Memory Power: तेज होगी याददाश्त, कम होगा भूलने की बीमारी का खतरा, अपनाएं नेचुरल उपाय


Memory Power: सीधे हाथ से कोई भी काम करना आसान लगता है लेकिन जैसे ही उल्टे हाथ से वही काम करो, तो दिमाग तुरंत अलर्ट हो जाता है। शरीर को एक्टिव रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है दिमाग को रोज-रोज एक जैसा काम करने की आदत से बाहर निकालना वरना हम चलते-फिरते तो रहते हैं, लेकिन बॉडी और ब्रेन दोनों ऑटोपायलट मोड में चले जाते हैं। अपना ही नाम उल्टे हाथ से लिखना कितना अजीब लगता है लेकिन यही छोटी-छोटी नई चुनौतियां दिमाग के लिए एक्सरसाइज बन जाती हैं। इससे ब्रेन के नए कनेक्शन बनते हैं, फोकस बढ़ता है, मेमोरी एक्टिव होती है और सोचने-समझने की स्पीड भी तेज होने लगती है।
गौर करने वाली बात (Memory Power)– सबसे अच्छी बात ये है कि मेमोरी को बूस्ट करने के लिए कोई बड़ा इंतजाम नहीं चाहिए। विकेट पर निशाना लगाना, डार्ट खेलना, उल्टे हाथ से लिखना, माउस चलाना या रोज का कोई आसान काम दूसरे हाथ से करना, ये सब दिमाग को एक तरह से नया रास्ता दिखाते हैं। आपको बता दें कि घंटों बैठना, कम चलना, स्क्रीन पर टिके रहना और फिर कहना थकान रहती है, दिमाग नहीं चलता, मन नहीं लगता, ये सेडेंटरी लाइफस्टाइल धीरे-धीरे शरीर और दिमाग दोनों की चुस्ती छीन लेता है।
बॉडी और ब्रेन को कैसे जगाएं (Memory Power)– कोई भी मजेदार एक्टिविटी बहुत काम की साबित हो सकती है। खेल, मूवमेंट, फोकस, बैलेंस और हाथ-आंख का तालमेल, सब कुछ मिलकर दिमाग को फ्रेश महसूस कराता है। इस तरह की एक्सरसाइज न केवल बॉडी को बल्कि ब्रेन को भी जगाने में कारगर साबित हो सकती हैं। आप रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों को दिमागी कसरत बना सकते हैं। कम इस्तेमाल होने वाले हाथ-पैर को एक्टिव करके ब्रेन को ज्यादा चुस्त रखा जा सकता है। आपको भी इस तरह की एक्सरसाइज की प्रैक्टिस शुरू कर देनी चाहिए।
जरूरी है बदलाव करना (Memory Power)– अगर आप अपने दिमाग को और अपनी मेमोरी को तेज करना चाहते हैं, तो आपको अपने लाइफस्टाइल में थोड़ा बदलाव करना चाहिए। जब आप अपना रूटीन बदलकर ब्रेन को चैलेंज करेंगे, तब आपका दिमाग खुद-ब-खुद तेज होने लगेगा। इस तरह की छोटी-छोटी एक्टिविटीज याददाश्त को तेज करती हैं, भूलने की बीमारी के खतरे को कम करती हैं, डिमेंशिया-अल्जाइमर से बचाव करती हैं।





