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Back Pain: उठने-बैठने का गलत तरीका बन सकता है कमर दर्द का कारण, जानें कैसे करें बचाव

Back Pain: आज कल के भागदौड़ भरी जिंदगी में कमर दर्द की समस्या आम होती जा रही है। जहां पहले के समय में इसे बढ़ती उम्र की दिक्कत को समझा जाता था, वहीं इस समय जिस प्रकार से लोगों पर काम का बोझ बढ़ा है और शारीरिक गतिविधियां कम हुई है तब से इस प्रकार की समस्या अधिक हो गई है। जानते हैं कि ऐसा क्यों होता है और बचाव के तरीके।

कैसे गलत पॉश्चर पहुंचा रहा है शरीर को नुकसान? | Back Pain

गलत पॉश्चर का असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन समय के साथ यह गंभीर रूप ले सकता है। जब हम कुर्सी पर झुककर बैठते हैं, बिना बैक सपोर्ट के काम करते हैं या गर्दन नीचे झुकाकर मोबाइल देखते रहते हैं, तो रीढ़ की हड्डी अपनी प्राकृतिक संरचना से हटने लगती है। इससे मांसपेशियों में खिंचाव, जकड़न और दर्द पैदा होता है। धीरे-धीरे यह दर्द कमर से लेकर गर्दन और कंधों तक फैल सकता है।

इसके अलावा, खड़े होने और चलने के दौरान शरीर का संतुलन सही न रखना भी समस्या को बढ़ाता है। जैसे एक पैर पर ज्यादा वजन डालकर खड़ा रहना या आगे की ओर झुककर चलना, कमर पर अतिरिक्त दबाव डालता है। आजकल ‘टेक्स्ट नेक’ जैसी समस्या भी तेजी से बढ़ रही है, जिसमें लोग घंटों तक मोबाइल स्क्रीन देखते हुए गर्दन झुकाए रखते हैं। इसका असर सिर्फ गर्दन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी रीढ़ और कमर पर भी पड़ता है।

बचाव के उपाय? | Back Pain

  • कमर दर्द से बचने के लिए सबसे जरूरी है सही पॉश्चर को अपनी आदत में शामिल करना।

  • बैठते समय हमेशा पीठ सीधी रखें और कुर्सी का पूरा सपोर्ट लें।

  • पैर जमीन पर सीधे टिके होने चाहिए और घुटने लगभग 90 डिग्री के कोण पर होने चाहिए।

  • कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन आंखों के स्तर पर रखें, ताकि बार-बार झुकने की जरूरत न पड़े।

  • हर 30 से 40 मिनट में थोड़ा ब्रेक लें, खड़े होकर चलें। इससे मांसपेशियों पर दबाव कम होता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बना रहता है।

इसके अलावा, नियमित व्यायाम और योग भी कमर दर्द से बचाव में अहम भूमिका निभाते हैं। भुजंगासन, ताड़ासन और मार्जरी आसन जैसे योगासन रीढ़ को मजबूत बनाते हैं और शरीर को लचीला बनाए रखते हैं।

यदि कमर दर्द लंबे समय तक बना रहे या लगातार बढ़ता जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि सही जांच और उपचार के जरिए समस्या को बढ़ने से रोका जा सके।

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