आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और कल्याण में एक निवेश है वृक्षारोपण: डॉ. सूर्यकान्त
केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत हुआ वृक्षारोपण

KGMU: एक पेड़ माँ के नाम भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक जन-अभियान है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को मातृत्व के सम्मान से जोड़ते हुए वृक्षारोपण को जन-आंदोलन बनाना है। इस अभियान का उद्देश्य केवल वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भावनात्मक, सामाजिक और पर्यावरणीय चेतना का संगम है। इसका उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ना, हरित आवरण बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण सुनिश्चित करना है। यह कहना है किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त का। दरअसल, विश्व पर्यावरण दिवस पर विभाग में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन वायु मित्र अभियान (डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट चेंज एवं लंग केयर फाउंडेशन) के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. सूर्यकान्त के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है वायु की गुणवत्ता का प्रभाव: डॉ. सूर्यकान्त
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने तथा मानव स्वास्थ्य की रक्षा में पेड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि मानव भोजन के बिना तीन सप्ताह और पानी के बिना तीन दिन तक जीवित रह सकता है, लेकिन स्वच्छ वायु के बिना तीन मिनट से अधिक जीवित नहीं रह सकता। एक व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 25 हजार बार श्वास लेता है तथा लगभग 10 हजार लीटर वायु उसके फेफड़ों से होकर गुजरती है, जिससे हमें रोज 500 लीटर ऑक्सीजन मिलती है, जो हमें न सिर्फ जिंदा रखती है बल्कि काम करने के लिए ऊर्जा भी प्रदान करती है। ऐसे में वायु की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।
उन्होंने कहा, पेड़ लगाना केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और कल्याण में एक निवेश है। हर पेड़ स्वच्छ हवा, कम प्रदूषण और एक स्वस्थ ग्रह के निर्माण में योगदान देता है। डॉ. सूर्यकान्त कहते हैं कि पौधे सिर्फ़ प्लांट नहीं, ऑक्सीजन प्लांट हैं। क्योंकि पौधे हमें अजीवन निःशुल्क ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है। औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, वाहनों की बढ़ती संख्या, जीवाश्म ईंधनों का अत्यधिक उपयोग तथा प्लास्टिक प्रदूषण ने वायु, जल और मिट्टी की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विशेष रूप से वायु प्रदूषण आज श्वास संबंधी रोगों का एक प्रमुख कारण बन चुका है।
कार्यक्रम में विभाग के चिकित्सक डॉ. संतोष कुमार, डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. अंकित कुमार, सीनियर एवं जूनियर डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, शोधार्थियों, पीआरसी टीम तथा विभागीय कर्मचारियों ने वृक्षारोपण अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया और विभागीय परिसर में पौधे लगाए।




