोग इसे वायरल या मौसम बदलने वाला फीवर मान लेते हैं। लेकिन मलेरिया में बुखार का पैटर्न अलग हो सकता है। यही कारण है कि ये समझना जरूरी है कि आपको जो बुखार हो रहा है उसका कारण क्या है?

मलेरिया के कारण क्याक्या दिक्कतें होती हैं? | Fever Risk Factors

मलेरिया का खतरा उन इलाकों में ज्यादा होता है जहां पानी जमा रहता है, साफ-सफाई की कमी होती है। गर्मी और बरसात का मौसम इसके जोखिमों को और बढ़ा देता है। इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर रवि प्रकाश चौधरी कहते हैं, यह समझना भी जरूरी है कि हर तेज बुखार मलेरिया नहीं होता और हर मलेरिया को सिर्फ बुखार से नहीं पहचाना जा सकता। इसकी सही पहचान के लिए ब्लड टेस्ट और कुछ जरूरी जांच किए जाने चाहिए। हालांकि कुछ संकेत हैं जिनकी मदद से आप बुखार में आराम से अंतर कर सकते हैं। मलेरिया होने पर आपको बुखार के साथ ठंड लगने, कंपकंपी और फिर बहुत ज्यादा पसीना आने की दिक्कत होती है। सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, उल्टी, भूख न लगने, कमजोरी और चक्कर भी आ सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में सांस लेने में दिक्कत, बेहोशी, पीलिया जैसे संकेत भी दिख सकते हैं। यदि बुखार हर 24-48 घंटे में लौट रहा हो, तो ये मलेरिया की आशंकाओं को बढ़ा देता है।

कैसे जानें बुखार मलेरिया की वजह से है या सामान्य? | Fever Risk Factors

सामान्य वायरल बुखार और मलेरिया के बुखार में अंतर समझना जरूरी है। वायरल बुखार में आमतौर पर लगातार बुखार, गले में दर्द, खांसी, शरीर दर्द और कमजोरी होती है। वहीं मलेरिया में बुखार अक्सर ठंड और कंपकंपी से शुरू होता है, फिर तेज बुखार आता है और बाद में बहुत पसीना होता है। मलेरिया में बुखार एक निश्चित पैटर्न में बार-बार लौट सकता है, जबकि वायरल फीवर में ऐसा जरूरी नहीं। अगर आपको बार-बार ठंड के साथ बुखार हो तो अलर्ट हो जाएं। समय पर डॉक्टर की सलाह और दवाओं की मदद से आप किसी बड़े खतरे से बचाव कर सकते हैं।

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